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August 7 2020 03:26 PM

मास्क से कम हो सकती है कोरोना बढ़ने की दर

Posted at: Jul 5 , 2020 by Dilersamachar 5302

दिलेर समाचार, जर्मनी के कई नगरों में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि जहां मास्क का प्रयोग आवश्यक कर दिया गया, वहां कोरोना के केस बढ़ने की दर में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई। यह डिस्कशन पेपर बोन जर्मनी के आई जैडए इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इक्नामिक्स द्वारा जारी किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार इस संक्रमण का लंबा इन्क्यूबेशन पीरियड होने के कारण भी इसका प्रसार अधिक हो रहा हे। उसके अनुसार संक्रमित होने के चार पांच दिन के पश्चात इसके लक्षण दिखाई देते हैं और इसके बीच में संक्रमित व्यक्ति अन्य कई लोगों को संक्रमण दे देता है।

अध्ययनों से यह भी पता चला है कि जिन लोगों को बहुत हल्का संक्रमण है और कोई भी लक्षण नहीं हैं, वे भी अपने संपर्क मंे आने वाले को संक्रमित कर सकते हैं। इस अध्ययन के अनुसार अधिकतर रोगियों में औसत चार दिन के पश्चात लक्षण सामने आ जाते हैं लेकिन 58 प्रतिशत रोगियों में पूरी बीमारी के दौरान कोई लक्षण नहीं होता। यह बीमारी उसे 21 दिन तक रह सकती है लेकिन औसत 9 दिन में रोगी ठीक हो जाते हैं। 

आई सी एम के एक अध्ययन के अनुसार 22 जनवरी से 30 अप्रैल तक कोरोना पाजिटिव 40.187 रोगियों में से 28 प्रतिशत रोगियों में कोई लक्षण नहीं थे। इसलिए डब्लयू एच ओ ने अपने दिशानिर्देशों में मास्क पहनने का निर्देश दिया है, विशेषकर ऐसे स्थानों पर जहां शारीरिक दूरी बनाए रखना संभव नहीं होता।

कोरोना के लक्षणों में स्वाद और गंध का ह्नास भी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के लक्षणों में खांसी, बुखार, खराब गला और संास लेने में समस्या के साथ दो लक्षण और जोड़े हैं। ये लक्षण हैं सूंघने और स्वाद की क्षमता का कम या समाप्त हो जाना। इसके साथ-साथ मांसपेशियों में दर्द, डायरिया, बलगमी खांसी और थकान को भी इसके लक्षणों में जोड़ा गया है।

बढ़ी आयु के रोगियों में थकान, चुस्ती की कमी, डायरिया, भूख समाप्त होना, बड़बड़ाना और बुखार न होना भी पाए जा सकते हैं। बाल रोगियों में आवश्यक नहीं कि बड़ों की तरह बुखार या खांसी हो ही। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह एक नई बीमारी है और प्राप्त जानकारी के अनुसार नए लक्षण जोड़े जा रहे हैं।

मेडिकल जर्नल लांसेट में प्रंकाशित एक लेख के अनुसार कोरोना पॉजिटिव रोगियों में स्वाद और गंध का कम होना नेगेटिव रोगियों से तीन गुना अधिक था। इसलिए ऐसे लक्षण वाले रोगियों को अपने को आइसोलेट कर लेना चाहिए।

अनिद्रा दूर करते आहार

ब्रिटेन के एक नींद विशेषज्ञ के अनुसार हमारी रात की नींद हमारे द्वारा दिन में खाए गए आहार पर निर्भर करती है। शोध से पता चला है कि नींद के मामले में सबसे अधिक कठिनाई वेगन (शुद्ध शाकाहारी) लोगों को होती है। नींद विशेषज्ञ हॉली हाऊसबी ने पाया है कि कुछ आहार नींद लाने में विशेष रूप से सहायता करते हैं। मोजरेला चीज ऐसा ही खाद्य पदार्थ है जिसमें ट्रिप्टोफैन होता है। यह एक अमीनो एसिड है जो हमारे शरीर में नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटेानिन और सेरोटोनिन बनाने मे महत्त्वपूर्ण भाग लेता है।

कार्बोहाइडेªट खाने से भी हमारे दिमाग को ट्रिप्टोफैन मिलता है, इसलिए रात में चीज टोस्ट खाना नींद लाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। ओट्स लेने से भी उसमंे विद्यमान विटामिन्स और खनिज पदार्थों के कारण दिमाग रिलेक्स होता है और अच्छी नींद आती है। सोया उत्पाद भी ट्रिप्टोफैन के अच्छे óोत हैं। टोफू में प्रोटीन और कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो नींद लाने में सहायक होते हैं। अंडों में विटामिन डी और ट्रिप्टोफैन होते हैं ये भी अनिद्रा को दूर करने में सहायक हैं।

यह भी ध्यान रखें कि आहार तो महत्त्वपूर्ण है, ही इसके अतिरिक्त अनिद्रा से पीडि़त लोगों का आरामदेह बेड की व्यवस्था करनी चाहिए और सोने से पूर्व अल्कोहल नहीं लेना चाहिए। यह आपकी नींद के लिए घातक हो सकता है।

प्रीबायोटिक भी महत्त्वपूर्ण है

प्रोबायोटिक के बारे में तो अधिकतर लोगों ने सुना है कि यह हमारे पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छे बैक्टीरिया देते हैं किंतु प्रोबायोटिक्स के सही काम करने के लिए प्रीबायोटिक्स भी लेना आवश्यक होता है जो प्रोबायोटिक्स के लिए आहार का काम करता है और उन्हें मजबूत बनाता है। यह कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप में पाए जाते हैं जिन्हें नियमित लेना हमारे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। यह मूलतः उन खाद्य पदार्थों में होते हैं जिसमें फाइबर अधिक होता है। प्रोबायोटिक्स या गुड बैक्टीरिया हमारी बड़ी आंत में रहते हैं उनके लिए यह फाइबर वाले खाद्य पदार्थ आहार का कार्य करते हैं।

प्रीबायोटिक्स में सबसे पहला नाम कच्चे प्याज का है। कच्चे प्याज में प्रीबीयोटिक्स एंटीआक्सीडेंटस और फ्लेबनायडस अच्छी मात्रा मंे होते हैं। लहसुन भी प्रीबायोटिक है जो बड़ी आंत में लाभप्रद बिफिडोबैटीरिया के बढ़ने में सहायता करता है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बैक्टीरिया को रोकता भी है।

वीटग्राम एक अच्छा प्रीबायोटिक आहार है। इसे दही में या स्मूदी में डालकर भी खाया जा सकता है। चने भी अच्छे प्रीबायोटिक का कार्य करते हैं उनमें फाइबर की अच्छी मात्रा के अतिरिक्त प्रोटीन, आयरन और बी समूह के विटामिन होते हैं।

सेब में अच्छे प्रीबायोटिक गुण होते हैं जो हमारी आंतों के स्वास्थ्य के मिलए अच्छा है। इनमें अच्छी मात्रा में एंटीआक्सीडेंट और पोलीफिनोल होते हैं और नियमित एक या दो सेब खाने से हमारी पाचन शक्ति मेटाबालिज्म बढ़ते हैं और एलडीएल कोलेस्ट्राल कम होता है।

यदि आपकी स्मरण शक्ति कमजोर है तो

उम्र बड़ी हो या छोटी, बहुत से लोगों की स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है और उन्हें याद रखने में कठिनाई होती है। यूनिवर्सिटी आफ मांट्रियल के एक अध्ययन में चीजों को याद रखने के लिए एक आसान नुस्खा बताया गया है जो याद रखने में सहायता कर सकता है। जो चीज आप याद रखना चाहें उसे ऊंचा बोलें चाहे, यह लगे कि आप अपने से बात कर रहे हैं। आप पाएंगे कि उसके याद रहने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो गई है।

इसके अतिरिक्त यूनिवर्सिटी आफ ब्रिटिश कोलंबिया के अध्ययन के अनुसार 30 मिनट तक सैर करने या कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करने से हमारे दिमाग ंके उस भाग का आकार बढ़ता है जो चीजों को याद रखता है। यदि आपको इतना गतिविधि करना मुश्किल लगे तो इसे 5 मिनट से प्रारंभ कर आधे घंटे तक ले जाएं।

पिछले वर्ष स्विस वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि ग्रीन टी पीने से दिमाग की क्षमता बढ़ती है। इसके अतिरिक्त कम से कम 8 गिलास पानी पीना भी आवश्यक है क्योंकि हमारे दिमाग का 80 प्रतिशत भाग पानी होता है।

हावर्ड स्कूल आफ पब्लिक हैल्थ ने पाया है कि जो लोग अधिक समय तक सामाजिक जीवन व्यतीत करते हैं उनका स्मृति ह्नास बहुत कम होता है। इसलिए नए मित्रा बनाइए और पुराने मित्रों से समय-समय पर मिलते रहिए।

अच्छी स्मरण शक्ति के लिए नींद पूरी होना भी आवश्यक है। कैलीफोर्निया की यूनिवर्सिटी आफ बर्कले के अनुसार यदि आपकी नींद पूरी नहीं हो रही तो आपकी स्मरण शक्ति 40 प्रतिशत तक गिर सकती है इसलिए नींद पूरी होना आवश्यक है। 

ये भी पढ़े: गुणकारी है नींबू


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