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काम में तरक्की और बरकत के लिए की जाती है इस भगवान की पूजा, जानिए इनके बारे में सबकुछ

Posted at: Sep 16 , 2018 by Dilersamachar 9629

दिलेर समाचार, नई दिल्ली: Vishwakarma Jayanti 2018: भारत में लगभग सभी त्योहार और पूजा पाठ घरों में सुख-शांति के लिए की जाती है. लेकिन हर साल 17 सितंबर को की जाने वाली विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja) एकलौता ऐसी पूजा है जो काम में बरकत के लिए की जाती है. भगवान विश्वaकर्मा की पूजा मशीनों की पूजा करके की जाती है. इस दिन किसी भी तरह की मशीन हो जैसे औजार, गाड़ी, कम्प्यूटर या कोई भी चीज़ जो आपके काम को पूरा करने में इस्तेमाल होती है, पूजी जाती है. इसीलिए आपने देखा होगा कि विश्वकर्मा के दिन लोग अपनी गाड़ियों और ऑफिस की मशीनों पर गेंदे के फूलों की माला चढ़ाते हैं, तिलक लगाते हैं. यहां जानिए कि आखिर ये भगवान विश्वफकर्मा हैं कौन और क्यों 17 सितंबर के दिन Vishwakarma Jayanti मनाई जाती है. 


कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
भगवान विश्वाकर्मा को निर्माण का देवता माना जाता है. मान्ययता है कि उन्हों ने देवताओं के लिए अनेकों भव्या महलों, आलीशान भवनों, हथियारों और सिंघासनों का निर्माण किया. मान्य ता है कि एक बार असुरों से परेशान देवताओं की गुहार पर विश्‍वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों देवताओं के राजा इंद्र के लिए वज्र बनाया. यह वज्र इतना प्रभावशाली था कि असुरों का सर्वनाश हो गया. यही वजह है कि सभी देवताओं में भगवान विश्व कर्मा का विशेष स्थाथन है. विश्व कर्मा ने एक से बढ़कर एक भवन बनाए. मान्याता है कि उन्होंेने रावण की लंका, कृष्ण  नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थभ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया. माना जाता है कि उन्हों ने उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ सहित, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण अपने हाथों से किया था. इसके अलावा उन्हों ने कई बेजोड़ हथियार बनाए जिनमें भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णुा का सुदर्शन चक्र और यमराज का कालदंड शामिल हैं. यही नहीं उन्हों्ने दानवीर कर्ण के कुंडल और पुष्प‍क विमान भी बनाया. माना जाता है कि रावण के अंत के बाद राम, लक्ष्मंण सीता और अन्यु साथी इसी पुष्पबक विमान पर बैठकर अयोध्याा लौटे थे.

कैसे मनाई जाती है विश्वपकर्मा जयंती?
विश्वमकर्मा दिवस घरों के अलावा दफ्तरों और कारखानों में विशेष रूप से मनाया जाता है. जो लोग इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चार, चित्रकारी, वेल्डिंग और मशीनों के काम से जुड़े हुए वे खास तौर से इस दिन को बड़े उत्सा ह के साथ मनाते हैं. इस दिन मशीनों, दफ्तरों और कारखानों की सफाई की जाती है. साथ ही विश्वककर्मा की मूर्तियों को सजाया जाता है. घरों में लोग अपनी गाड़‍ियों, कंम्यूउन  टर, लैपटॉप व अन्यत मशीनों की पूजा करते हैं. मंदिर में विश्वतकर्मा भगवान की मूर्ति या फोटो की विधिवत पूजा करने के बाद आरती की जाती है. अंत में प्रसाद वितरण किया जाता है. 

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