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September 30 2020 09:36 AM

तीस के बाद

Posted at: Jul 28 , 2020 by Dilersamachar 9158
मंजु तीस की उम्र पार करने के बाद भी चेहरा बच्चों जैसा कोमल, जवानी की नई उमंग सा पानीदार बना रह सकता है बशर्ते चेहरे की त्वचा की ओर सतर्कता से ध्यान दिया जाये। तीस की उम्र तक आते-आते यौवन, सच पूछा जाए तो मुंह फेरने लगता है। बढ़ती उम्र के संग कई नई समस्याएं उभरने लगती हैं। चेहरे का पकापन, त्वचा की रूखी फितरन, बालों की सफेदी, झुर्रियों का जमाव भले ही अभी शुरूआत में होता है पर यही वह समय है जहां त्वचा की प्रकृति पहचान कर उसका उपचार किया जाए और उसे वक्त से संभाल लिया जाए। यह भी सच है कि यौवन किसी की थाती नहीं है पर इसे लापरवाही बरत वक्त से पहले हाथ से गंवाया जा सकता है तो बेहद संभाल, ध्यान व रख-रखाव से आगे के कई वर्षों के लिये बखूबी सम्भाला भी जा सकता है। तीस के बाद की समस्याएं मुख्यतः हारमोन्स से संबंधित रहती हैं। जहां इस समय में हारमोन्स संतुलन से बेकाबू हुए, वहीं वजन बढ़ना, मानसिक उथल-पुथल, चिन्ता, तनाव, मासिक धर्म की गड़बडि़यां शुरू हो जाती हैं। हर गड़बड़ी, समस्या किसी दूसरी समस्या की उपज होती है, अतः यदि तीस के बाद मुख्यतः वजन को काबू में कर लिया जाए तो तमाम दिक्कतें भले ही वे पाचन से संबंधित हों या तनाव-चिन्ता से, खुद-बखुद दूर होने लगेंगी। पोषक आहार, व्यायाम व व्यस्तता, साथ ही शरीर के रख-रखाव की तरफ ध्यान देकर कोई महिला तीस पैंतीस की हो जाने पर भी अपनी उम्र की चोर खुद ही बन सकती है। हरी पत्तेदार सब्जियां, कच्चे फल, सब्जी व दालों, दूध, दही का प्रयोग करना व व्यायाम को अपने जीवन का नियमित अंग बना लेना जहां शरीर को चुस्त और फुर्तीला रखेगा, वहीं भूख भी खुल कर लगेगी और पेट भी साफ रहेगा। व्यस्तता को अपना कर चिन्ता से दूर रहा जा सकता है। जो व्यक्ति जितना खाली रहेगा, उसके पास करने को कुछ भी ठोस नहीं होगा, वह उतना ही दिमागी उलझनों से घिरा रहेगा और झुर्रियों को दावत देगा। नियमित सफाई का ध्यान रखना, साथ ही सैर को जाना ज्यादा लाभप्रद है। घरेलू काम खुद करके महिलाएं अपने बदन को ज्यादा सुगठित बनाए रख सकती हैं। इसमें दो राय बिलकुल नहीं हैं। मौसम के फल-सब्जियां खाना और ज्यादा मिर्च-मसालों से परहेज करना चेहरे पर ताजगी व लावण्य बनाए रखना है। पानी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग चेहरे को रूक्षता से दूर रखता है और चेहरे की स्निग्धता बना रहती है। तीस के बाद की उम्र लावण्य की चोर है। इस चोर का मुकाबला तो स्वयं को कुछ समय देकर खुद पर ध्यान दे कर ही किया जा सकता है। मौसम के हिसाब से भोजन व रख-रखाव का ध्यान रखना भी जरूरी है। त्वचा शरीर का सबसे ज्यादा संवेदनशील भाग है। इसकी लुनाई, चमक, स्निग्धता लगातार बनी रहे, इसके लिए आधा घण्टा ही खुद को देना पर्याप्त रहेगा। प्रयत्न करने से उम्र अपनी मुट्ठी में ज्यादा समय तक रहेगी। यह सार्थक उपलब्धि ही तो है।

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