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October 19 2019 03:53 PM

कैसे डूबा पीएमसी बैंक

Posted at: Oct 10 , 2019 by Dilersamachar 5530

अशोक गुप्त

देश के कोआपरेटिव बैंकों में एक बड़े नाम पीएमसी बैंक पर रिजर्व बैंक ने कई प्रतिबंध लगा दिए हैं और उसे अपनी निगरानी में ले लिया है। रिजर्व बैंक ने आदेश दिया है कि सभी खाताधारक अगले 6 महीने तक अपने खाते से केवल 10000 रूपये की राशि ही निकाल सकेंगे। पहले यह राशि एक हजार रू रखी गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 10000 रू. कर दिया गया है।

बैंक के चेयरमैन को हटा दिया गया और उसकी जगह रिजर्व बैंक ने अपना चेयरमैन भेजा है जो बैंक के सारे खातों की जांच करके बैंक को सुचारू रूप से चलाने और पटरी लाने का प्रयास करेगा।

रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक के फिक्स डिपाजिट स्वीकार करने और कर्ज देने पर भी रोक लगा दी है। इस बैंक की स्थापना 1984 में मुंबई में हुई थी और दिल्ली, कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश, म.प्र. और गुजरात में भी इसकी शाखाएं हैं पर अधिकतर शाखाएं महाराष्ट्र में हैं। यह एक प्रमुख कापोरेटिव बैंक रहा है और सालाना 17 हजार करोड़ रू. का कारोबार करता है। मार्च 2019 में समाप्त हुए फाइनेंशनल ईयर में बैंक ने लगभग 99 करोड़ रू. का लाभ कमाया है। बैंक का अब तक का परफारमेंस भी अच्छा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रिजर्व बैंक को इसलिए कार्रवाई कंरनी पड़ी क्योंकि बैंक ने हाउसिंग डवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. नाम की कंपनी को 2500 करोड़ का कर्ज दे दिया है लेकिन कंपनी में समस्या चल रही है जिसके कारण कंपनी ने दिवालिया होने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। आरबीआई को लगा कि 2500 करोड़ रू. की राशि डूबने से बैंक की हालत पूरी तरह बिगड़ जाएगी क्योंकि बैंक का मुनाफा और सरप्लस मिलाकर 1000 करोड़ रू. से भी कम है।

इस बीच बैंक के प्रबंध निर्देशक जॉय थॉमस ने कहा कि 6 महीने के भीतर सब अनिय मितताएं दूर कर बैंक फिर से काम करने लगेगा। बैंक की हालत इस समय ऐसी है कि कोई बड़ा बैंक उसको अधिग्रहण करने से बचना चाहेगा। यदि बैंक नहीं चल पाया तो जिन ग्राहकों की 1 लाख रू. से अधिक राशि है उनको बहुत नुकसान होगा क्योंकि सबसे ज्यादा प्रभाव उन पर ही पड़ेगा।

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कहा जा रहा है कि बैंक ने कुछ जरूरी जानकारी रिजर्व बैंक से छुपाई पर रिजर्व बैंक की जिम्मेवारी भी कम नहीं है कि आखिर कैसे पीएमसी बैंक के अधिकारी रिजर्व बैंक से कुुछ जानकारियां छिपाने में कामयाब हो गए। ऐसा लगता है कि रिजर्व को इन बैंकों के कामकाज पर और अधिक फंदा कसने की आवश्यकता है नहीं तो आम जनता का बैंकिंग सिस्टम से विश्वास हट जाएगा। 


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