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December 10 2022 11:37 AM

अगर आपके साथ भी हो रही है ये घटना तो समझ ले पूर्वजों के कर्मों का फल भुगत रहे हैं आप

Posted at: Mar 5 , 2018 by Dilersamachar 9579

दिलेर समाचार, गीता में कहा गया है कि मनुष्य अपने कर्मों का फल इसी जन्म में पाता है किंतु इस संसार में रहते हुए फल की चिंता किए बिना कर्म करते जाना ही हर मनुष्य का कर्त्तव्य है.. जो कर्म नहीं करता वह पाप का भागीदार है।

वास्तविक जीवन में आएं तो कई बार ऐसा होता है कि मनुष्य के स्वभाव के विपरीत उसे कर्मफल मिलते हैं। तात्पर्य यह है कि अक्सर ऐसा होता है कि अच्छे लोगों को बार-बार जीवन में बुरी तथा दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का सामना करना पड़ जाता है, जबकि कई दुष्ट मनुष्यों को अनेक बुरे कर्मों के बावजूद भाग्यहीनता का कभी सामना नहीं करना पड़ता.. ऐसे में अगर कर्म के अनुसार फल पाने जैसी बातों का आंकलन करें, तो यह पूरी तरह निराधार मालूम पड़ता है... तो क्या यह वास्तव में निराधार है? जवाब जन्मों और सांसारिक जुड़ाव में निहित है।

बच्चे अपने माता-पिता का अंश होते हैं और उन्हीं का दूसरा रूप माने जाते हैं। उनकी सोच और स्थिति के अनुसार बच्चों का जीवन भी प्रभावित होता है, लेकिन इससे भी कहीं बहुत अधिक हर व्यक्ति का भाग्य और दुर्भाग्य भी अपने पारिवारिक कर्मों से जुड़ा होता है।

इसलिए संभव है कोई मनुष्य अपने कर्म और स्वभाव में अति नेक दिल हो लेकिन उसकी परिस्थितियां हमेशा उसे चुनौतियों तथा दुखों का सामना कराए। वहीं ऐसा भी संभव है कि एक अत्यधिक क्रूर व्यक्ति भी अपने भाग्य के बल पर जीवन का हर सुख पाए और हर चीज उसे आसानी से मिल जाए।

यह उनसे जुड़े पारिवारिक कर्मों के फल हो सकते हैं। इसलिए अपने साथ दूसरों की परिस्थितियों की तुलना करते हुए दुखी होने की बजाय आपको उसे अपना कर्मफल मानकर चलना चाहिए और ईमानदारीपूर्वक अपने कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिए। यहां हम आपको ऐसे ही कुछ लक्षण बता रहे हैं जो कहते हैं कि आप अपने पूर्वजों के कर्मों का फल भुगत रहे हैं।

पारिवारिक कर्मों या कहें पूर्वजों के कर्मों से जुड़े लोग कुछ ऐसी घटनाओं या परिस्थितियों से जुड़ सकते हैं जिसका उनके वर्तमान वजूद से शायद ही कोई नाता हो। ऐसे लोग उन परिस्थितियों के भी जिम्मेदार ठहराए जाते हैं जो उन्होंने कभी किया ही नहीं... या ऐसा भी संभव है कि आपको उस काम का क्रेडिट भी मिले जिसके लिए आपका बहुत अधिक योगदान ना हो।

कहने का अर्थ यह कि अगर कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों के कर्मों से जुड़ा होगा तो जरूरी नहीं कि यह हमेशा उसके लिए नकारात्मक ही होगा, बल्कि कई बार यह उसके लिए अच्छा भी होगा। या तो ऐसे लोगों को मेहनत से कम आंका जाता है या मेहनत और उम्मीद से अधिक उन्हें मिलता है।

ज्यादातर ऐसे लोगों को परिवार में या तो उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता है या उनसे हर किसी की बहुत अधिक उम्मीदें होती हैं। परिणाम यह होता है कि अगर परिवार में कुछ बुरा हुआ और उसके लिए वे जिम्मेदार ना भी हुए, तो भी दोषी ठहराए जाते हैं। यह उनके लिए बेहद दुखी करने वाला या अवसादपूर्ण होता है।

 

इसके ठीक विपरीत ऐसा भी हो सकता है कि किसी भी प्रकार से परिवार की उन्नति हो या मान-सम्मान मिले और उसे दिलाने में भले ही उस व्यक्ति ने कोई अधिक प्रयास ना किया हो लेकिन परिस्थितियां कुछ ऐसी होती हैं कि उसका पूरा क्रेडिट उसे ही दे दिया जाता है।

 

ऐसे लोग त्यागी होते हैं और जीवन में अपने पूर्वजों के आशीर्वाद से आगे बढ़ते हैं। परिवार और उसके हर सदस्य के लिए उनके दिल में एक विशेष मोह होता है। अन्य लोगों की अपेक्षा उनमें परिवार के सदस्यों और परिस्थितियों के लिए अतिरिक्त समझ भी होती है। जिन घटनाओं या समस्याओं का कारण और निदान परिवार के बड़े भी नहीं समझ पाते, उन्हें ये आसानी से समझ लेते हैं।

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