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February 27 2020 04:30 AM

1500 साल पहले लोग ऐसे करते थे अपना मनोरंजन

Posted at: Aug 14 , 2017 by Dilersamachar 5233

दिलेर समाचार, लोगों की यह आम धारणा है कि सांडों की लड़ाई यूरोप के देशों में होती थी और भारत में इसकी कोई प्रथा ही नहीं थी, लेकिन सिरपुर के तिवरदेव विहार का जो प्रवेश द्वार प्रकाश में आया है, उसमें सांडों की लड़ाई का स्पष्ट चित्रण है। वरिष्ठ पुरातत्वविद् और सलाहकार पद्मश्री डॉ। अरुण शर्मा ने कहा कि कई ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिससे इसकी पुष्टि होती है कि प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ मनोरंजन के लिए जानवरों की लड़ाई में बहुत आगे था, क्योंकि सांडों की लड़ाई का दृश्य भारत के किसी और खुदाई से प्राप्त नहीं हुआ है।

डॉ। शर्मा ने कहा कि सिरपुर की खुदाई में सांडों की लड़ाई का जो चित्रण मिला है वह लगभग 1500 साल पुराना है। पुरातत्व के जानकारों का मानना है कि आज से हजारों साल पहले जब तकनीक बिल्कुल विकसित नहीं थी, लेकिन मानव का अस्तित्व था तो जाहिर सी बात है कि वह अपने मनोरंजन के लिए इस तरह के खेलों का आयोजन करते रहे होंगे।

डॉ। शर्मा के अनुसार, सिरपुर के तिवरदेव विहार की खुदाई में जो चित्रण सामने आए हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन समय से लोगों के मनोरंजन के लिए जानवरों की लड़ाई की प्रथा थी। डॉ। शर्मा का मानना है कि यदि गौर से उक्त चित्रण को देखा जाए तो ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि दृश्य में उस व्यक्ति का सांड पराजित हो रहा है और वह हताशा में अपने सांड को पीछे से बढ़ावा देते दिख रहा है।

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