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May 29 2020 08:38 AM

मार्शल अर्जन सिंह एक निडर पायलट, 60 तरह के उड़ाए थे विमान

Posted at: Sep 17 , 2017 by Dilersamachar 5287

दिलेर समाचार, भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह हमेशा एक युद्ध नायक के रूप में याद किए जाएंगे, जिन्होंने 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. वह वायु सेना के एकमात्र अधिकारी हैं जिन्होंने मार्शल की सर्वोच्च रैंक हासिल की. ज्ञात हो कि वायु सेना में मार्शल रैंक भारतीय सेना में फील्ड मार्शल रैंक के समकक्ष होता है.

सर्वोच्च रैंक हासिल करने के बाद भी सेवानिवृत्त होने से ठीक पहले तक अर्जन सिंह विमान उड़ाते रहे और कई दशकों के अपने सैन्य जीवन में उन्होंने 60 तरह के विमान उड़ाए, जिनमें द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के तथा बाद में समसामयिक विमानों के साथ-साथ परिवहन विमान भी शामिल हैं.

भारतीय वायु सेना को दुनिया की सर्वाधिक सक्षम वायु सेनाओं में से एक और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में उन्होंने महती भूमिका निभाई.

आईएएफ के पूर्व उप प्रमुख कपिल काक ने कहा, "भारतीय वायु सेना के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है. आईएएफ उनके साथ आगे बढ़ा. वह अद्भुत विवेक वाले सैन्य नेतृत्व के महारथी थे, इसलिए यह आश्चर्यजनक नहीं है कि उन्हें वायु सेना में मार्शल रैंक से सम्मानित किया गया."

अर्जन सिंह को 2002 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर मार्शल रैंक से सम्मानित किया गया था. अर्जन सिंह के अलावा भारतीय सेना के अब तक के इतिहास में सिर्फ सैम मानेकशॉ और केएम करियप्पा को ही फील्ड मार्शल रैंक से सम्मानित किया गया है.

अर्जन सिंह न केवल निडर पायलट थे, बल्कि उन्हें एयर फोर्स की गहरी जानकारी थी. पाकिस्तान के खिलाफ 1965 में हुई लड़ाई में अर्जन सिंह ने भारतीय वायु सेना की कमान संभाली और पाकिस्तानी वायु सेना को जीत हासिल नहीं करने दी, जबकि अमेरिकी सहयोग के कारण पाकिस्तानी वायु सेना बेहतर सुसज्जित थी.

काक ने कहा कि उनका सर्वाधिक यादगार योगदान पाक के खिलाफ युद्ध में रहा. युद्ध में उनकी भूमिका की प्रशंसा करते हुए तत्कालीन रक्षा मंत्री वाईबी चव्हाण ने अर्जन सिंह के लिए कहा था, "एयर मार्शल अर्जन सिंह एक असाधारण व्यक्ति हैं, काफी सक्षम और दृढ़ हैं, काफी सक्षम नेतृत्व देने वाले हैं."

मार्शल अर्जन सिंह ने अराकान अभियान के दौरान 1944 में जापान के खिलाफ एक स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया, इम्फाल अभियान के दौरान हवाई अभियान को अंजाम दिया और बाद में यांगून में अलायड फोर्सेज का काफी सहयोग किया.

उनके इस योगदान के लिए दक्षिण पूर्व एशिया के सुप्रीम अलायड कमांडर ने उन्हें विशिष्ट फ्लाइंग क्रास से सम्मानित किया था और वह इसे प्राप्त करने वाले पहले पायलट थे

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