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May 23 2018 04:53 AM

400 साल बाद इस राजघराने को मिली श्राप से मुक्ति, महल में गूंजी किलकारी

Posted at: Dec 8 , 2017 by Dilersamachar 5134

दिलेर समाचार, नई दिल्ली.मैसूर का वाडियार राजवंश बीते चार सदियों से एक श्राप से जूझ रहा था। खुद वाडियार राजघराना मानता है कि एक श्राप 400 साल से उनका पीछा कर रहा था, जिस कारण उनके वंश में संतान पैदा नहीं हो रही थी। बता दें- मैसूर के 27वें राजा यदुवीर की वैडिंग 27 जून 2016 को डूंगरपुर की राजकुमारी तृषिका सिंह से हुई थी। तृषिका सिंह ने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया है। ये श्राप था मैसूर राजघराने के साथ...

- दिवंगत महाराज श्रीकांतदत्त नरसिम्हराज वाडियार और रानी प्रमोदा देवी की अपनी कोई संतान नहीं थी। इसलिए रानी ने अपने पति की बड़ी बहन के बेटे यदुवीर को गोद लिया और वाडियार राजघराने का वारिस बना दिया।
- यह घराना राज परंपरा आगे बढ़ाने के लिए 400 सालों से फैमिली के किसी दूसरे मेंबर के पुत्र को गोद लेते आया है। 
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कहा जाता है कि 1612 में साउथ के सबसे पावरफुल विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद वाडियार राजा के आदेश पर विजयनगर की संपत्ति लूटी गई थी।

- उस समय विजयनगर की तत्कालीन महारानी अलमेलम्मा हार के बाद एकांतवास में थीं, लेकिन उनके पास काफी सोने, चांदी और हीरे- जवाहरात थे।
- वाडियार ने महारानी के पास दूत भेजा कि उनके गहने अब वाडियार साम्राज्य की शाही संपत्ति का हिस्सा हैं इसलिए उन्हें दे दें। 
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अलमेलम्मा ने जब गहने देने से इनकार किया तो शाही फौज ने जबरन खजाने पर कब्जे की कोशिश की। 
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इससे दुखी होकर अलमेलम्मा ने कथित तौर पर श्राप दिया था कि जिस तरह तुम लोगों ने मेरा घर ऊजाड़ा है उसी तरह तुम्हारा राजवंश संतानविहीन हो जाए और इस वंश की गोद हमेशा सूनी रहे।

- श्राप देने के बाद अलमेलम्मा ने कावेरी नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

महल में होती है इस मूर्ति की पूजा

- आज भी महल में उस श्राप से बचने के लिए अलामेलम्मा की मूर्ति देवी के रूप में पूजा होती है, लेकिन इससे कोई खास फर्क पड़ा हो, ऐसा नहीं लगता।
- राजा वडियार के इकलौते बेटे की मौत हो गई थी। तब से हर एक पीढ़ी बाद मैसूर के राजपरिवार को उत्तराधिकारी के रूप में किसी को गोद लेना पड़ता है।
- राजपरिवार उत्तराधिकारी के रूप में जिसे गोद लेता है वह हमेशा परिवार का ही कोई व्यक्ति होता है।

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