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चुनाव के परिणामों ने पलटा पासा.. 2019 में यूपी, बिहार और महाराष्ट्र से मोदी को मिल सकती है मात?

Posted at: Jun 1 , 2018 by Dilersamachar 9592

दिलेर समाचार- लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव में नरेंद्र मोदी को बड़ा झटका लगा है. 10 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में सिर्फ 1सीट मिली और 4 लोकसभा सीट में बीजेपी सिर्फ 2 सीटें ही बचा पाई. 2019 से पहले मोदी वर्सेज ऑल में पीएम को मात मिली. गृह मंत्री राजनाथ सिंह 2019 लोकसभा चुनाव को लंबी छलांग बता रहे हैं और आज उपचुनाव में मिली हार को सिर्फ पीछे जाना बता रहे हैं लेकिन इस लंबी छलांग और पीछे हटने का फासला बढ़ता जा रहा है.


 

कर्नाटक के बाद कैराना में हार
कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बीजेपी सरकार नहीं बना पाई क्योंकि विपक्ष एक हो गया था, उत्तर प्रदेश के कैराना में भी यही हुआ. अखिलेश-मायावती और कांग्रेस ने मिलकर अजित सिंह की लोकदल के प्रत्याशी का समर्थन कर दिया और बीजेपी को अपनी सीट गंवानी पड़ी.


 

यूपी में विरोधियों के एकजुट होने का ये प्रयोग पहली बार नहीं हुआ है. गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में भी बीजेपी को शिकस्त इसीलिए मिली थी क्योंकि सारे अखिलेश के प्रत्याशी को मायवती ने समर्थन दे दिया था. यहां भी आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का सीधा समर्थन था और बीएसपी ने भी विरोध नहीं किया था.


 

अगर यही फॉर्मूला 2019 में रहता है तो मोदी की डगर मुश्किल हो सकती है. 2014 लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 में से 73 सीटें एनडीए के खाते में गई थीं. अब 2017 विधानसभा चुनाव में मिले वोट को आधार मानें तो अगर एसपी-बीएसपी और कांग्रेस साथ लड़ेंगे तो 80 में से 61 सीटों पर गठबंधन की जीत होगी और एनडीए सिर्फ 19 सीटों पर सिमट सकता है.


 

बिहार में साथ आकर भी नहीं बनी बात
13 साल से अररिया की जोकीहाट सीट जेडीयू के पास थी लेकिन इस बार जेडीयू को उतने भी वोट नहीं मिले जितना हार का फर्क रहा. अररिया की जोकीहाट सीट पर आरजेडी प्रत्याशी को 81 हजार 240 वोट मिले जबकि एनडीए प्रत्याशी को 40 हजार 16 वोट मिले. जीत का अंतर रहा 41 हजार 224रहा.


 

अब मोदी के लिए बिहार में डगर मुश्किल हो सकती है. पिछले साल जुलाई में नीतीश ने लालू को छोड़कर नरेंद्र मोदी का दामन थामा था. लेकिन अभी साल भी नहीं बीता और नीतीश ने मोदी सरकार के सबसे बड़े फैसले नोटबंदी की भी निंदा कर दी और विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए दबाव बनाने लगे. अगर नीतीश-लालू के 2019 में साथ आने का फॉर्मूला दोबारा बन जाता है तो मोदी के लिए यहां भी मुश्किल हो जाएगी.


 

2014 चुनाव में नीतीश और मोदी अलग चुनाव लड़े थे तो एनडीए को 31 और जेडीयू को 2 सीटें और यूपीए को 7 सीटें मिली थीं. लेकिन 2015विधानसभा में मिले वोट को आधार मानें तब अगर 2019 में जेडीयू-कांग्रेस-आरजेडी साथ चुनाव लड़ते हैं तो एनडीए सिर्फ 5 सीटों पर सिमट सकता है और जेडीयू-कांग्रेस-आरजेडी 35 सीटें जीत सकती है. फिलहाल तो आरजेडी ने दरवाजे बंद कर रखे हैं. 


 

महाराष्ट्र में कहीं खुशी, कहीं गम
मोदी के लिए महाराष्ट्र से भी ज्यादा राहत की खबर नहीं आई. बीजेपी ने पालघर सीट बचा ली लेकिन भंडारा-गोंदिया सीट बीजेपी के हाथ से निकल गई. दोनों सीटों पर बीजेपी की नाराज सहयोगी शिवसेना मुकाबला कर रही थी.


 


 

पालघर सीट बीजेपी के पास थी लेकिन बीजेपी सांसद चिंतामणि वनगा के निधन के बाद उपचुनाव हुआ तो चिंतामणि के बेटे शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़े. शिवसेना पालघर सीट हार गई. शिवसेना ने 2019 लोकसभा चुनाव अलग लड़ने का एलान कर ही रखा था. हारने के बाद उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि अब बीजेपी को दोस्त की जरूरत नहीं है.


 

शिवसेना प्रमुख कह रहे हैं कि बीजेपी को अब दोस्त की जरूरत नहीं है महाराष्ट्र में भी मोदी का शिवसेना से मुकाबला होगा. इससे मोदी की डगर मुश्किल हो सकती है. 2014 लोकसभा चुनाव में एनडीए को 42, कांग्रेस को 2 और एनसीपी को 4 सीटें मिली थी. अब 2014 विधानसभा चुनाव में मिले वोट को आधार मानें तो अगर चारों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं तब तो बीजेपी 32 सीट जीत सकती है लेकिन अगर शिवसेना+कांग्रेस+एनसीपी ने साथ चुनाव लड़ा तो बीजेपी 4 सीटों पर सिमट सकती है और गठबंधन को 44 सीटें मिल जाएंगी.


 

उपचुनाव परिणाम के बाद 2019 के लिए बड़ी बात ऐसे समझिए
उपचुनाव में मोदी वर्सेस ऑल में ऑल की जीत हुई
यूपी में विरोधी साथ लड़े तो 2019 में पीएम मोदी को नुकसान
महाराष्ट्र में बीजेपी को नुकसान नहीं पर शिवसेना को साथ रहने का संदेश
महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए संदेश एनसीपी के साथ रहने में ही फायदा
बिहार में पार्टी की हार जीत नहीं हुई बल्कि परिवार की जीत हुई
बिहार में तस्लीमुद्दीन के बड़े बेटे पहले विधायक थे अब छोटा बेटे भी विधायक बने
राहुल के लिए अकेले 2019 दूर लेकिन सबके साथ से उनका भला होगा

ये भी पढ़े: कैराना में बीजेपी को मात.. न सहानुभूति वोट मिला न अपने वोटरों का साथ

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