Logo
December 6 2022 03:20 AM

नींद को कैसे बुलायें

Posted at: Jun 19 , 2018 by Dilersamachar 9680

इन्दीवर मिश्र

दिलेर समाचार, प्रत्येक प्राणी को जीवन की सुरक्षा के लिए जहां एक ओर भोजन की आवश्यकता पड़ती है, वहीं दूसरी ओर नींद भी उससे कम आवश्यक नहीं। 

नींद का न आना एक भयंकर रोग है तथा जो लोग इस रोग से ग्रस्त हैं अथवा जिन्हें नींद नहीं आती, उनके समान दुःखी प्राणी इस संसार में विरले ही होंगे। कारण यह है कि शारीरिक विश्राम के लिए नींद जितनी आवश्यक है, उतनी ही मानसिक विश्राम के लिए भी आवश्यक है। इस संसार का प्रत्येक प्राणी रोग, शोक आदि चिन्ताओं से पीडि़त रहता है।

नींद ही एक मात्रा ऐसी औषधि है जो चौबीस घंटे में मनुष्य को कम से कम एक तिहाई समय के लिए समस्त चिन्ताओं से मुक्त कर के विश्राम देती है जिसके बिना वह जीवन को ठेलने में असमर्थ सा रहता है। अतः यह सिद्ध है कि जो लोग अनिद्रा रोग के शिकार हैं अथवा जिन्हें रात्रि में नींद नहीं आती, उनकी दिन भर की चिन्ताएं रात्रि में कई गुणा बढ़ जाती हैं।

सुखद निद्रा की प्राप्ति कुछ साधारण उपायों द्वारा सम्भव है जिनका पालन करने से विशेष लाभ हो सकता है।

सोने से पूर्व पेट का हल्कापन अत्यावश्यक है। अतः यह आवश्यक है कि भोजन सोने से कम से कम तीन घंटे पहले कर लेना चाहिए।

सोने से पूर्व किसी भी नशीली वस्तु का सेवन करना हानिकारक है। कारण यह है कि नशीली वस्तुएं शरीर में प्रवेश कर हमारी रक्तवाहिनी नाडि़यों को उत्तेजित कर देती हैं जो सुखद निद्रा में बाधक हो जाती हैं।

सोने से पूर्व दिन भर की चिन्ताओं को भूलने का भी प्रयत्न करना चाहिए।

बहुधा यह देखा जाता है कि दिन भर कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को मानसिक श्रम के अतिरिक्त अन्य बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, अतः जब वे घर लौटते हैं तो उन्हें भूलना तो दूर, वे अपनी कल्पना के द्वारा गहरे रंगों में चित्रित करने लगते हैं। उनकी यह प्रवृत्ति अत्यन्त घातक है, इससे रात्रि की नींद में घोर बाधा उत्पन्न हो जाती है।

कुछ लोगों के अनुसार दिन भर की चिन्ताओं को भुलाया नहीं जा सकता अथवा यह कहा जाए कि वे भूलना चाहते हैं पर भूल नहीं पाते हैं। वास्तव में यदि विचार किया जाए तो यह तर्क गलत है। सच तो यह है कि उनका मन चिन्ताओं को भूलना ही नहीं चाहता। ऐसे लोग चिन्ताओं में डूबे रहने की आदत सी डाल लेते हैं।

इस रोग से ग्रस्त रोगी के लिए यह भी आवश्यक है कि वह अपनी अप्रिय घटनाआंे को छोड़कर प्रिय घटनाओं का स्मरण करे।

कुछ लोगों के विचार से दिन में नींद का आना हानिकारक है किन्तु यह ठीक नहीं। यदि रात्रि में किन्हीं कारणों से नींद ठीक न आ सके तो दिन में भोजनोपरान्त कुछ समय के लिए सो लेना आवश्यक है। रात्रि में नींद न आने पर उसके विषय में दूसरे दिन कदापि नहीं सोचना चाहिए क्योंकि नींद न आने से ज्यादा उसके सम्बन्ध में की जाने वाली चिन्ता हानिकारक होती है।

इस प्रकार शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के नियमों का यदि पूर्णरूप से पालन किया जाए तो अनिद्रा के इस भयंकर रोग से मुक्ति पाकर जीवन को आनन्द से परिपूर्ण बनाया जा सकता है।  

ये भी पढ़े: अनेक बीमारियों की सिर्फ एक दवा - अदरक

Related Articles

Popular Posts

Photo Gallery

Images for fb1
fb1

STAY CONNECTED