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July 21 2018 06:33 PM

बैंक के बाबू की ताकत

Posted at: Mar 3 , 2018 by Dilersamachar 5101
विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

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दिलेर समाचार, कल जब मुझे मालूम हुआ कि देश के बैंक बाबू के रूक्के की ताकत विदेशांे में कितनी है तो मुझे बड़ा गर्व हुआ। नीरव मोदी जैसा नगीनों का सौदागर ही हमारे ऐसे हीरे जैसे बैंक बाबुआंे को पहचान सकता है।  बिना डिस्पैच किये गये शेट्टी के अनआफिशियल रुक्के पर, विदेशांे में हमारे एक दो नहीं, कई कई बैंकांे ने मौके पर नीरव मोदी जैसे जरूरतमंद गरीब व्यापारी को करोड़ांे रुपये बिना आधार कार्ड लिये दे दिये। ये है वास्तविक ताकत बैंक के बाबू की।

मुझे कोफ्त है कि मीडिया नीरव मोदी , उनके मामा जी और बीबी व भाई की पब्लिसिटी तो खूब कर रहा है पर शेट्टी की वाहवाही वैसी नहीं हो रही जो होनी चाहिये। मुझे पक्का यकीन है कि यदि शेट्टी जैसे बाबुओं पर सरकार भरोसा करे और उन्हें जुहू में एकआध फ्लैट वगैरह दिलवा कर सही संसाधन उपलब्ध करवाये तो वे सहज ही अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग में ऐसी सेंधमारी करने के लूप होल ढ़ूंढ़ निकालने की क्षमता रखते हैं कि एशियन डेवलपमेंट बैंक, वर्ल्ड बैंक वगैरह से भारत का सारा कर्जा गुपचुप तरीके से बिना लोन पटाये ही बुक्स में गायब हो सकता है।

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अपने देश के भीतर अपने बैंक के बाबुआंे की ताकत का अहसास हम सब को जब तब होता ही रहता है। मेरा बेटा  पढ़ने में अति प्रतिभाशाली है।सारे प्रदेश से इकलौते उसका चयन दुनियां के एक रेयर से कोर्स में न्यूयार्क यूनिवर्सिटी में हुआ। मैंने प्रदेश के बच्चांे के स्व प्रस्तावित मामा  जी को कई सभाओं में चिल्ला चिल्ला कर कहते सुना था कि हर बच्चे को फीस की चिंता किये बिना केवल पढ़ने पर ध्यान देना चाहिये। उच्च शिक्षा की फीस सरकार देगी।

मुझे भरोसा था कि ब्रेन ड्रेन रोकने, प्रदेश से चयनित मेरे इकलौते बच्चे की फीस सरकार जरूर देगी पर मुझे नहीं मालूम था कि आम नागरिक के लिये आकर्षक सुनाई देने  वाली योजनायें इस विभाग से उस विभाग में आवेदन फारवर्ड करने के लिये ही होती हैं। जिन्हें वास्तव में सरकारी मदद मिलती है वे जाने कौन से लोग होते हैं। खैर, मैं तो मामा नहीं, पिता हूं। मैंने बेटे की शिक्षा के लिये बैंक से उधार लेने का निर्णय किया। और तब मुझे पहली बार भारतीय बैंक के बाबू की ताकत का अहसास हुआ।

मुझे महज कुछ लाख उधार चाहिये थे पर इसके लिये बैंक के बाबू ने मुझसे मेरी और पत्नी की जीवन बीमा की पालिसी, मकान के कागजात, क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट, इनकम टैक्स का रिटर्न, आधार कार्ड, पैन कार्ड, नवीनतम फोटो, सेलरी स्लिप और न जाने क्या क्या लेने के बाद भी नोटराईज्ड एफिडेविट, स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट , प्रोसेसिंग फी वगैरह बहुत कुछ लेने के लिये बैंक के कई चक्कर लगवा दिये थे। इस सबके बाद शिक्षा हेतु भी। प्रतिशत ब्याज दर पर जब लोन स्वीकृत हुआ तो मुझे देश की बैंकिंग व्यवस्था पर बड़ा गर्व हुआ।

अब जब नीरव मोदी काण्ड उजागर हुआ, वह भी स्वयं नीरव मोदी की गलती से क्यांेकि उन्हांेने पुराने भरोसे पर नये एल ओ ए की डिमांड की पर चूंकि शेट्टी बाबू रिटायर हो चुके थे और नया बाबू उतना होशियार नहीं था, अतः मामला जमाने की नालेज में आ गया। मुझे नहीं मालूम कि नीरव मोदी का बैंक अकाउन्ट आधार कार्ड से लिंक है या नहीं पर उन्होंने बिना डकार लिये करोड़ों गटक जाने में विश्व रिकार्ड बना दिया है।

इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीय बैंक के शेट्टी जैसे बाबुओं की योग्यता पर आई टी एक्सपर्ट्स के साफ्टवेयर पर शेट्टी के दिमाग की जीत का प्रमाण प्रस्तुत किया है। मेरा मन है कि शेट्टी बाबू का नाम पद्म विभूषण सम्मान के लिये नामांकित किया जावे। योग्यता का सम्मान हर क्षेत्रा में किया ही जाना चाहिये।


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