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नोएडा आने के बाद इन मुख्यमंत्रियों की गई थी कुर्सी, कुछ ने दिखाई हिम्मत तो कई घबराए

Posted at: Dec 25 , 2017 by Dilersamachar 9642

दिलेर समाचार, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने एक दशकों पुराने अंधविश्वास को तोड़ दिया. यूपी में करीब 35 सालों से एक अंधविश्वास सभी मुख्यमंत्रियों पर हावी था कि जो भी नोएडा है उसकी कुर्सी चली जाती है. उत्तर प्रदेश का ये हाइटेक शहर मुख्यमंत्रियों के दर्शन के लिए तरसता रहा. समाजवादी विचारधारा वाले मुख्यमंत्री भी इसी डर से नोएडा नहीं आते थे. दरअसल इस अंधविश्वास के पीछे कई बातें जुड़ी थीं जो इस दावे के पुख्ता करती थीं.  तत्कालीन यूपी के सीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह नोएडा में वीवी गिरी श्रम संस्थान का उद्घाटन करने आए थे. उसके बाद वह मुख्यमंत्री पद से हट गए. 

साल 1988 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह फिल्म सिटी स्थित एक स्टूडियो में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए. वहां से उन्होंने कालिंदी कुंज पार्क का उद्घाटन किया था. उसके कुछ माह बाद ही वह मुख्यमंत्री पद से हट गए. वीर बहादुर सिंह के सीएम पद से हटने के बाद नारायण दत्त तिवारी यूपी के मुख्यमंत्री बने. वह भी नोएडा के सेक्टर 12 स्थित नेहरू पार्क का उद्घाटन करने वर्ष 1989 में आए. उसके कुछ समय बाद वह भी मुख्यमंत्री पद से हट गए. साल 1994 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव नोएडा के सेक्टर 40 स्थित खेतान पब्लिक स्कूल का उद्घाटन करने आए. यादव ने मंच से कहा कि मैं इस मिथक को तोड़ कर जाऊंगा कि जो मुख्यमंत्री नोएडा आता है उसकी कुर्सी चली जाती है. उसके कुछ माह बाद ही वह मुख्यमंत्री पद से हट गए. इसके बाद 6 सालों तक कोई नोएडा नहीं आया. साल 2000 में जब डीएनडी फ्लाईओवर का उद्घाटन हुआ तो उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने नोएडा आने के बजाय दिल्ली से ही इसका उद्घाटन किया. मायावती ने 2008 में इस मिथक को तोड़ा. वह नोएडा में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने आईं. उसके बाद वह लगातार चार बार नोएडा आईं. 

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