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January 18 2019 09:40 AM

बेटी के इलाज के लिए हुए झगड़े के बीच कोर्ट पहुंचे माता-पिता

Posted at: Jan 7 , 2019 by Dilersamachar 5614

दिलेर समाचार, अहमदाबाद। बेटी के इलाज को लेकर पति-पत्नी के बीच मतभेद इतना बढ़ गया कि यह विवाद गुजरात हाईकोर्ट पहुंच गया। एक डॉक्टर दंपति के बीच अपनी बेटी के थैलेसीमिया के इलाज को लेकर बहस हुआ और बात इतनी बड़ी हो गई कि कोर्ट की शरण लेनी पड़ी जिसके अनुसार बोन मैरो ट्रीटमेंट होना चाहिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, न्यायमूर्ति सोनिया गोकानी ने दो विशेषज्ञों की राय मांगी है कि बच्ची के लिए क्या ट्रांसप्लांट उचित है।

विशेषज्ञों के मंगलवार को अदालत में सीलबंद कवर में अपनी दाय देनी है। यह विवाद राजकोट के डॉक्टर कपल डॉ. मयूरी और डॉ. शैलेष मूंधवा के बीच है। उनकी चार साल की बेटी नायरा इलाज के लिए इंतजार कर रही है और अलग-अलग रह रहे कपल का बेटी के इलाज को लेकर विवाद हो गया। पिता ने मां के इस फैसले पर यह आपत्ति जताई है कि इलाज जोखिमभरा और महंगा है और मां जोर देकर कहती है कि पिता को इलाज का खर्च वहन करना चाहिए।

दोनों की शादी साल 2012 में हुई थी और बेटी का जन्म फरवरी 2015 में हुआ था। वह इनहेरिटेट ब्लड डिसऑर्डर से पीड़ित है। वैवाहिक कलह के बाद, पत्नी के पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दायर किया था और मेन्टेनेंस की मांग की थी। कोर्ट ने बच्ची के लिए 20 हजार रुपए के भरण-पोषण का आदेश दिया था।

जैसे-जैसे बच्ची की हालत बिगड़ती गई। उसकी मां ने पिता से मेडिकल खर्चों की मांग की। वह पिछले दो सालों से इसके लिए लड़ रही है। चूंकि उसके पास परिवार में पूरा HLA मैच्ड डोनर नहीं है, इसलिए उसे TCR अल्फा/बीटा सीडी 45 आरए डेप्लेशन किट का उपयोद कर हाप्लो आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांस्प्लांटेशन करवाने की सलाह दी। उसने बेंगलुरु में बेटी का इलाज करने का फैसला किया और इसके लिए पति से 45 लाख रुपए मांगे।

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