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May 19 2024 10:31 AM

केजरीवाल की दलील से नाराज हुआ दिल्ली हाईकोर्ट, कहा- कानून 100 साल से ज्यादा पुराना, आपको फंसाने के लिए नहीं बना

Posted at: Apr 10 , 2024 by Dilersamachar 9592

दिलेर समाचार, नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में एक सरकारी गवाह के बारे में किए गए दावे को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अप्रसन्नता जताई. हाईकोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया पर ‘आक्षेप लगाने’ जैसा है. अदालत ने कहा कि सरकारी गवाहों से संबंधित कानून 100 साल से अधिक पुराना है और इसे आम आदमी पार्टी के नेता को फंसाने के लिए नहीं बनाया गया है.

सीएम केजरीवाल ने दावा किया था कि धनशोधन मामले में उनके खिलाफ सरकारी गवाह बने एक व्यक्ति ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चंदा दिया था. हाईकोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि उसका इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि किसने किसके लिए चुनावी बॉन्ड खरीदे और कोर्ट अपने समक्ष मामले में केवल कानून के प्रावधानों को लागू करने को लेकर जिम्मेदार है.

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की गिरफ्तारी और उसके बाद उन्हें प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेजे जाने के खिलाफ दायर आप के राष्ट्रीय संयोजक की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि माफी देने के तरीके या सरकारी गवाहों के बयान दर्ज करने के तरीके पर आक्षेप लगाना न्यायिक प्रक्रिया पर आक्षेप लगाने के समान है. केजरीवाल ने याचिका में कई आधारों पर अपनी रिहाई का आग्रह किया था. इनमें यह भी शामिल है कि सरकारी गवाहों- राघव मगुंटा और सरत रेड्डी के विलंबित बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनमें से एक ने चुनावी बॉन्ड के जरिए सत्तारूढ़ पार्टी को चंदा भी दिया था.

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