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December 3 2021 07:29 PM

इज़राइल के पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ उनके पूर्व सहयोगी ने भ्रष्टा्चार मामले में दी गवाही

Posted at: Nov 23 , 2021 by Dilersamachar 9064

दिलेर समाचार, यरुशलम. इज़राइल (Israel) के पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (benjamin netanyahu) के विश्वस्त रहे पूर्व सहयोगी ने सोमवार को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में गवाही देना शुरू कर दिया. नेतन्याहू के पूर्व प्रवक्ता नीर हेफेट्ज मुकदमे में अभियोजन के मुख्य गवाह हैं और उनके नेतन्याहू के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वत लेने के आरोपों के सिलसिले में काफी महत्वपूर्ण गवाही देने की संभावना है. हालांकि, अब विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रहे पूर्व प्रधानमंत्री ने कुछ भी गलत करने से इनकार किया है. उन्‍होंने कहा कि आरोप लगाने वाले की जांच की जानी चाहिए.

हेफेट्ज़ 2009 में पत्रकारिता में लंबे करियर को छोड़कर नेतन्याहू सरकार के प्रवक्ता के तौर पर काम करने लगे थे और 2014 में वह नेतन्याहू के परिवार के प्रवक्ता और सलाहकार बन गए. 2018 में हेफेट्ज़ को नेतन्याहू से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद वह सरकारी गवाह बन गए थे और जांचकर्ताओं को नेतन्याहू और उनके परिवार साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई थी.

उनकी गवाही में करीब एक हफ्ते की देरी हुई है क्योंकि नेतन्याहू के वकीलों ने अदालत से नए सबूतों की समीक्षा के लिए वक्त देने का आग्रह किया था. पिछले हफ्ते उपलब्ध सूचना में आरोप लगाया गया है कि नेतन्याहू की पत्नी सारा ने अपने पति के अरबपति दोस्तों – हॉलीवुड निर्माता अर्नोन मिलचान और ऑस्ट्रेलियाई अरबपति जेम्स पैकर- से महंगा ब्रेसलेट (एक तरह का कंगन) तोहफे के तौर पर लिया था. नेतन्याहू सोमवार को यरुशलम जिला अदालत में पेश हुए. उनके संग लिकुद पार्टी के साथी नेता भी थे.

गौरतलब है कि जून में इजराइल में नई सरकार का गठन हुआ. 8 पार्टियों की गठबंधन सरकार की कमान कट्टरपंथी माने जानेवाले नफ्ताली बेनेट ने संभाली और बेंजामिन नेतन्याहू के 12 साल का कार्यकाल खत्म हो गया. वह इजराइल के सबसे अधिक वक्त तक सत्ता में रहने वाले प्रधानमंत्री हैं और दो साल से भी कम वक्त में हुए चार कठिन चुनावों में सत्ता हासिल करने में कामयाब रहे हैं, जबिक उन पर रिश्वत लेने, धोखाधड़ी और न्यास भंग करने के आरोप हैं. पिछले 23 मार्च 2021 को हुए चुनाव में काफी हद तक नेतन्याहू के पक्ष में मतदान हुए थे लेकिन स्पष्ट जनमत नहीं मिला था.

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