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चंद्रयान 2 से भारत को मिलने वाला है ये बड़ा फायदा, इन बातों पर होगी नजर

Posted at: Jul 22 , 2019 by Dilersamachar 9479

दिलेर समाचार, नई दिल्ली। पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा, यानी चांद पर भारत अपना दूसरा महत्वाकांक्षी मिशन 'चंद्रयान-2' सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्चर - GSLV Mk III - के ज़रिये प्रक्षेपित करेगा, जो चांद पर पानी की मौजूदगी तलाशने के अलावा भविष्य में यहां मनुष्य के रहने की संभावना भी तलाशेगा. लगभग 978 करोड़ रुपये की लागत वाले 'चंद्रयान-2' को 3,84,400 किलोमीटर (2,40,000 मील) की यात्रा के लिए सोमवार दोपहर 2:43 बजे चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर दूर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा. दरअसल, इसे पिछले सोमवार, यानी 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाना था, लेकिन तकनीकी खामी पकड़ में आने की वजह से इसे अंतिम घड़ियों में, यानी प्रक्षेपण से 56 मिनट 24 सेकंड पहले रोक दिया गया था.

अब ISRO ने घोषणा की है कि रविवार शाम को 6:43 बजे प्रक्षेपण के लिए 20 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी. ISRO के अनुसार, 'चंद्रयान-2' चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां अब तक कोई देश नहीं गया है. ISRO प्रमुख के. सिवन के अनुसार, मिशन के दौरान जल के संकेत तलाशने के अलावा 'शुरुआती सौर मंडल के फॉसिल रिकॉर्ड' भी तलाश किए जाएंगे.

'चंद्रयान-2' के लॉन्च के साथ ही भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन जाएगा, जिन्होंने चंद्रमा पर खोजी यान उतारा. 'चंद्रयान-2' में मौजूद 1.4 टन का लैंडर 'विक्रम' अपने साथ जा रहे 27-किलोग्राम के रोवर 'प्रज्ञान' को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर दो क्रेटरों के बीच ऊंची सतह पर उतारेगा. लैंडिंग के बाद, 'प्रज्ञान' चांद की मिट्टी का रासायनिक विश्लेषण करेगा. वहीं'विक्रम' चंद्रमा की झीलों को मापेगा और अन्य चीजों के अलावा लूनर क्रस्ट में खुदाई भी करेगा. वर्ष 2009 में चंद्रयान-1 के ज़रिये चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की मौजूदगी का पता लगाने के बाद से भारत ने वहां पानी की खोज जारी रखी है, क्योंकि चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी से ही भविष्य में यहां मनुष्य के रहने की संभावना बन सकती है.

ISRO प्रमुख के. सिवन ने बताया, मिशन के दौरान जल के संकेत तलाशने के अलावा 'शुरुआती सौर मंडल के फॉसिल रिकॉर्ड' तलाश किए जाएंगे, जिसके ज़रिये यह जानने में भी मदद मिल सकेगी कि हमारे सौरमंडल, उसके ग्रहों और उनके उपग्रहों का गठन किस प्रकार हुआ था.

इसके अलावा, इस मिशन के बाद भारत कमर्शियल उपग्रहों और ऑरबिटिंग की डील हासिल कर पाएगा, यानी भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर सकेगा, जिसकी मदद से हमें अन्य देशों के उपग्रहों के अंतरिक्ष में भेजने के करार हासिल हो पाएंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मिशन से मिलने वाला जियो-स्ट्रैटेजिक फायदा भले ही ज़्यादा नहीं है, लेकिन भारत का कम खर्च वाला यह मॉडल दूसरे देशों को आकर्षित ज़रूर करेगा.

NASA के मंगल ग्रह पर भेजे गए रोवर मिशन से जुड़े विज्ञानी अमिताभ घोष ने कहा, 'चंद्रयान 2' की कीमत के लिहाज़ से इससे होने वाला फायदा बहुत बड़ा होगा. उन्होंने कहा, "चंद्रयान 2 जैसा जटिल मिशन सारी दुनिया को संदेश देगा कि भारत जटिल तकनीकी मिशनों को कामयाब करने में भी पूरी तरह सक्षम है..." ISRO के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि भारत का लक्ष्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में लीडर के रूप में सामने आना होना चाहिए.

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