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May 29 2020 09:42 AM

वास्तु के अनुसार पूजा घर

Posted at: May 23 , 2020 by Dilersamachar 5240

दिलेर समाचार, ललित शर्मा।  सबसे पहले दिशाओ के बारे में जान लेते हैं। सभी लोगो को दिशाओ का पूर्ण ज्ञान नहीं होता और बहुत से लोग दिशाओं के विषय में अक्सर भ्रमित रहते हैं, बहुत लोगों को यह ज्ञात होता हैं सूर्योदय जिस दिशा से होता हैं, वह पूर्व दिशा कहलाती हैं, इस समझना इस तरीके से बिलकुल आसान हैं क्योंकि सूर्यदेव पूर्व से दिशा से उदित होते हैं और पश्चिम दिशा में अस्त होते हैं, इस गणना से दो दिशाए तो हमें आसानी से प्राप्त हो जाती हैं, वास्तव में कुल 8 दिशाएं होती हैं।

चार मुख्य दिशाए और चार कोणीय दिशाए होती हैं। 4 मुख्य दिशाए हैं

 पूर्व अंग्रेजी नाम (East)

 उत्तर अंग्रेजी नाम (North)

 पश्चिम अंग्रेजी नाम (West)

 दक्षिण अंग्रेजी नाम (South)

4 कोणीय दिशाए हैं

 उत्तर पूर्व (ईशान कोण) अंग्रेजी नाम (North East)

 दक्षिण पूर्व (आग्नेय कोण) अंग्रेजी नाम (South East)

 दक्षिण पश्चिम (नैऋत्य कोण) अंग्रेजी नाम (South West)

 उत्तर पश्चिम (वायव्य कोण) अंग्रेजी नाम (North West)

आईये एक चित्र के माध्यम से इसे समझने का प्रयास करे ।

इनके अलावा 2 दिशाएं और भी होती हैं आकाश और पाताल जिनका उपयोग वास्तु में नहीं होता।

नोट: दिशाओ का पता आसानी से लगाने के लिए आप कंपास का उपयोग भी कर सकते हैं ज्योंकि सभी लोगो के फ़ोन में उपलब्ध होता हैं।

पूजा रूम सबसे महत्वपुर्ण अवयव हैं।

 कुछ जगह बचने के बाद हम उसे मंदिर का स्थान बना देते हे, परन्तु यह सही नहीं हैं।

 According To Hindu Mythology हमें पहले ही मंदिर के स्थान का चुनाव करना चाहिए।

 पूजा करते समय हमारा मुँह नार्थ ईस्ट की तरह हे तो बहुत अच्छा या फिर ईस्ट या नार्थ की तरफ होना

चाहिए।

 पूजा बैठ कर करे या खड़े होकर करे भगवान् के चरण हमारी छाती के लेवल में आने चाहिए क्योंकि कमर के नीचे का भाग अपवित्र माना गया हैं।

 घर के अंदर मंदिर सामान्य होना चाहिए भव्यता नहीं होनी चाहिए क्योंकि एक गृहस्थ जीवन में बहुत अधिक शुद्धता की महत्वता नहीं रख सकते।

 घर में अगर मूर्तियां भी रखे ज्यादा विशाल नहीं होनी चाहिए न्यूनतम उचाई 2" और अधिकतम 9"

 पूजा घर का दरवाजे 2 पल्लो के होने चाहिए sliding door नहीं होने चाहिए।

 पूजा रूम रसोई घर और बैडरूम में नहीं होना चाहिए।

 अगर किसी slope पर भगवान् रखे हे तो उप्पर नीचे की slope पर कुछ नहीं रखना चाहिए ।

 N, E, NE के अलावा पूजा रूम सही नहीं हैं।

 ब्रह्म स्थान में पूजा रूम नहीं बनाते हे ब्रह्मस्थान में लोगो का आना जाना लगा रहता हे क्योंकि बच्चों का शोर भी रहता हैं।

 ब्रह्मस्थान में बड़ी पूजा का आयोजन किया जा सकता हे क्योंकि वह भी देव स्थान हैं।

 पूजा रूम में पूजा के बर्तन में कॉपर का उपयोग उत्तम होता है, दूध दही के उपयोग के लिए स्टील के बर्तन का उपयोग कर सकते हैं।

 पूजा घर में हवनकुंड आग्नेय कोण (SE) में होना चाहिए।

 हवन करते समय हमारा मुख पूर्व दिशा की और होना चाहिए ।

 पूजा रूम में उचित प्रकाश होना चाहिए जैसे वाइट, लेमन कलर, पिंक ।

 पूजा रूम में त्रिकोण की आकृति फोटो और स्टेचू नहीं होने चाहिए ।

 भगवान् की मूर्ति एक दूसरे के सामने नहीं रखनी चाहिए।

 एक की देवी देवता की एक से अधिक पुरे घर में मिलकर 3 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

 घर में शिवलिंग नहीं होना चाहिए, अगर रखे भी तो परिवार सहित रख सकते हैं।

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