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August 5 2021 09:11 AM

बच्चों के समग्र विकास वाली शिक्षा हो रहा है विकास।

Posted at: Aug 25 , 2017 by Dilersamachar 9366

दिलेर समाचार, स्कूलों में विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तो दिया जाता है, पर इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता कि उन्हें इस तरह का प्रशिक्षण भी दिया जाए कि वे इस अर्जित ज्ञान को जीवन में कहां और कैसे इस्तेमाल करें।स्कूलों में विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तो दिया जाता है, पर इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता कि उन्हें इस तरह का प्रशिक्षण भी दिया जाए कि वे इस अर्जित ज्ञान को जीवन में कहां और कैसे इस्तेमाल करें। स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई में भी वही मानसिकता विकसित होती है और जब जीविकोपार्जन का समय आता है तो वही बच्चे अपने हिसाब से उस ज्ञान का इस्तेमाल करते हैं। कोई सही तो कोई गलत रास्ते से इसी विद्या के सहारे अपनी जीविका कमाता है। यह बात डीएवी सीएमसी, नई दिल्ली की निदेशक (शैक्षिक) डॉ. निशा पेशिन ने जनसत्ता से विशेष बातचीत में कही। वे यहां दो दिवसीय हंसराज पार्लियामेंटेरियन डिबेट का उद्घाटन करने आर्इं थीं।डॉ. निशा का मानना है कि हर बच्चे को उसकी मानसिक और शारीरिक योग्यता के आधार पर आंकना चाहिए। डिटेंशन और नो-डिटेंशन मुद्दे पर विवाद की बजाय शिक्षाविदों को ऐसी शिक्षा नीति पर जोर देना चाहिए जिसमें हर बच्चे के विकास और उन्नति की गुंजाइश हो। प्राथमिक कक्षाओं से ही बुनियाद मजबूत होनी चाहिए। अगर ऐसा हो तो वह किसी भी परीक्षा में फेल नहीं होगा। ऐसे में अयोग्य बच्चे को जबरन पास करने या न करने का विवाद ही बेवजह है। हर बच्चे में अलग विशेषता होती है।उन्होंने कहा कि शिक्षाविदों को कोई भी नीति बनाते समय ऐसा हल तलाशना चाहिए जिनसे हमारी शिक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत हो जाए कि बच्चे को पास या फेल करने की जरूरत न पड़े। हर बच्चे को उसकी रुचि के हिसाब से शिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वह जीवन की हर परीक्षा में अव्वल रहे। डॉ. निशा के मुताबिक शिक्षा नीति पर होने वाली चर्चाओं, बहस-मुबाहिसों में राजनीतिक दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए और न ही इसे राजनीतिक विवाद बनाने की इजाजत दी जानी चाहिए। एनसीआरटी की किताबें जरूरी करने के मसले पर उन्होंने कहा-‘मेरा मानना है कि एनसीआरटी की ओर से उठाया गया मुद्दा एकदम सही है। इसमें कोई शक नहीं है कि कई स्कूलों में निजी प्रकाशक इसका व्यावसायिक फायदा लेते हुए ऐसी पुस्तकें पढ़वा देते हैं जिनमें हल्की पाठ्य सामग्री ही होती है।’

ये भी पढ़े: वर्ल्ड चैंपियनशिप क्वार्टरफाइनल में किया प्रवेश


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