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December 10 2022 11:16 AM

केजरीवाल सरकार ने किया दावा-70 फीसदी बाहर के प्रदूषण से परेशान है दिल्ली

Posted at: Nov 19 , 2021 by Dilersamachar 9128

दिलेर समाचार, नई दिल्ली. द‍िल्‍ली लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण (Air Pollution) की समस्‍या को दूर करने को लेकर द‍िल्‍ली सरकार प्रयासरत है. वहीं सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) भी इस समस्‍या को लेकर बेहद गंभीर है. कोर्ट ने द‍िल्‍ली सरकार (Delhi Government) और अन्‍य राज्‍यों को फटकार लगाते हुए इस समस्‍या को दूर करने या इसका ठोस समाधान न‍िकालने के सख्‍त आदेश द‍िए हैं.

वहीं इस समस्‍या को लेकर आरोप प्रत्‍यारोप की राजनीत‍ि भी चरम पर है. एक दूसरी सरकारें प्रदूषण के ह‍िस्‍से को लेकर अपना बचाव कर रही हैं. अब द‍िल्‍ली सरकार ने केंद्र सरकार (Central Government) की एजेंस‍ियों को हवाला देते हुए द‍िल्‍ली में 70 फीसदी प्रदूषण को बाहर का बताते हुए प्रदूषण की गेंद दूसरे राज्‍यों के पाले में डाल दी है.

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) ने कहा कि दिल्ली में 70 फीसदी प्रदूषण बाहर से आ रहा है. यहां के लोग स्रोत सिर्फ 30 फीसदी प्रदूषण पैदा कर रहे हैं. केंद्र सरकार (Central Government) की एजेंसी आईआईटीएम (IITM)के डाटा का सीएसई (CSE) ने विश्लेषण किया जिससे खुलासा हुआ कि पिछले पांच साल में दिल्ली के अंदर पैदा होने वाला प्रदूषण कम हुआ है.

मंत्री गोपाल राय ने जानकारी दी है क‍ि दिल्ली में 2016 में 64 फीसदी प्रदूषण बाहर का था और 36 फीसद प्रदूषण दिल्ली के अंदर का था. उन्होंने कहा किसुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में केंद्र सरकार ने माना कि पराली जलने की घटनाएं का प्रदूषण में हिस्सेदारी बढ़कर 35 से 40 फ़ीसदी तक हुई है. जिसका असर दिल्ली के अंदर दिख रहा है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री दिल्ली-एनसीआर से जुड़े सभी पर्यावरण मंत्रियों की बैठक बुलाएं. दीर्घकालीन स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक आधार पर संयुक्त एक्शन प्लान बनाकर हर राज्य की जिम्मेदारी तय की जाए.

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर प्रदूषण को लेकर पिछले कई दिनों से लगातार बहस चल रही है कि दिल्ली के अंदर जो प्रदूषण है, उसकी मुख्य वजह क्या है? दिल्ली के अंदर का प्रदूषण है, दिल्ली के बाहर का प्रदूषण है, गाड़ियों का प्रदूषण है या पराली का प्रदूषण है, निर्माण का प्रदूषण है या बायोमॉस बर्निंग का प्रदूषण है. कोर्ट से लेकर विशेषज्ञों के बीच में लगातार यह बात चल रही है.

गोपाल राय ने कहा कि संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) प्रदूषण पर काम करने वाली एक जानमानी संस्था है. दिल्ली में केंद्र सरकार की संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मैनेजमेंट (आईआईटीएम) भी है. आईआईटीएम का एप सफर है. आईआईटीएम सफर के माध्यम से प्रदूषण का सारा डाटा जारी करता है. इसके द्वारा डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) का जो डाटा है, उसको लेकर सीएसई ने 24 अक्टूबर से 8 नवंबर तक 15 दिनों का प्रति घंटे के हिसाब से डाटा विश्लेषण किया.

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