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August 24 2019 04:38 AM

बढ़ती जा रही है आमिर की गलतियां, अब होगा बड़ा फैसला

Posted at: Oct 14 , 2017 by Dilersamachar 5333

दिलेर समाचार, सीक्रेट सुपरस्टार के प्रमोशन के लिए आमिर खान इंडिया-ऑस्ट्रेलिया के T20 मैच में पहुंचे थे. हालांकि मैच तो बारिश की वजह से नहीं हो सका. लेकिन आमिर की एक गलती से ये सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, मिस्टर परफेक्शनिस्ट यहां एक बड़ी गलती कर गए. इस वजह से उनकी आलोचना हो रही है. वो बातचीत के दौरान भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज का नाम नहीं बता पाए. आमिर खान और जयरा वसीम की फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार की कहानी महिला केंद्रित है. उनकी पिछली फिल्म दंगल की कहानी तो महिला खिलाड़ियों पर ही आधारित थी.  

आमिर दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार जैसी फिल्मों में महिलाओं को नई राह दिखाते नजर आए हैं. उनकी पहचान सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दे उठाने वाले एक्टर के तौर पर भी है. ऐसे में उनसे हुई ये चूक लोगों के गले नहीं उतर पा रही है. उन्हें टीम इंडिया की कप्तान मिताली राज का नाम तक नहीं पता. जबकि हाल ही में वुमन वर्ल्ड कम में भारतीय टीम की शानदार सफ़र के बाद मिताली का नाम सुर्ख़ियों में रहा. आमिर इससे पहले बॉलीवुड में फीमेल एक्ट्रेसेस की फीस पर सवाल कर फंस चुके थे. उन्होंने महिलाओं की फीस को उनकी फैन फॉलोइंग और योग्यता से जोड़ दिया था.  आमिर खान को क्रिकेट का प्रशंसक भी माना जाता है. उन्होंने क्रिकेट पर आधारित एक फिल्म 'अव्वल नंबर' में काम भी किया है. 

ऐसे भूले नाम

दरअसल, प्री मैच के दौरान आमिर खान और जायरा वसीम से क्रिकेट से जुड़े कुछ सवाल पूछे गए. होस्ट जतिन सप्रू ने महिला क्रिकेट टीम की कप्तान का नाम पूछा. जिसका जवाब मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर को मालूम नहीं था, ना हीं जायरा को. उन्होंने कहा, मुझे पता है लेकिन इस समय मुझे नाम ध्यान नहीं आ रहा है. हालांकि होस्ट ने दोनों को कुछ हिंट भी दिए गए, फिर भी वो नहीं बता पाए कि महिला क्रिकेट टीम की कप्तान कौन हैं? जिसके बाद होस्ट ने मिताली राज का नाम बताया.

एक्ट्रेसेस की फीस कोम लेकर क्या बोले थे आमिर 

हाल ही में एक इंटरव्यू में आमिर ने एक्ट्रेसेस की फीस पर कहा था, "फिल्मों में आपकी फीस इस बात पर निर्भर करती है कि दर्शकों को थिएटर तक लाने में आपका क्या योगदान है. हर टीम में दो या तीन लोग ऐसे होते हैं, जो दर्शकों को थिएटर तक खींच लाते हैं. दूसरे यह काम नहीं कर सकते. इसे ही स्टारडम कहा जाता है. जिस दिन जायरा दर्शकों को खींचने में मुझसे ज्यादा काबिल हो जाएगी, उस दिन उसे बेशक ज्यादा फीस मिलेगी. ये जेंडर के आधार पर तय नहीं होगा."

आमिर ने ये भी कहा कि, मुझे जायरा से कम का चेक नहीं मिलेगा. फिल्मों में पेमेंट के हमारे पास दो स्तर हैं. एक उस काम के लिए जो आप कर रहे हैं और जो मैं कर रहा हूं वह भी किसी दूसरे एक्टर के बराबर है. सबको बराबर पैसा मिलना चाहिए. इसी तरह मुझे लगता है कि टेक्न‍िशियन्स को भी एक्टर्स के बराबर पैसा मिलना चाहिए.

आज का दिन इतिहास के पन्नों में इसलिए खास है, क्योंकि आज ही के दिन संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने अपने 3,80,000 साथियों के साथ हिन्दू धर्म को त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया था. 1950 के दशक में ही बाबा साहेब बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षित हुए और बौद्ध सम्मेलन में भाग लेने श्रीलंका (तब सीलोन) गए. 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में उन्होंने अपने लाखों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया.

इस मौके पर उन्होंने जो 22 प्रतिज्ञाएं लीं उससे हिंदू धर्म और उसकी पूजा पद्धति को उन्होंने पूर्ण रूप से त्याग दिया. डॉक्टर अंबेडकर के साथ लाखों दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया और ये पूरी दुनिया में धर्म परिवर्तन की सबसे बड़ी घटना थी. हालांकि खुद उन्होंने इसे धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि धर्म-जनित शारीरिक, मानसिक व आर्थिक दासता से मुक्ति बताया.

अंबेडकर का जन्म हिन्दू जाति में अछूत और निचली मानी जाने वाली महार जाति में हुआ था. उन्होंने हिन्दू धर्म में व्याप्त छूत प्रथा को खत्म करने के लिए न सिर्फ सामाजिक बल्कि कानूनी रास्ता भी अख्तियार किया. वे मानते थे कि कानून में बदलाव लाकर ही दिल और दिमाग में बदलाव संभव है. उनके बौद्ध धर्म अपनाने के पीछे बौद्ध धर्म में छुआछूत और जाति प्रथा जैसी कुरीति का न होना था.

हिंदू पैदा तो हुआ हूं, लेकिन हिंदू मरूंगा नहीं

अंबेडकर जिस ताकत के साथ दलितों को उनका हक दिलाने के लिए उन्हें एकजुट करने और राजनीतिक-सामाजिक रूप से उन्हें सशक्त बनाने में जुटे थे, उतनी ही ताकत के साथ उनके विरोधी भी उन्हें रोकने के लिए जोर लगा रहे थे. लंबे संघर्ष के बाद जब अंबेडकर को भरोसा हो गया कि वे हिंदू धर्म से जातिप्रथा और छुआ-छूत की कुरीतियां दूर नहीं कर पा रहे तो उन्होंने वो ऐतिहासिक वक्तव्य दिया जिसमें उन्होंने कहा कि मैं हिंदू पैदा तो हुआ हूं, लेकिन हिंदू मरूंगा नहीं.

हिंदू कोड बिल पर विरोध

आजादी के बाद पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में डॉक्टर अंबेडकर कानून मंत्री बने और नेहरू की पहल पर उन्होंने हिंदू कोड बिल तैयार किया, लेकिन इस बिल को लेकर भी उन्हें जबर्दस्त विरोध झेलना पड़ा. खुद नेहरू भी तब अपनी पार्टी के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर बढ़ते दबाव के सामने झुकते नजर आए. इस मुद्दे पर मतभेद इस कदर बढ़े कि अंबेडकर ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि बाद में हिंदू कोड बिल पास हुआ और उससे हिंदू महिलाओं की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव भी आया लेकिन अंबेडकर के बिल से ये कई मामलों में लचीला था.

बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं:-

1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.

2. मैं राम और कृष्ण को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.

3. मैं गौरी, गणपति जैसे हिंदू धर्म के किसी देवी देवता को नहीं मानूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा.

4. ईश्वर ने कभी अवतार लिया है, इस पर मेरा विश्वास नहीं.

5. मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि तथागत बौद्ध विष्णु के अवतार हैं. ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा समझता हूं.

6. मैं कभी श्राद्ध नहीं करूंगा और न ही पिंडदान करवाऊंगा.

7. मैं बौध धम्म के विरुद्ध कभी कोई आचरण नहीं करूंगा.

8. मैं कोई भी क्रिया-कर्म ब्राह्मणों के हाथों से नहीं करवाऊंगा.

9. मैं इस सिद्धांत को मानूंगा कि सभी इंसान एक समान हैं.

10. मैं समानता की स्थापना का यत्न करूंगा.

11. मैं बुद्ध के आष्टांग मार्ग का पूरी तरह पालन करूंगा.

12. मैं बुद्ध के द्वारा बताई हुई दस परिमिताओं का पूरा पालन करूंगा.

13. मैं प्राणी मात्र पर दया रखूंगा और उनका लालन-पालन करूंगा.

14. मैं चोरी नहीं करूंगा.

15. मैं झूठ नहीं बोलूंगा.

16. मैं व्याभिचार नहीं करूंगा.

17. मैं शराब नहीं पीऊंगा.

18. मैं अपने जीवन को बुद्ध धम्म के तीन तत्वों-अथार्त प्रज्ञा, शील और करुणा पर ढालने का यत्न करूंगा.

19. मैं मानव मात्र के विकास के लिए हानिकारक और मनुष्य मात्र को उच्च– नीच मानने वाले अपने पुराने हिंदू धर्म को पूर्णत: त्यागता हूं और बुद्ध धम्म को स्वीकार करता हूं.

20. यह मेरा पूर्ण विश्वास है कि गौतम बुद्ध का धम्म ही सही धम्म है.

21. मैं यह मानता हूं कि अब मेरा नया जन्म हो गया है.

22. मैं यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि आज से मैं बुद्ध धम्म के अनुसार आचरण करूंगा.

क्या हो जब आपको पता चले कि कंगना और करन जौहर एक ही इवेंट में आमने-सामने आए? दोनों के बीच कैसे रिश्ते हैं ये तो जगजाहिर है. हाल ही में दोनों मुकेश अंबानी की पार्टी में नजर आए. लेकिन इसके बाद जो हुआ जो जानना दिलचस्प है.

करन जौहर और कंगना रनौत का जबसे विवाद हुआ है तभी से दोनों एक-दूसरे से कोसों दूर नजर आते हैं. लेकिन मुकेश अंबानी के न्यौते को ठुकराना दोनों के लिए मुमकिन नहीं था. मुंबई मिर की मानें तो अंबानी दोनों एक्टर्स के रिश्तों के बारे में अच्छे से जानते हैं. इसलिए उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि इन दोनों का आमना-सामना ना हो.

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