Logo
April 17 2024 05:38 AM

रक्षामंत्री सीतारमण ने कहा, सैनिकों में कटौती का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

Posted at: Sep 19 , 2018 by Dilersamachar 9578

दिलेर समाचार, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सेना का आकार घटाने का कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। हालांकि, सरकार द्वारा नियुक्त लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीबी शेकतकर समिति ने सेना को छोटा और शक्तिशाली बनाने की सिफारिश की थी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत इस सिफारिश पर अपने शीर्ष कमांडरों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। मालूम हो कि पिछले दिनों ऐसे संकेत मिले थे कि अगले पांच वर्षों में सेना में एक साल सैनिकों की कटौती की जा सकती है। वर्तमान में सेना में करीब 13 लाख सैन्यकर्मी कार्यरत हैं।

राफेल सौदे की जेपीसी से जांच नहीं

राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर जारी सियासी जंग में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग खारिज कर दी है। महंगे दाम पर राफेल विमान खरीदने के पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के आरोपों को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री ने संप्रग की तुलना में नौ फीसद कम कीमत पर विमान खरीदने की बात कही।

वुमैन प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा के दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमने कीमतों को लेकर कई बार स्थिति स्पष्ट की है। बेसिक कीमत में मुद्रास्फीति के पहलुओं को शामिल करते हुए हमने संप्रग के मुकाबले नौ फीसद कम कीमत पर विमान खरीदा है। जेपीसी से इसकी जांच की मांग ठुकराते हुए निर्मला ने कहा कि संसद में इस पर काफी बहस हो चुकी है फिर जेपीसी की जरूरत ही क्या है।

राजग सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने के कांग्रेस के आरोप पर निर्मला ने कहा कि वायुसेना के पास आदर्श तौर पर 42 स्क्वाड्रन होनी चाहिए मगर संप्रग सरकार के दौरान यह संख्या घटकर 33 पर आ गई थी। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल दागते हुए कहा कि जब उसकी सरकार थी तो इस कमी को दूर करने के लिए उसने क्या किया? संप्रग सरकार के दौरान 18 विमान पूरी तरह बने हुए और बाकी 108 को भारत में निर्माण के जरिये हासिल करने की बात थी, लेकिन तब संप्रग ने यह समझौता नहीं किया।

सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को बाहर करने के कांग्रेस के आरोप पर रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसाल्ट और एचएएल के बीच भारत में ही लड़ाकू विमान बनाने का कभी कोई समझौता नहीं हुआ क्योंकि उत्पादन की शर्तों पर सहमति नहीं बनी थी। इसलिए यह कैसे कहा जा रहा है कि राजग सरकार ने राफेल सौदे का ऑफसेट ठेका एचएएल को नहीं दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एकतरफा राफेल सौदा करने के आरोपों को भी निर्मला ने निर्मूल साबित करने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि पीएम ने तो केवल सौदे की प्रक्रिया शुरु की थी। फिर डेढ़ साल की मशक्कत के बाद वायुसेना के तकनीकी विशेषज्ञों ने सौदे को अंतिम रूप दिया। कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की मंजूरी लिए बिना ही पीएम के राफेल सौदे के एलान के आरोपों पर रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2015 के फ्रांस दौरे में केवल सहमति के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।

रूस से एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली खरीदे जाने के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि इस बारे में रूसी कंपनी से बातचीत पूरी हो चुकी है। राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के भारत दौरे में इस पर दस्तखत होंगे या नहीं, इस बारे में वह अभी कुछ नहीं कह सकतीं।

ये भी पढ़े: 19 लाख किया खर्च फिर भी ढाई लाख के लिए रोका बच्ची का शव

Related Articles

Popular Posts

Photo Gallery

Images for fb1
fb1

STAY CONNECTED