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Mirza Ghalib’s 220th Birthday Google Doodle: बॉलीवुड से लेकर असल जिंदगी तक में हिट हैं मिर्जा गालिब के ये 10 शेर

Posted at: Dec 27 , 2017 by Dilersamachar 9599

दिलेर समाचार, नई दिल्ली: गूगल ने मशहूर शायर मिर्जा गालिब के 220वीं जयंती पर उन्हें अपना डूडल समर्पित किया है. गूगल ने Mirza Ghalib’s 220th Birthday शीर्षक से अपना डूडल बनाया. उनका असली नाम मिर्जा असद-उल्लाह बेग खान था. उनका जन्म उस दौर में हुआ जब मुगल कमजोर हो चुके थे और अंग्रेजों का पूरे देश पर शासन था. गालिब को मुगल काल का आखिरी महान शायर कहा जाता है. हालांकि बॉलीवुड और टेलीविजन पर उनके ऊपर ज्यादा काम नहीं हुआ है. लेकिन बॉलीवुड में सोहराब मोदी की फिल्म ‘मिर्जा गालिब (1954)’ यादगार थी और टेलीविजन पर गुलजार का बनाया गया टीवी सीरियल ‘मिर्जा गालिब (1988)’ जेहन में रच-बस गया. फिल्म में जहां भारत भूषण ने लीड किरदार को निभाया तो टीवी पर नसीरूद्दीन शाह ने गालिब को छोटे परदे पर जिंदा किया. आइए उनकी फिल्म और सीरियल में आए कुछ ऐसे शेर जो हम रोजाना की जिंदगी में इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन जानते नहीं ये गालिब की ही देन हैः

तुम सलामत रहो हजार बरस
हर बरस के हों दिन पचास हजार
 
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन


हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना



मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता


इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

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