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November 19 2018 08:10 AM

सामने आई मोहल्ला क्लिनिक की ये असलियत

Posted at: Sep 2 , 2017 by Dilersamachar 5608

दिलेर समाचार,यह जानना जरुरी है कि जो मोहल्ला क्लीनिक चल रहे हैं उनमें जनता के लिए कैसी व्यवस्था है? क्या खुले हुए मोहल्ला क्लिनिक में सभी तरह के टेस्ट हो रहे हैं? क्या सभी तरह की दवाई मिल रही हैं? इन सभी सवालों को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली आज तक की टीम ने कुछ एक मोहल्ला क्लिनिक की असलियत जानने के लिए रियलिटी टेस्ट किया.

सबसे पहले दिल्ली आज तक की टीम उस्मानपुर के सड़क पर बने हुए पोटा केबिन मोहल्ला क्लिनिक में गई तो वहां पाया कि मरीज तो इक्का-दुक्का मोहल्ला क्लीनिक में मौजूद हैं मगर क्लीनिक में कुत्ता सोया हुआ है. पूछने पर डॉक्टर साहब ने बताया कि यहां टेस्ट नही होते हैं मगर आगे वाले क्लीनिक में सभी तरह के टेस्ट होते हैं.

डॉक्टर साहब ने जिस मोहल्ला क्लीनिक में टेस्ट होने का दावा किया था जब उसकी हकीकत जानने हम लोग आगे पहुंचे है तो वहां ना डॉक्टर था नर्स थी उस मोहल्ला क्लीनिक में कंस्ट्रक्शन का काम हो रहा था.

इसके बाद दिल्ली आज तक की टीम ने दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय की विधानसभा बाबरपुर में मौजूद मोहल्ला क्लीनिक का दौरा किया जहां डॉक्टर और नर्स मौजूद थे. डॉक्टर साहब ने दावा किया की कि बोर्ड पर लिखे हुए सभी तरह के टेस्ट यहां हो रहे हैं मगर वहां मौजूद मरीजों ने ऐसा होने से साफ इंकार कर दिया.

अब यहां मरीजों की माने या डॉक्टर की माने इसी उलझन में हम लोगों ने बाबरपुर विधानसभा में मौजूद दूसरे मोहल्ला क्लीनिक का दौरा किया जहां डॉक्टर साहब मौजूद नहीं मिले नर्स ने बताया कि मोहल्ला क्लीनिक में गंदगी रहती है डॉक्टर साहब बीमार हैं जिसकी वजह से वह क्लीनिक से चले गए हैं. यहां भी किसी तरह का टेस्ट होने से साफ मना कर दिया गया, और सिर्फ BP सुगर जैसे एक दो टेस्ट होने की बात कही गई.

जाहिर है दिल्ली सरकार के तमाम विधायक और ज्यादा मोहल्ला क्लीनिक की मांग को लेकर LG निवास में धरने पर बैठे हैं मगर जो मोहल्ला क्लीनिक खुल गए हैं क्या वास्तव में वह उस स्तर पर काम कर रहे हैं जैसा कि सरकार दावा करती है यह कही ना कही सवालिया निशान जरूर खड़े करता है. हमने कुल मिलाकर 4 मोहल्ला क्लीनिक का दौरा किया जिसमें से डॉक्टर ने एक क्लीनिक में टेस्ट होने की बात कही मगर वहां मौजूद मरीजों ने इसे झुठला दिया, एक मोहल्ला क्लिनिक से खुद डॉक्टर साहब गाइब दिखे , तो वहीं सुकून की बात ये रही कि मरीजों को दवाई मिलती दिखी, मगर दवाई देने के नाम पर जिस तरह की पब्लिसिटी केजरीवाल सरकार करती है, वो ट्विटर से परे हकीकत की ज़मीन पर नदारद दिखी.

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