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February 7 2023 07:40 PM

राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच बढ़ती दूरियां

Posted at: Mar 3 , 2018 by Dilersamachar 9545

संजय सिन्हा

दिलेर समाचार, राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच ‘दूरियां’ फिर से बढ़नी शुरू हो गईं हैं। राज्य सरकार व राजभवन के बीच पुनः उभर रहे छत्तीस के आंकड़े का नतीजा क्या होगा, यह कहना तो मुश्किल है मगर इसके दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते हैं। इससे पहले भी समय-समय पर विभिन्न मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्राी ममता बनर्जी, उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और राज्यपाल के बीच ठनती रही है। इस बार  सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप का यह मुद्दा पिछले दिनों  संसद में भी गूंजा था।

इससे पहले पिछले  साल उत्तर 24-परगना जिले के बसीरहाट इलाके में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान भी राज्यपाल और ममता बनर्जी में ठनी थी। ममता ने तब राज्यपाल पर धमकी देने का आरोप लगाया था।सांप्रदायिक हिंसा को लेकर मुख्यमंत्राी ममता बनर्जी और राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के बीच टेलीफोन पर तीखी बातचीत भी हुई थी और मामला तूल पकड़ता गया हालांकि राजभवन ने इन आरोपों से इंकार करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की थी जिसमें मुख्यमंत्राी ममता बनर्जी के ‘व्यवहार और भाषा’ को लेकर आश्चर्य जताया गया था।

इसके बाद गवर्नर केसरीनाथ त्रिपाठी के साथ विवाद को बढ़ाते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उनपर ‘भाजपा कैडर’ की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया। तृणमूल ने आरोप लगाया कि राजभवन उन लोगों की मदद कर रहा है व उकसावा दे रहा है। इसके बाद राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को पत्रा लिखकर चौबीस परगना जिले के बादुरिया में हुई साम्प्रदायिक हिंसा एवं मुख्यमंत्राी के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत की जानकारी दी। इसके बाद राज्यपाल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ममता बनर्जी के आरोप राज्यपाल और उनके दफ्तर की बेइज्जती और अपमान करने के समान है।

राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने यह भी कहा था कि राज्यपाल पर आरोप लगाने की बजाए मुख्यमंत्राी ममता बनर्जी और उनके सहयोगी कानून एवं व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें जबकि ममता बनर्जी का कहना था कि जिस तरह से राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मुझे धमकाया,वह गलत है। मैंने तो इस्तीफा देने तक का सोच लिया था। मुख्यमंत्राी ममता बनर्जी का कहना था कि गवर्नर ने उनके साथ बहुत ही अपमानजनक तरीके से बात की। इस विवाद के खत्म होने के बाद फिर से एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है और राज्य सरकार व राज्यपाल के बीच दूरियां बढ़ती जा रहीं हैं।

आपको बताता चलूं कि पिछले दिनों   राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेने के लिए सरकारी कर्मचारियों से साथ एक बैठक बुलाई थी। छह फरवरी को प्रस्तावित इस बैठक के लिए राजभवन की ओर से मालदा के डिवीजनल कमिश्नर को राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव सतीश चंद्र तिवारी ने एक पत्रा भेजा था। तृणमूल कांग्रेस ने इसी बैठक को मुद्दा बना कर राज्यपाल पर सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप का आरोप लगा दिया। तृणमूल कांग्रेस सांसद दिनेश त्रिवेदी का कहना है  कि पार्टी संविधान का सम्मान करती है लेकिन राज्यपाल सुपर चीफ मिनिस्टर नहीं हो सकते। वे राज्य के संवैधानिक मुखिया हैं, प्रशासनिक नहीं। प्रशासनिक मामलों में उनका इस तरह से हस्तक्षेप करना अप्रासंगिक है।

इसी मामले को लेकर राज्य के संसदीय कार्य मंत्राी और तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी आरोप लगाते हैं कि राज्यपाल ने सरकारी अधिकारियों को सीधे बैठक के लिए बुला कर अपने पद की गरिमा को तो ठेस पहुंचाई है और संविधान का भी उल्लंघन किया है। दिलचस्प यह है कि विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी ने चटर्जी को ‘विशेष उल्लेख के जरिए’ पर सदन में इस मुद्दे का जिक्र करने की भी अनुमति दे दी। विपक्षी दलों ने अध्यक्ष के इस फैसले का विरोध किया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान कहते हैं कि राष्ट्रपति व राज्यपाल जैसे संवैधानिक प्रमुखों से जुड़े मुद्दों पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती। यह असंवैधानिक है।

तृणमूल कांग्रेस नेताओं की दलील है कि राज्यपाल को अलग-अलग जिलों में जाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक की बजाय मुख्यमंत्राी से  सीधे रिपोर्ट मांग लेनी चाहिए थी। ममता विभिन्न जिलों में प्रशासनिक बैठकें करती रही हैं।

 राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी का इस सन्दर्भ में कहना  है कि यह विवाद खत्म होना चाहिए और तृणमूल नेताओं को राजभवन पर कीचड़ उछालना बंद करना चाहिए लेकिन तृणमूल नेता पार्थ चटर्जी का आरोप है कि राज्यपाल केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी यानी भाजपा के प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहे हैं। ऐसे में फिलहाल ऊपरी तौर पर भले यह विवाद थमता नजर आ रहा हो, भीतर ही भीतर चिंगारी तो सुलग ही रही है।अगर यह चिंगारी नहीं बुझ पाई तो हालात बदतर हो सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयानों को लेकर राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी फिर से दुखी नजर आ रहे हैं।राज्यपाल बार -बार इस विवाद को खत्म करने का अनुरोध कर रहे हैं मगर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की बयानबाजी शबाब पर है। अब देखने वाली बात ये होगी कि राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच का ये विवाद किस मोड़ पर पहुंचता है।

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