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August 24 2019 04:17 AM

बहकावे में मत आओ

Posted at: May 13 , 2019 by Dilersamachar 7477

आलोक बृजनाथ

मैंने पहले भी कई बार कहा है, आज एक बार फिर कहता हूं कि तथाकथित राष्ट्रवादी बेहद जल्दबाज, अदूरदर्शी और भोली कौम है। कांग्रेस के इशारे पर वामाचार्य जैसे ही घास-फूस इकट्ठा करते हैं, ये फौरन हाथ तापने लगते हैं। आग सुलगने का इंतजार तो छोडि़ए, चिंगारी तक का सब्र नहीं।

जरा सोचिए, साध्वी प्रज्ञा का नामांकन योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्राी बनाने जैसा ही बड़ा कदम है, इसलिए ‘मोदी हेटर्स क्लब‘ के पांव तले की जमीन भूकंप की तरह हिल उठी है। वास्तव में करकरे कोई मुद्दा ही नहीं है। इसे मुद्दा कौन बना रहा है?

वे कहते हैं, भारतीय सेना बलात्कारी है। जो कहते हैं, सुरक्षा बलों में लोग मरने के लिए ही जाते हैं, उन्हें तनख्वाह ही इसी बात की मिलती है। आदि-आदि।

सोचिए, कोई मुठभेड़ में शहीद होकर पदक पा गया, तो क्या भगवान हो गया। उसके क्रिया कलाप की सभी फाइलें अब हमेशा के लिए बंद हो गईं। उसके पिछले किसी रिकार्ड पर अब बात ही नहीं हो सकती।

साध्वी प्रज्ञा ने जो कहा, वह सुनी-सुनाई बात नहीं है, आपबीती है और यह सब उन्होंने पहली बार अब कहा होता तो माना जा सकता था कि यह चुनावी लाभ के लिए गढ़ा गया है। यह सब उन्होंने अदालत में भी कहा है, अपने ढेरों इंटरव्यूज में भी कहा है जो यूट्यूब पर मौजूद हैं और प्रिंट मीडिया में भी यदा-कदा छपे हैं। अगर उनके साथ गलत हुआ है तो यह करने वाला उससे सर्वथा मुक्त कैसे हो सकता है, भले उसकी वर्तमान स्थिति कुछ भी क्यों नहीं हो।

मैं मानता हूं कि साध्वी ने क्षमा मांग कर सौजन्य का परिचय दिया है, अन्यथा इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी। किसी और दल का प्रत्याशी होता तो माफी मांगने के बजाय अदालती दस्तावेज और जारी कर देता।

असल बात दो हैं -

1. क्या एक महिला और उस पर साध्वी के साथ किया गया पापाचार स्वीकार्य है? जिसके नेतृत्व में यह सब शुरू हुआ, उसका मुखौटा उतारना आपत्तिजनक कैसे है?

2. क्या 26/11 की हत्याएं संघ की साजिश थीं? उस समय इसे संघ की साजिश सिद्ध करने वाली किताब ‘आरएसएस की साजिश-26/11‘ लिखने वाला अजीज बर्नी कहां है? उसे कोई सजा मिली? इस किताब के लोकार्पण में दांत निपोरने वाले दिग्विजय सिंह को कुछ भुगतना पड़ा? नहीं, कुछ नहीं।

बस, यही पेंच है। ये सब संभाव्य दंड की आहट से घबराए हुए हैं। इन्हें पता है कि साजिशें अब उजागर होकर उलटे प्रहार कर रही हैं। साध्वी की विजय ही इन्हें गर्त में धकेलेगी। 

ये भी पढ़े: अपने समर्थकों से मिलने के लिए प्रियंका गांधी ने तोड़ा सुरक्षा घेरा


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