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फिर होंगे इजराइल में चुनाव, प्रधानमंत्री नेतन्याहू गठबंधन सरकार बनाने में हुए असफल

Posted at: May 31 , 2019 by Dilersamachar 10569
दिलेर समाचार,  इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बुधवार रात से पहले गठबंधन सरकार बनाने में नाकाम रहने के बाद इजराइली सांसदों ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए बृहस्पतिवार को संसद भंग करने के पक्ष में मतदान कर दिया जिससे नेतन्याहू इजराइली इतिहास में पहले नामित प्रधानमंत्री बन गए हैं, जो सरकार बनाने में असफल रहे। देश में अब 17 सितंबर को फिर से आम चुनाव कराए जाएंगे।

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इजराइली सांसद करीब छह सप्ताह पहले ही निर्वाचित हुए थे। उन्होंने 21वीं नेसेट (इजराइली संसद) को भंग करने और इसी कैलेंडर वर्ष में दूसरी बार आम चुनाव कराने के पक्ष में 45 के मुकाबले 74 मतों से प्रस्ताव पारित किया। नेतन्याहू ने नौ अप्रैल को हुए चुनाव में रिकॉर्ड पांचवीं बार उल्लेखनीय जीत हासिल की थी। उनकी यह जीत अस्थायी साबित हुई क्योंकि वह चरम पुरातनपंथी यहूदी शिक्षण संस्थानों के छात्रों को सेना में अनिवार्य भर्ती से छूट देने संबंधी एक सैन्य विधेयक को लेकर गतिरोध को तोड़ने में नाकाम रहे।

उनके और इजराइल के पूर्व रक्षा मंत्री अविग्दोर लिबरमैन के बीच विधेयक को लेकर मतभेद के कारण गठबंधन नहीं हो सका। राष्ट्रवादी दल'यिजराइल बेतेन्यू पार्टी से संबंध रखने वाले लिबरमैन ने अति-धर्मनिष्ठ यहूदी दलों के साथ आने के लिए यह शर्त रखी थी कि उन्हें अनिवार्य सैन्य सेवा में छूट देने के अपने मसौदे में परिवर्तन करने होंगे।

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मतदान से पहले लिबरमैन ने कहा कि इजराइल में इसलिए चुनाव कराने होंगे क्योंकि सत्तारूढ पार्टी लिकुड ने अति धर्मनिष्ठ यहूदी दलों के आगे पूर्ण आत्मसमर्पण कर दिया। 'यिजराइल बेतेन्यू के बिना नेतन्याहू 120 सदस्यीय सदन में केवल 60 सांसदों का समर्थन ही हासिल कर सके और केवल एक मत से बहुमत साबित करने से चूक गए।

संसद भंग करने के फैसले के बाद नेतन्याहू ने कहा, ''अविग्दोर लिबरमैन अब वाम का हिस्सा हैं। उन्होंने दक्षिणपंथी सरकार को गिरा दिया। उन पर दोबारा भरोसा नहीं करें। इसके बारे में मैं आपको कल जानकारी दूंगा। संभव है कि मैं आपको ऐसी बात बताऊं जो आपको पता ही न हो। नेतन्याहू ने कहा, ''इजराइल में जनता ने स्पष्ट फैसला दिया। यह फैसला हुआ कि लिकुड दक्षिणपंथी सरकार का प्रतिनिधित्व करेगी, मैं प्रधानमंत्री बनूंगा ।

कई राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच अहम की लड़ाई के कारण राजनीतिक संकट हुआ और इसका कोई वैचारिक आधार नहीं है। राजनीति में नेतन्याहू और लिबरमैन का जुड़ाव 31 साल पहले हुआ जब लिबरमैन ने उनके उपविदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान मदद की थी ।

नेतन्याहू की सत्तारुढ़ लिकुद पार्टी के नेसेट को भंग करने के कदम से यह सुनिश्चित हो गया कि राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन नयी सरकार गठित करने के लिए किसी अन्य सांसद को आमंत्रित नहीं कर पाएंगे।

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