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December 9 2019 07:20 PM

अधीर रंजन ने निर्मला सीतारमण को बोला ‘निर्बला'

Posted at: Dec 3 , 2019 by Dilersamachar 5287

दिलेर समाचार, नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘निर्बला' करार दिया जिस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों खासकर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि चौधरी को इसके लिए खेद प्रकट करना चाहिए. वित्त मंत्री सीतारमण ने कांग्रेस नेता पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा में हर महिला ‘सबला' है. कॉरपोरेट कर में कटौती से जुड़े संशोधन वाले ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक 2019' पर लोकसभा में चर्चा के दौरान चौधरी ने कहा कि वह वित्त मंत्री का सम्मान करते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्हें रोका जा रहा है और ऐसे में उन्हें निर्मला नहीं, ‘निर्बला' कहा जा सकता है.
इस पर आपत्ति जताते हुए ठाकुर ने कहा कि अधीर रंजन का ‘निर्बला' कहना अनुचित है और उन्हें खेद प्रकट करना चाहिए. बाद में चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार में ही दो महिलाएं सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में रहीं. इस सरकार में कई महिलाओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. भाजपा में हर महिला ‘सबला' है. चौधरी ने कहा कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला जा रहा है.
वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि यह कहना गलत है कि नरेंद्र मोदी सरकार आलोचना नहीं सुनती है. कॉरपोरेट कर में कटौती से जुड़े संशोधन वाले ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक 2019' पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार आलोचना सुनती है और सकारात्मक ढंग से जवाब देती है तथा कदम भी उठाती है. मंत्री ने एक आर्थिक समाचार पत्र के कार्यक्रम में उद्योगपति राहुल बाजाज के ‘डर का माहौल' वाले बयान का हवाला देते हुए कहा कि उस जगह गृह मंत्री (अमित शाह) ने पूरा जवाब दिया और जब भी आलोचना होती है तो यह सरकार सुनती है और जवाब देती है.
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में तो कुछ लोगों ने सबसे खराब वित्त मंत्री कह दिया, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा. मंत्री ने कहा कि यह सरकार और प्रधानमंत्री आलोचनाओं को सुनते हैं और सकारात्मक ढंग से जवाब देते हैं. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सवाल पूछकर भाग जाना कुछ लोगों के डीएनए में है, लेकिन हमारी पार्टी (भाजपा) में ऐसा नहीं है. कुछ सदस्यों की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए कुछ तत्काल कदम उठाना था और ऐसे में यह अध्यादेश लाना पड़ा.
निर्मला ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है कि जरूरत पड़ने पर अध्यादेश लाए गए हों. 1991-96 के दौरान 77 अध्यादेश और 2004-09 के दौरान 36 अध्यादेश लाए गए थे. संप्रग सरकार के समय जीडीपी आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि पहले भी जीडीपी नीचे गिरकर आगे बढ़ी है.

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