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August 9 2020 12:04 PM

वर्षा ऋतु में बच्चों के खान पान पर ऐसे रखें ध्यान

Posted at: Jul 2 , 2020 by Dilersamachar 5191

दिलेर समाचार, नीतू गुप्ता। वर्षा ऋतु मस्त करने वाला मौसम  है। भीषण गर्मी के बाद वर्षा ऋतु आने पर सब उसका दिल से स्वागत करते हैं। उसकी मीठी मीठी फुहार बच्चों को खास लुभाती है।

इस मस्त कर देने वाले मौसम में जरा सी लापरवाही से बीमारियां भी बिन बुलाए मेहमान बन कर आने को तैयार रहती हैं। विशेषकर बच्चों में रोग प्रतिरोधी शक्ति कम होने से बच्चे इसकी गिरफ्त में शीघ्र आ जाते हैं। ऐसे में माताओं को आहार विहार, संबंधी चीज़ों पर विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। बच्चे अपरिपक्व होते हैं तो ऐसे में माता-पिता की जिम्मेवारी अधिक बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार माताओं को भोजन बनाते समय यह ध्यान अवश्य देना चाहिए कि बच्चों के लिए संतुलित आहार तैयार करें। संतुलित आहार का अर्थ महंगी सब्जी और फल नहीं बल्कि ऋतु अनुसार प्रकृति द्वारा दी गई सब्जियों, फलों और अनाजों का चयन है। आइये ध्यान दें किन किन खाद्य पदार्थों के समायोजन से बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सकता है।

वर्षा ऋतु के नाम से ही विदित है कि इस ऋतु में वायु में नमी अधिक होती है और इस मौसम में अधिक पानी धारण किए खाद्य पदार्थ खाने में अच्छे नहीं लगते जैसे खरबूजा, तरबूज, फालसे, खीरा, कद्दू आदि। ऐसे खाद्य पदार्थ बच्चों को न दें। इनसे उनमें खाने के प्रति अरूचि पैदा हागी।

वर्षा ऋतु में केला, पपीता, करेला, भिंडी, परवल आदि अधिक मात्रा में देने चाहिए। इनमें विटामिन्स और लौह तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं जो बच्चों की रोगी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त बच्चे दिन में एक डेढ़ गिलास दूध और दिन के भोजन में एक कटोरी दही ले सकते हैं। इन दिनों बच्चों को उबला पानी ठंडा कर पीने को दें क्योंकि वर्षा ऋतु में पानी अच्छा नहीं आता।

अधिक तला हुआ भोजन बच्चों को इस ऋतु में नुकसान पहुंचाता है। दाल में घी का बघार लगा कर बच्चों को दे सकते हैं। अतिरिक्त घी या मक्खन न दें। मीठा भी सीमित मात्रा में दें। इन दिनों अधिक मिठाइयां बच्चों के स्वास्थ्य को खराब करने में मदद करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मीठा देना भी आवश्यक है। इससे बच्चों में कैलोरी की वृद्धि होती है। दालों में काले मांह, राजमांह, सफेद छोले, सफेद लोबिया कम से कम दें क्योंकि ये कठिनाई से पचते हैं।

आहार के साथ-साथ इस मौसम में अन्य कुछ बातों पर भी ध्यान देना चाहिए। बच्चों को अधिक भीगने न दें। भीगते ही बच्चों को सूखे तौलिए से पोंछकर सूखे वस्त्रा बदलें। अधिक देर तक भीगे रहने से बच्चों की त्वचा में फंगस और दाने आदि हो सकते हैं। बच्चों को खाना साफ सुथरे सूखे बर्तनों में दें और बनाते समय भी साफ बर्तनों का प्रयोग करें।

खाद्य पदार्थ ढक कर रखें। पहले से कटे हुए फल व सलाद बच्चों को न दें। खाना परोसने और बनाने से पूर्व अपने भी हाथ धोएं और खाना खाने से पहले बच्चों के हाथ भी धुलवाएं।

साग, सब्जी, फल आदि अच्छी तरह से धोकर पकाएं और खाने को दें क्योंकि वर्षा ऋतु में फल और सब्जी पर शीघ्र कीड़ा लगता है। बाजार की बर्फ की बनी कोई चीज़ बच्चों को न खाने दें। बाजार में दूध से बने व्यंजन भी न खाएं। मांस, मछली भी घर पर अच्छी तरह पका कर खाएं। वर्षा ऋतु में फास्ट फूडस व शीतल पेय का सेवन कम से कम करने दें।

घर पर नूडल्स, बर्गर बनाते समय पनीर का समावेश करें ताकि बच्चों को कुछ पौष्टिकता मिल सके। अधिक पुराना बना खाद्य पदार्थ जो फ्रिज में पड़ा हो वो खाने को न दें। ताजा भोजन ही परोसें। बच्चों को सब्जियों और दाल वाली खिचड़ी तथा दलिया खाने को दें जो पौष्टिकता के साथ-साथ सुपाच्य भी होता है। (उर्वशी)?kj ij UkwMYl] cxZj cukrs le; iuhj dk lekos'k djsa rkfd cPpksa dks dqN ikSf"Vdrk fey ldsA vfèkd iqjkuk cuk [kk| inkFkZ tks fÝt esa iM+k gks oks [kkus dks u nsaA rktk Hkkstu gh ijkslsaA cPpksa dks lfCt;ksa vkSj nky okyh f[kpM+h rFkk nfy;k [kkus dks nsa tks ikSf"Vdrk ds lkFk&lkFk lqikP; Hkh gksrk gSA

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