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LG विनय का अफसरों को आदेश कहा- लैंडफिल से कूड़े का पहाड़ हटाने के लिए 3 दिन में एक्शन प्लान बताओ

Posted at: May 30 , 2022 by Dilersamachar 9373

दिलेर समाचार, नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना अब एक्शन मोड में दिखने लगे हैं. दिल्ली के एलजी विनय कुमार सक्सेना ने अधिकारियों को गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल स्थानों से कूड़े के पहाड़ों को पूरी तरह से हटाने के लिए तीन दिनों के भीतर एक कार्य-योजना पेश करने का निर्देश दिया. रविवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई. बयान के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा पेश की जाने वाली कार्य-योजना की उपराज्यपाल (एलजी) द्वारा नियमित आधार पर निगरानी की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो वह वास्तविक प्रगति देखने के लिए उन स्थलों का दौरा भी करेंगे.

इसमें कहा गया है कि साप्ताहिक आधार पर काम की निगरानी के लिए एलजी सचिवालय में एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया जाएगा. एलजी वियन कुमार सक्सेना ने गाजीपुर में लैंडफिल स्थल का दौरा किया और निर्देश दिया कि कूड़े के तीन पहाड़ों को पूरी तरह से हटाने के लिए एक निश्चित तिथि का जिक्र करते हुए एक कार्ययोजना तैयार करने के वास्ते अधिकारियों की एक विशेष टीम का गठन किया जाए. उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए ‘रिवर्स इंजीनियरिंग मॉडल’ अपनाने का सुझाव दिया ताकि निर्धारित लक्ष्य समयसीमा से हासिल किए जाएं.

बयान के अनुसार, कूड़े के पहाड़ों पर की जा रही रिसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) गतिविधियों से काफी धूल पैदा हो रही है, जो आसपास के क्षेत्रों में धुंध और प्रदूषण की समस्या बढ़ने का कारण बन रही है. बयान में कहा गया है कि धूल की समस्या से निपटने के लिए सक्सेना ने पास के ‘सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट’ (एसटीपी) के रिसाइकिल किए गए पानी का छिड़काव करने का सुझाव किया दिया है.

करीब 70 एकड़ के दायरे में फैली गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगभग 140 लाख मीट्रिक टन कचरे का बोझ है. उससे जुड़े पूर्वी दिल्ली के इलाकों में दैनिक आधार पर 2,600 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है. इसी तरह, उत्तरी दिल्ली के भलस्वा और दक्षिणी दिल्ली के ओखला में स्थित लैंडफिल साइट पर क्रमश: लगभग 80 लाख और 50 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद है.

इन साइट पर तीन तरह का कचरा है। पहला ‘कचरा व्युत्पन्न ईंधन’ (आरडीएफ)है जबकि दूसरा कचरा निर्माण व विध्वंस से संबंधित है तथा तीसरे प्रकार का कचरा अक्रिय है. आरडीएफ कचरे का इस्तेमाल जहां ‘अपशिष्ट से बिजली’ पैदा करने के लिए किया जा रहा है, वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा अपनी सड़क निर्माण गतिविधियों के लिए कुछ मात्रा में अक्रिय अपशिष्ट लिया जा रहा है. इसी तरह, प्रसंस्कृत निर्माण एवं विध्वंस कचरे का प्रयोग निर्माण एवं भराव से जुड़ी गतिविधियों में किया जा सकता है.

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