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July 8 2020 12:14 AM

भारत ने 59 चाइनीज ऐप्स पर किया डिजिटल स्ट्राईक, लगाया बैन

Posted at: Jun 30 , 2020 by Dilersamachar 5469

दिलेर समाचार, बीजिंग. लद्दाख की गलवान वैली में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प (India-China Rift) के बाद जारी तनाव के बीच भारत सरकार (Modi Govt) ने चीन के 59 ऐप्स पर सोमवार को बैन लगा दिया है. इन ऐप्स में टिक टॉक (TikTok), यूसी ब्राउजर, हेलो और शेयर इट जैसे काफी पॉपुलर ऐप्स शामिल हैं. भारत ने तर्क दिया है कि इन चाइनीज ऐप्स के सर्वर भारत से बाहर मौजूद हैं और इनके जरिए यूजर्स का डेटा चुराया जा रहा था. उधर चीनी सरकार ने भले ही इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन चीन की सरकारी मीडिया ने भारत के कदम को अमेरिका की नक़ल करने वाला करार दिया है. चीन के सरकारी अखबार ने कहा है कि चीन की वस्तुओं के बहिष्कार के लिए भारत भी अमेरिका जैसे ही बहाने ढूंढ रहा है.

बता दें कि भारत सरकार ने स्पष्ट कहा है कि इन ऐप्स से देश की सुरक्षा और एकता को खतरा बना हुआ था, इसलिए ही इन्हें बैन करने का फैसला लिया गया है. सरकार ने इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत इन चीनी ऐप्स को बैन किया है. सूचना मंत्रालय को मिल रही शिकायतों में कहा गया था कि एंड्रायड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ चीनी मोबाइल ऐप्स का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. ये ऐप्स गुपचुप और अवैध तरीके से यूजर का डेटा चोरी कर भारत के बाहर मौजूद सर्वर पर भेज रहे थे. इसके आलावा इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, गृह मंत्रालय को भी इस तरह के खतरनाक ऐप्स को तुरंत बैन करने के लिए रिकमंडेशन भेजी गई थी.

चीनी मीडिया को लगी मिर्ची!

भारत के इस कदम से चीन की सरकारी मीडिया काफी नाराज़ नज़र आ रही है. चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने भारत के इस कदम को अमेरिका से नजदीकियां बढ़ाने वाला बताया है. अखबार ने आरोप लगाया है कि चीन से मालवेयर, ट्रोजन हॉर्स और राष्ट्रीय सुरक्षा का ख़तरा बताकर इस तरह के प्रतिबन्ध लगाए गए हैं. अख़बार के मुताबिक अमेरिका ने भी राष्ट्रवाद की आड़ में इसी तरह चीन के सामानों को निशाना बनाना शुरू किया था. चीनी मीडिया ने फिर दोहराया है कि इस तरह के क़दमों से भारत की अर्थव्यवस्था को ही नुकसान होगा. बिजली मंत्री आरके सिंह के बयान का जिक्र करते हुए अख़बार ने कहा है कि भारत चीन से 42 मिलियन डॉलर के सोलर मोड्यूल आयात करता है. साथ ही भारतीय बिजली कंपनियां भी चीन के बनाए इक्विपमेंट्स के जरिए काम कर रही हैं. ऐसे में बायकॉट का आह्वान बेहद मुश्किल मालूम होता है.

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