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September 22 2021 07:02 PM

दिल्ली में 17 लाख नए घर बनने का रास्ता साफ, उपराज्यपाल ने दी मंजूरी

Posted at: Sep 9 , 2018 by Dilersamachar 9578

दिलेर समाचार, लालफीताशाही के चलते लंबे समय से लटकी लैंड पूलिंग पॉलिसी को शुक्रवार को स्वीकृति मिल ही गई। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की बोर्ड बैठक में उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मंजूरी दे दी। इस पॉलिसी के तहत दिल्ली में 17 लाख नए घर बनने का रास्ता साफ हो गया है। इनमें से पांच लाख घर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के होंगे। हालांकि एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) 400 की जगह 200 ही रखे जाने से 25 हजार सस्ते घर बनाने की योजना अब पूरी नहीं हो पाएगी।

 

जानकारी के मुताबिक इस पॉलिसी में अब 95 गांवों का भी शहरी विस्तार हो सकेगा। लैंड पूलिंग पॉलिसी दिल्ली में सस्ते घरों को उपलब्ध करवाने के लिए बनाई गई है। दावा किया जा रहा है कि इस पॉलिसी के मंजूर होने से दिल्ली मे आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी विकास भी तेजी से होगा। यह दिल्ली के लाखों किसानों को निवेश करने का एक और जरिया देगी।

इस पॉलिसी में जनता की भागीदारी अहम होगी। डीडीए इसमें सिर्फ फेसिलेटर यानी सुविधा प्रदाता और योजनाकार की भूमिका निभाएगा। जबकि पूलिंग और विकास की पूरी प्रक्रिया डिवेलपर या डिवेलपर के समूह को करनी होगी। लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत कोई भी जमीन मालिक हिस्सा ले सकता है हालांकि उसे विकसित करने के लिए कम से कम दो हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।

पॉलिसी के तहत बेहतर योजना और ढांचा मुहैया करवाने के लिए इंटीग्रेटेड सेक्टर बेस्ड प्लानिंग को अपनाया गया है। एक सेक्टर 250 से 300 हेक्टेयर जमीन में फैला होगा। इसमें भी 70 फीसद जमीन एकसाथ होना जरूरी है।

दिल्ली में पानी की स्थिति को देखते हुए इस पॉलिसी में एफएआर को 200 रखा गया है। 200 एफएआर में दोहरी पाइपलाइन से पानी की जरूरतें पूरी हो सकेंगी और पानी की बर्बादी रुकेगी।

200 एफएआर तय होने से दिल्ली को 17 लाख घर मिलेंगे। इनमें 76 लाख लोग रह सकेंगे। जबकि ईडब्ल्यूएस के लिए भी 15 फीसद को मंजूरी दी गई है। इससे घरों की जरूरत को पूरा करना आसान होगा।

हालांकि डीडीए के पूर्व योजना आयुक्त आरजी गुप्ता का कहना है कि पॉलिसी में यदि फ्लैट्स के निर्माण से पूर्व ही स्कूल, लैंडफिल साइट्स, अस्पताल, सड़कों आदि के लिए पहले से जगह चिह्नित हो जाए तो यह पॉलिसी फायदेमंद होगी। वरना इसका हाल भी अन्य पॉलिसी की तरह ही हो जाएगा और यह दिल्ली पर एक और बोझ बढ़ाने का काम करेगी।

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