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August 7 2020 03:04 PM

भारत में 50 फीसदी लोग ‘सेकंड हैंड स्मोकिंग‘ के शिकार

Posted at: Jul 5 , 2020 by Dilersamachar 5183

प्रभुनाथ शुक्ल

भारत में नशा लोगों की नसों में घुस  चुका है। तम्बाकू के शौकीन काफी संख्या में पाए जाते हैं। लाकडाउन में तम्बाकू पर प्रतिबंध होने के बाद भी लोग इसका उपयोग कर रहे थे। बाजार से कई गुना अधिक दाम चुका कर तम्बाकू का सेवन किया जा रहा था। कच्ची तम्बाकू का खैनी के रुप में जबकि पक्की का जर्दा और सूखा बनाकर गाँव - देहात में हुक्का के रुप में भी प्रयोग किया जाता है। बुजुर्गों से अधिक इस नशे की युवापीढ़ी शौकीन है। जर्दे के डिब्बे पर कैंसर की वैधानिक चेतावनी होने के बाद भी लोग बेझिझक उपयोग करते हैं जबकि कोरोना में सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा था।

निर्यात में छठे स्थान पर है तंबाकू। वर्तमान समय में किसी न किसी रूप में दुनिया के प्रत्येक देशों में पाया जाता है। दुनिया भर में तंबाकू की 65 किस्में पाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर वर्ष गैर संचारी रोग कैंसर, मधुमेह, सांस की बीमारी, त्वचा की बीमारी, हृदय रोग से मरने वालों की संख्या 38 लाख है जिसमें तंबाकू की अहम भूमिका है।

एक अनुमान के अनुसार पूरी दुनिया में प्रति 6 सेकंड पर एक व्यक्ति की मौत का कारण तंबाकू है। भारत में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या लगभग 27 करोड़ है। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन लगभग 2700 लोगों की मृत्यु का कारण तंबाकू बनता है। ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण  2016-17 के अनुसार भारत में 42.47 प्रतिशत पुरुष तथा 12.24 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का प्रयोग करते हैं। 

सेकंड हैंड स्मोकिंग भी इस दौर में जानलेवा साबित हो रहा है। सेकंड हैंड स्मोकिंग यानी जिसमें व्यक्ति स्वयं धूम्रपान नहीं करता किंतु उसके परिवार के सदस्य या आसपास के लोगों द्वारा धूम्रपान करने के कारण श्वांस के माध्यम से धूम्र ग्रहण करते हैं। इसे ‘पैसिव स्मोकिंग‘ परोक्ष धूम्रपान यानी ईटीएस (एनवाँयरमेंटल टोबैको स्मोक) के नाम से भी जानते हैं।

एआरटी सेंटर, एसएस हास्पिटल (आईएमएस, बीएचयू वाराणसी) के वरिष्ठ परामर्शदाता डा. मनोज कुमार तिवारी के अनुसार यह स्थिति बेहद घातक है। सिगरेट और बीड़ी पीने वाले जो धुआं छोड़ते हैं उसमें सामान्य हवा की अपेक्षा तीन गुना ज्यादा निकोटीन और 50 गुना अमोनिया पाया जाता है। डा.मनोज के अनुसार जो लोग धूम्रपान करते हैं, उसका प्रभाव उनकी सांसों में 24 घंटों के बाद भी बना रहता है।   इनके बच्चों में ‘सेकंड हैंड स्मोकिंग‘ के कारण दिल का दौरा पड़ने या स्ट्रोक का खतरा बहुत अधिक रहता है। ‘सेकंड हैंड स्मोकिंग‘ के कारण महिलाओं में बांझपन का खतरा भी बढ़ जाता है। एक अनुमान के अनुसार भारत में 50 फीसदी लोग सेकंड हैंड स्मोकिंग के शिकार होते हैं।

भारत में तंबाकू कई प्रकार से उपयोग में लाया जाता है जिसमें तंबाकू वाला पान, पान मसाला, तंबाकू, सुपारी व बुझे हुए चूने का मिश्रण, मैनपुरी तंबाकू, मावा, खैनी (तंबाकू व बुझे हुए चूना का मिश्रण) चबाने योग्य तंबाक, सनस, गुल, बज्जर, गुढाकू, क्रीमदार तंबाकू पाउडर, तंबाकू युक्त पानी, बीड़ी सिगरेट, सिगार, चौरट, चुट्टा, घुमटी, पाइप, हुकली, चिलम, हुक्का में किया जाता है। इसका बुरा प्रभाव हमारी सेहत पर पड़ता है।

तंबाकू के दुष्प्रभाव से गुर्दे की बीमारी, नेत्रा रोग, सांस की समस्याएं, दांतों की समस्या, मसूड़ों की समस्या, संधि शोथ, आंतों में सूजन, स्तंभन रोग, त्वचा रोग, विभिन्न प्रकार के कैंसर, उच्च रक्तचाप और दमा जैसी बीमारियाँ होती हैं। महिलाएँ अगर गर्भवती हैं तो इसका सबसे बुरा प्रभाव आने वाले बच्चे पर पड़ता है जिसमें गर्भ के दौरान रक्त स्राव,  समय से पूर्व बच्चे का जन्म, मृत बच्चे का जन्म , प्लेसेंटा संबंधी गड़बड़ी, जन्म के समय बच्चे के अंगुलियों का टेढ़ा होना प्रसव में जटिलता जैसी समस्या उत्पन्न होती है जबकि शिशु के जन्म के बाद इसका प्रभाव बच्चे में एलर्जी, रक्तचाप, मोटापा, असामान्य विकास,  फेफड़ों में समस्या और अस्थमा इत्यादि के रुप में देखा जाता है।

दुनिया इस वक्त कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहीं है। लाखों लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। इसमें तम्बाकू सेवन भी अहम भूमिका निभा रहा है। डा.मनोज के अनुसार तंबाकू के उपयोग से श्वसन संबंधी अनेक बीमारियां होती हैं। तंबाकू सेवन से बीमारियों की गंभीरता बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जो लोग तंबाकू का सेवन करते हैं उनमें कोविड-19 का संक्रमण अधिक तेजी से फैलता है क्योंकि तंबाकू का उपयोग करने वालों के फेफडे़़ अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं जिससे इस तरह के व्यक्तियों में न केवल कोरोना के संक्रमण का खतरा अधिक होता है बल्कि फेफड़ा कोरोना वायरस व उससे जुड़ी बीमारियों से लड़ने में भी सक्षम नहीं होता है।

तंबाकू हृदय रोग, कैंसर, श्वसन तंत्रा की बीमारियां, उच्च रक्तचाप, मधुमेह इत्यादि के लिए उच्च जोखिम कारक है। कोरोना से  संक्रमित व्यक्ति तंबाकू का उपयोग करके यदि असुरक्षित रूप से इधर-उधर थूकता है तो इससे अन्य लोगों केे संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है क्योंकि तंबाकू चबाने से मुंह में अधिक लार बनता है जिसके कारण ऐसे व्यक्ति इधर-उधर थूकने के लिए बाध्य होते हैं। इस लिए सरकार ने सार्वजनिक स्थान या भीड़भाड़ वाले इलाकों में थूकने को दंडनीय अपराध में शामिल किया है।

तम्बाकू की लत से पीडि़त व्यक्ति को निजात दिलाई जा सकतीं है। ‘निकोटीन गम‘ चबाना एक सामान्य उपाय है। यह तंबाकू लेने की तीव्र इच्छा को दूर करने में प्रभावशाली होता है। इसमें परिवार और समाज का सहयोग लेना बेहद जरूरी है। आम तौर पर देखा गया है कि कई लोग सामाजिक व्यवहार या गलत संगत में पड़ तम्बाकू का सेवन करने लगते हैं लेकिन दृृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार एवं मित्रों के सहयोग से इस लत से छुटकारा मिल सकता है। जिन लोगों ने सफलतापूर्वक तंबाकू का सेवन छोड़ दिया है उन्हें  सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना चाहिए।

मीडिया को भी इसमें अहम भूमिका निभानी चाहिए। ऐसे लोगों को समाज के सामने एक प्रयोग के रुप में लाना चाहिए। मनोवैज्ञानिकों के उचित परामर्श एवं मनोचिकित्सा से  कुछ दवाई लेकर तंबाकू की लत पर आसानी से विजय मिल सकतीं है। हम युवाओं से अपील करते हैं कि ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ पर यह संकल्प लें कि वह न तंबाकू का सेवन करेंगे और न दूसरों को करने देंगे। सामाजिक एवं पारिवारिक सहयोग से भारत को नशामुक्त बना विश्व गुरु बनाने में सहयोग प्रदान करें। 

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