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September 25 2021 02:59 AM

फेसबुक की लोकप्रियता

Posted at: Jul 21 , 2019 by Dilersamachar 10229

दयानंद पांडेय

क्या फेसबुक की लोकप्रियता भुनाते हुए इस का इस्तेमाल देश को गृह युद्ध के मुहाने पर बैठाने की कुछ लोग कोशिश नहीं कर रहे ? मेरा मानना है कि हां। एन जी ओ बनाना, विदेशी फंडिंग बटोरना और फिर सामाजिक विषमता का झंडा ले कर सेक्यूलरिज्म शब्द का दुरूपयोग करते हुए उस के कंधे पर बैठ कर, मनुवाद, ब्राह्मण आदि का नाम लेते हुए दलित और पिछड़े होने की जातीय अस्मिता के नाम पर जहर उगलना, आग मूतना, अल्सेशियन बन कर लगातार भौंकना कहां तक गुड है ? यह देश को गृह युद्ध की तरफ धकेलने की विदेशी चंदे के दम पर एक क्रूर साजिश है। इस बात को समझना बहुत जरुरी है। फेसबुक पर बहुत सारे लोग भी इसी जाल में आप को लपेट कर एक्सपर्ट बने हुए हैं।

अपनी आई डी से भी, पचास ठो फर्जी आई डी बना कर भी। चाहें तो आप चेक कर लें कि जो कुछ लोग इस काम पर लगे हुए हैं उन की पोस्ट पर टिप्पणियां करने वाले भी कौन लोग हैं ? अनाम पहचान वाले लोग उन्हीं की भाषा और तेवर में बोलते हुए पचासियों लोग कौन लोग हैं ? बास ने छींका नहीं कि मिजाज पुर्सी में तुरंत पांच, दस मिनट में सैंकड़ों लाइक, धकाधक पचासियांे कमेंट आखिर कैसे आ जाते हैं ? फिर सैंकड़ांे, हजारों पर आते देर नहीं लगती और अगर गलती से कोई एक व्यक्ति भी घुस गया उस जमात में अपना निर्दोष प्रतिवाद जताने, विरोध जताने तो कुत्तों की तरह काटने के लिए यही अनाम पहचान वाले लोग कुतर्क लिए, लगभग गालियां देते हुए, अबे-तबे करते हुए टूट पड़ते हैं जैसे किसी गली के कुत्ते किसी अनजान व्यक्ति पर टूट पड़ते हैं। अंततः कटहे कुत्तों की इस खौफनाक गली में झांकना भी लोग बंद कर देते हैं। यही यह लोग चाहते भी हैं। इन के जनमत संग्रह का कारोबार बढ़ता जाता है। देश को गृह युद्ध की तरफ धकेलने का कारोबार दिन दूना, रात चौगुना बढ़ने लगता है।

वैसे ही जैसे कश्मीर में अलगाववादियों की ढिठाई और जनमत संग्रह की बात होती है, पाकिस्तान के समर्थन में और इस तरह इन के एन जी ओ की बल्ले-बल्ले होने लगती है। इन की फंडिंग बढ़ती जाती है। ये लोग इसी बिना पर दूसरी पोस्टों पर भी यह जहर उगलना, आग मूतना पूरी बेशर्मी से बेधड़क जारी रखते हैं, कुतर्क की चाशनी लगा कर। अच्छा यह बताइए कि आप मित्रा लोग भी पोस्ट लिखते हैं पर कुछ सेलिब्रेटी को छोड़ कर कितने ऐसे मित्रा हैं जिन की पोस्ट पर दस पांच मिनट में सैंकड़ांे लाइक और कमेंट ऐसे गिर जाते हैं जैसे बरसात में शाम को लाइट जलते ही उस पर बेशुमार पतंगे गिर-गिर पड़ते हैं। यह सब विदेशी फंडिंग से चलने वाले एन जी ओ का कमाल है, देश को गृह युद्ध की ओर धकेलने की कोशिश है, कुछ और नहीं। इन से सतर्क रहना, इन को नंगा करना और इन की साजिश को नाकाम करना हम सभी का दायित्व है। 

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