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August 24 2019 03:48 AM

रेलवे अधिकारियों को खेलो के प्रति जागरूक करे, खेलों का महत्व शिक्षा से कम नहीं : कृपाशंकर बिश्नोई

Posted at: Apr 12 , 2019 by Dilersamachar 5626
दिलेर समाचार, वडोदरा । अब खेलों का महत्व शिक्षा से कम नहीं रह गया यह बात इंदौर के अर्जुन अवार्डी कोच कृपाशंकर बिश्नोई ने भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय एकेडमी वडोदरा में  रेलवे विभाग की ओर  से आयोजित 2019 "मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम" व "ए इंडक्शन प्रोग्राम"  के दौरान आज कही | कार्यक्रम में फिल्म दंगल में मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान व महिला अभिनेत्रियों को कुश्ती के गुर सिखाने वाले भारतीय महिला कुश्ती टीम के कोच कृपाशंकर बिश्नोई बतौर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे । यह जानकारी भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय एकेडमी वडोदरा के सीनियर प्रोफेसर सच्चिंदर मोहन शर्मा, (प्रबंधन) ने दी है । "मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम" और "ए इंडक्शन प्रोग्राम" कोर्स में प्रतिभागी करने आए अधिकारियों को अपने प्रेरणा दायक भाषण मे अर्जुन अवार्डी बिश्नोई ने कहा भारतीय रेलवे खेल और खिलाड़ियो को सही सम्मान और स्थान देती है, इसके लिए रेलवे स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड प्रतिबद्ध है | रेलवे से जुड़ा कोई भी खिलाड़ी अगर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करता है तो रेलवे उसे सम्मान और समय से पहले पदोन्नति देने का कारी करती है । रेलवे स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड ने अपनी एक खेल व्यवस्था बनाई हुई है जिससे भारतीय खेलो को और अधिक से अधिक प्रोत्साहन मिलता है | 
 
आगे अपने सम्बोधन मे उन्होने आक्रमक अंदाज मे कहा की खिलाड़ी बहुत मेहनत के बाद कोई मुकाम हासिल करते है कोई खिलाड़ी उस दिन के लिए सारी उम्र मेहनत करता है जब वह अपने खेल से इतिहास लिखता है | कहने और सुनने में यह काफ़ी आसान लगता है कि मैं बड़ा होकर खिलाड़ी बनूँगा लेकिन भारत जैसे देश में खिलाड़ी बनना काफ़ी मुश्किल नहीं है | खेलों का महत्व शिक्षा से कम नहीं रह गया, सिर्फ जरूरत है रेलवे के अधिकारियों को खेलो के प्रति जागरूक करने की, अमूमन कई बार यह देखा गया है की बहुत सारे रेलवे जोन में खिलाड़ियो और प्रशिक्षको को अपना खेल जारी रखने में बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है | कई रेलवे के अधिकारियों को खेलो का ज्ञान नहीं होता | जो अधिकारी पढ़ लिख कर यू.पी.एस.सी व आईआरटीएस के द्वारा सीधे रेलवे विभाग में आते है उनका खेल और खिलाड़ियो से कोई वास्ता नहीं रहता उन्हें खेलो का बिलकुल भी ज्ञान नहीं होता ऐसे में वे समझने को भी तैयार भी नहीं होते कई अधिकारी तो सिर्फ क्रिकेट को ही स्पोर्ट्स मानते है अगर क्रिकेट का है तो सही है लेकिन अगर किसी और खेल का है तो उनकी समझ से परे है ऐसे अनाड़ी अधिकारियों की वजह से भारतीय रेलवे व खिलाड़ियो को भारी नुकसान झेलना पड़ता है | ऐसे मे रेलवे स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड को चाहिए की वे रेलवे विभाग के उन अधिकारियों को खेलो के प्रति शिक्षित व जागरूक करे |
 
कार्यक्र्म के अंत मे बिश्नोई ने खेल और शिक्षा दोनों के महत्व पर भी प्रकाश डाला | उन्होंने कहा जीवन में खेलों का भी उतना ही महत्व है, जितना शिक्षा का । उन्होंने कहा कि शिक्षा से जहां आपका मानसिक विकास होता है, वहीं खेलों से शारीरिक विकास होता है । यदि शरीर स्वस्थ नहीं होगा तो शिक्षा का कोई मोल नहीं रह जाएगा । कृपाशंकर ने कहा कि आधुनिक समय में लोगों के पास समय की कमी के कारण मनोरंजन का समय कम होता जा रहा है । जिसके कारण शरीर बीमारियों का घर होता जा रहा है । ऐसे में खेल ही ऐसा माध्यम हैं जो मनोरंजन के साथ-साथ शरीर को स्वस्थ रखता है । उन्होंने बताया कि खेलो को पाठ्यक्रम से जोड़ने के लिए मेने भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय एकेडमी प्रबंधन से इस सम्बन्ध में चर्चा की है | दंगल फिल्म के बाद हर कोई कुश्ती करना चाहता है गत वर्ष मेरे द्वारा दी गई सलाह पर इस वर्ष भारतीय रेलवे राष्ट्रीय एकेडमी प्रबंधन अन्तर सर्विस ग्रुप ए प्रोबेशनरी रेलवे अधिकारियों के बीच कुश्ती मैच करावाने के लिए तैयार है । कार्यक्रम में भारतीय रेलवे राष्ट्रीय एकेडमी वडोदरा के डायरेक्टर जनरल श्री प्रदीप कुमार, श्री विनीत कुमार सक्सेना उप महानिदेशक (डीडीजी), श्री सच्चिंदर मोहन शर्मा, सीनियर प्रोफेसर, श्री कृष्णकांत गोयल, सीनियर प्रोफेसर (वित्त और निवेश) उपस्थित थे |

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