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November 22 2019 07:59 AM

जाॅन्डिस लिवर की गड़़बड़ी से होता है

Posted at: Jul 12 , 2019 by Dilersamachar 8054

राजा तालुकदार

लिवर हमारे शरीर का एक महत्त्वपूर्ण अंग है जो पेट के ऊपरी हिस्से में दाहिनी तरफ होता है। यह भोजन पचाने में सहायता करता है। शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं तथा परिवर्तनों में यह विशेष योगदान देता है। यदि लिवर सही ढंग से काम नहीं करता या काम करना बन्द कर  देता है तो हम विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।

गर्मी या बरसात के दिनों में फैलने वाली बीमारियों में जाॅन्डिस एक प्रमुख रोग है जिससे हमारा लिवर प्रभावित होता है। यह एक गंभीर रोग है। इलाज में लापरवाही करने से रोगी की जान भी जा सकती है। हमारा लिवर स्वस्थ रहे तथा यह ठीक तरीके से काम करता रहे,उसके लिए जरूरी है कि भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाया जाए।

हम आहार के रूप में जो कुछ भी ग्रहण करते हैं,उसका पाचन होकर रस बनता है। फिर रस से रक्त बनता है। रस को रक्त बनाने का कार्य मुख्य रूप से लिवर ही करता है। लिवर के अन्दर पित्ताशय होता है। यहां से दो वाहिनियाँ निकलती हैं जिसमें से एक आमाशय में जाती है व दूसरी रक्त का निर्माण करती हैं।

किसी कारण से आमाशय में जाने वाली वाहिनी (नली) बंद हो जाती है तो पाचन क्रिया के लिए आमाशय में जाने वाला पित्त रक्त में मिलने लगता है तथा रक्त का बनना बंद हो जाता है। धीरे-धीरे रोगी पीला पड़ जाता है। इस स्थिति को जाॅन्डिस या पीलिया कहा जाता है।

लक्षण:- इस रोग में निम्न लक्षण दिखाई देते हैंः-

 रोगी के नेत्रा, नाखून और मूत्रा का रंग पीला हो जाता है।ं टट्टी सफेद रंग की होने लगती है।

 रोग बढ़ जाने पर पसीना भी पीला आने लगता है।

 भूख नहीं लगती। कुछ भी खाने पर उल्टी हो जाती है।

 रोगी कमजोर हो जाता है। उसे चलने फिरने व करवट बदलने में परशानी होती है।

आयुर्वेदिक उपचार:- . मकोय के पत्तों का रस उबालकर दिन में दो बार 2-2 चम्मच रोगी को पिलाएं।

उ एक लिटर स्वच्छ पानी में 10-12 आलू बुखारे तथा 10-12 दाने इमली के डाल  दें। सुबह मसल छान लें तथा उसमें चीनी मिला लें। इसे दिन में तीन बार रोगी को सेवन कराएं। लाभ प्राप्त होगा।

उ आमतौर पर जाॅन्डिस का रोगी दस्त का शिकार हो जाता है। अगर रोगी को दस्त हो रहे हों तो सम भाग सफेद जीरा तथा सौंफ लेकर कच्चा पका भून लें। इसमें चीनी मिलाकर 1/2 - 1/2 चम्मच रोगी को दिन में तीन बार खिलाएं।

उ रोगी को कब्ज हो तो उसे मकोय के पत्तों का साग खिलाएं।

उ कुमारी आसव तथा अमृतारिष्ट 2-2 चम्मच सम भाग पानी के साथ भोजन के बाद रोगी को पिलाएं।

उ रोहितकारिष्ट तथा पुनर्नवारिष्ट 2-2 चम्मच सम भाग पानी मिलाकर दिन में दो बार खाने के बाद दें।

उ पुनर्नवा मंदूर तथा चित्राकादि की 2-2 गोलियों सेवन कराएं।

सावधानियां:- .रोगी को चिकनाईयुक्त तथा मांसाहारी भोजन बिलकुल न दें।

उ प्रोटीनयुक्त भोजन पर्याप्त मात्रा में दें।

उ पानी खूब पीना चाहिए। पानी में नींबू तथा चीनी मिलाकर पिलाना लाभदायक होता।

उ तरल पदार्थ-जूस, लस्सी या दाल का पानी का सेवन कराएं।

उ रोगी को उबला हुआ और बिना हल्दी का भोजन दें।

उ ताजा तथा सुपाच्य भोजन करना चाहिए तथा पानी उबालकर पीना चाहिए।

उ रोगी को दाल, टमाटर, पालक व चुकन्दर आदि खाने के लिए बिलकुल नहीं देने चाहिए। (स्वास्थ्य दर्पण)

हंसें, हंसें और खूब हंसें

त भारत भारती

अनेक रोगों से मुक्ति के लिए तथा उन्हें नियंत्रित रखने के लिए हास्य एक अनुपम औषधि है। यह जरूरी है कि आप सही ढंग से हंसंे और स्वस्थ रहें। आप अपने को रोगी अनुभव करते हैं, इसकी वजह यह है कि आपके कहकहे खो गए हैं-एक बार ठहाका लगायें, उन्मुक्त रूप से हंसें। आप भला चंगा अनुभव करने लग जायेंगे।

वैज्ञानिक प्रयोगों से साबित हो चुका है कि हृदयरोग, रक्तचाप(बी.पी.) दमा, मानसिक उत्तेजना, अवसाद (डिप्रेशन) अनिद्रा आदि अनेक रोगों में खिलखिला कर हंसने से यथेष्ट लाभ होता है।

यह विदित तथ्य है कि योगसाधन या प्राणायाम के अंतर्गत श्वास-प्रश्वास की क्रिया को संतुलित करने का अभ्यास किया जाता है। इसके द्वारा पेट के ऊपरी हिस्से अर्थात् ’डायफ्राम‘ को संचालित किया जाता है। हंसने से यह क्रिया स्वतः संचालित हो जाती है और व्यक्ति प्रफुल्लित अनुभव करने लगता है। यह अनुसंधानों से प्रमाणित हो चुका है कि मानसिक उत्तेजना तथा रक्तचाप में उन्मुक्त हास्य लाभदायक होता है। सुमधुर हास्य से अवसाद और अनिद्रा जैसे रोगों में भी लाभ पहुंचता है।

हँस कर गुस्सा भगायें:- क्रोध कई परेशानियों की जड़ है किंतु हंसने से क्रोध काफूर हो जाता है और तनाव से मुक्ति मिलती है। शोक और वेदना की स्थिति में भी हंसी एक रामबाण दवा की तरह है क्योंकि हंसने से शोक और वेदना में कमी होती है। आजकल कई स्थानों में पार्कों या बाग-बगीचों में ऐसे क्लब हैं जहां कई लोग एकत्रा होकर जोरों से हंसते हैं या बैठ कर ठहाके लगाते हैं। यह भी प्रातःकालीन व्यायाम का एक हिस्सा है जिससे तनाव कम होता है और लोग ताजगी का अनुभव करते हैं।

हास्य क्रिया से श्वास-प्रश्वास की गति बढ़ती है जिससे फेफड़ों में अधिक आक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता आती है। इस वजह से श्वास संबंधी रोग नहीं होते और व्यक्ति स्वस्थ तथा हल्का अनुभव करता है। जब हम हंसते हैं तो उसका तत्काल प्रभाव हमारे मुखमंडल पर होता है, इससे चेहरे की मांसपेशियों में रक्तसंचार बढ़ जाता है। इस कारण हंसते रहने से व्यक्ति के चेहरे की कांति बढ़ जाती है।

कैंसर जैसे रोगों में लाभप्रद:- हास्य व्यक्ति के मानसिक तनावों को तो दूर करता ही है, यह पेट पर और आंतों पर भी दबाव उत्पन्न करता है जिससे कफ, पित्त के विकारों को दूर करने में मदद मिलती है। हंसने की क्रिया से कफ और पित्त की मात्रा घट जाती है, जिससे एसिडिटी संबंधी रोगों में राहत मिलती है।

यह पता चला है कि कैंसर रोग का एक प्रमुख कारण रक्त में निर्धारित मात्रा से अधिक संख्या में श्वेत रक्त कणों (डब्ल्यू बी.सी.) का होना है। हास्य से शरीर में तथा रक्त संचालन की प्रणाली में प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है जिससे कैंसर जैसे रोगों से भी बचाव हो सकता है।

मधुर हास्य से लोगों का स्नेह सौजन्य तो मिलता ही है, आपके शारीरिक सौंदर्य तथा स्वास्थ्य में भी वृद्धि होती है। इसलिए आज, आज और अभी से हंसना आरंभ करें जिससे आप को तथा आपके अपनों को लाभ मिलता रहेगा। 

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