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क्या शुरू हो गई है निर्भया गैंगरेप के अपराधियों को फांसी देने की त्यारी?

Posted at: Dec 10 , 2019 by Dilersamachar 9639

दिलेर समाचार, नई दिल्ली: निर्भया केस के दोषी पवन को मंडोली जेल से तिहाड़ की जेल नम्बर 2 में शिफ्ट किया गया है. इसी जेल नम्बर 2 में दोषी अक्षय और मुकेश भी बंद हैं, जबकि तिहाड़ की जेल नम्बर 4 में विनय शर्मा बन्द है. सभी को अलग-अलग सेल में रखा गया है और सीसीटीवी कैमरों से मॉनिटरिंग की जा रही है. जेल नम्बर 3 में फांसी की तैयारियां हो रही है, फांसी वाली जगह की साफ सफाई और डमी ट्रायल भी कराया गया. जेल नम्बर 3 में ही फांसी लगाने का चबूतरा और तख्ता है.

फांसी के लिए खास तरह की रस्सियों का इन्तजाम किया जा रहा है, जो बक्सर जेल से मंगाई जा रहीं हैं. इन रस्सियों में मोम लगा होता है और कई घण्टों तक नमी में रखकर इन्हें तैयार किया जाता है. दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई है, जो वहां लंबित है. दया याचिका खारिज होते ही ये पहले गृह मंत्रालय फिर दिल्ली सरकार फिर तिहाड़ जेल के पास जाएगी.

तिहाड़ जेल फिर कोर्ट को बताएगा कि दया याचिका खारिज हो चुकी है. ट्रायल कोर्ट उसके बाद डेथ वारंट जारी करेगा. 2014 में शत्रुघन चौहान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को लेकर कुछ गाइडलाइन्स दी थीं. डेथ वारंट जारी होने के 14 दिन के अंदर फांसी देनी होगी. डेथ वारंट की कॉपी सभी दोषियों को देनी होगी. सभी दोषियों के घरवालों को बताना होगा. डेथ वारंट जारी होते ही सभी दोषियों को कंडम सेल में रख दिया जाएगा.

इस सेल में दोषी बाकी कैदियों से बिल्कुल अलग हो जाते हैं और उनकी खास निगरानी की जाती है. हालांकि कानूनी जानकारों की मानें तो विनय को छोड़कर बाकी दोषी डेथ वारंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. ये दलील दे सकते हैं कि उन्होंने अभी दया याचिका नहीं लगाई है, लेकिन तिहाड़ जेल कहेगा कि सभी को दया याचिका लगाने के के लिए 7 दिन का समय दिया गया था. वो टाइम निकल चुका है इसलिए इनकी याचिका का कोई मतलब नहीं है, लेकिन डेथ वारंट जारी होने के बाद भी दोषियों के पास लीगल ऑप्शन हैं. इसलिए फांसी अंतिम सुनवाई तक टल भी सकती हैं.

बताते चले कि 2015 में सुप्रीम कोर्ट का शबनम केस में जजमेंट आया था कि दोषियों को फांसी तभी दी जा सकती जब को सारे कानूनी उपाय पूरे कर लें. हालांकि बाकी तीनों की क्यूरेटिव भी बाकी है. डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट याचिका में देरी को अमूमन माफ कर देता है.

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