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8 दिन में बिकी 800 किलो चांदी, भगोरिया पर नहीं दिखा मंदी का असर

Posted at: Feb 25 , 2018 by Dilersamachar 9740

दिलेर समाचार, आलीराजपुर। दुनियाभर में भले ही मंदी का दौर हो, लेकिन झाबुआ-आलीराजपुर इससे दूर हैं। व्यापारियों को यह बोलने में कोई हिचक नहीं है कि हर भगोरिया में खरीदी का आंकड़ा बढ़कर ही आता है। इस साल आठ दिन में दोनों जिलों को मिलाकर 800 किलो चांदी की बिक्री हो गई है।

भगोरिया में आदिवासी परिवारों का मुख्य आकर्षण है-चांदी। इसका अंदाजा इससे लगता है कि 1000 ग्राम चांदी के एवज में 50-60 ग्राम सोना ही बिकता है। सात पीढ़ी से कारोबार कर रहे रूपेश सोनी बताते हैं कि एक आदिवासी महिला 3-4 किलो चांदी के गहने पहनती है। यह सिर्फ सौंदर्य ही नहीं, बल्कि उनकी क्षमता भी दर्शाती है। हर आदिवासी भगोरिया 700 ग्राम से एक किलो तक चांदी खरीदने की कोशिश करता है।

मूलत: झाबुआ के रहने वाल रतलाम जनपद पंचायत सीईओ लक्ष्मण सिंह डिंडोर बताते हैं कि 60 फीसदी पलायन के बाद भी सभी आदिवासी भगोरिया में लौटकर आते हैं और यहीं खरीदारी करते हैं, इसलिए बाजार का अर्थशास्त्र कभी नहीं गड़बड़ाता। झाबुआ सोना-चांदी व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन जैन बताते हैं कि ये आदिवासियों का पुष्य नक्षत्र है। भगोरिया के दौरान ही सबसे ज्यादा शादियां होती हैं इसलिए आठ दिन में लगभग 800 किलो चांदी बिक गई।

 

आठ तरह के गहने

आदिवासी गहने बनाने में माहिर राकेश सोनी बताते हैं बिंदी (मांग टीका), घुंघरू, मोरदेले, तागली, साकली, बास्टिया (बाजूबंद), झेला (नाहरमुखी), कंदोरा, तीन लड़ पायजेब मुख्य है। अब तो विलुप्त होते गहने भी बनने लगे हैं।

व्यापारियों को देते हैं गुड़ की पोटली

भगोरिया में खास पंरपरा है कि आदिवासी जिन व्यापारियों से पीढ़ी दर पीढ़ी चांदी खरीदते हैं उन्हें एक किलो गुड़ की पोटली देकर तिलक लगाकर उनका सम्मान करते हैं।

नानपुर में दिखी आदिवासी परंपरा, आज झाबुआ में भगोरिया

भगोरिया का उल्लास दूसरे दिन शनिवार को भी रहा। आलीराजपुर जिले के नानपुर, उमराली और झाबुआ जिले के मेघनगर, रानापुर, बामनिया व झकनावदा में मेले लगे। नानपुर में आदिवासी परंपरा का रूप दिखाई दिया। यहां आदिवासी परंपरागत पहनावे में युवक-युवतियां पहुंचे। ढोल-मांदल की थाप पर दिनभर लोग थिरकते रहे। युवतियां चांदी के आभूषणों से लदकर आईं। उमराली में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। झाबुआ जिले के रानापुर और मेघनगर में राजनीतिक जोर दिखाई दिया। यहां कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी गेर निकाली। नेताओं ने ढोल-मांदल बजाई और गेर में चले। ग्रामीणों ने झूले-चकरी का आनंद लिया।

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