Logo
May 9 2021 09:00 AM

मुस्लिम महिलाओं को भी रिवर्स तलाक का अधिकार

Posted at: Apr 14 , 2021 by Dilersamachar 9429

दिलेर समाचार, कोच्चि. केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने बड़ा फैसला देते हुए अदालत के बाहर मुस्लिम महिला की ओर से पति को दिए जाने वाले एकतरफा तलाक (Talaq) को कानूनन वैध ठहराया है. इस तरह के तलाक को खुला तलाक भी कहते हैं. केरल हाईकोर्ट के जस्टिस ए मुहम्‍मद मुस्‍ताक और जस्टिस सीएस डायस की बेंच ने खुला तलाक को मुस्लिम पुरुषों की ओर से दिए जाने वाले तलाक के बराबर बताया है. इसके साथ ही 1972 के एक फैसले को सुनाया जिसमें मुस्लिम महिला को ऐसे अधिकार न देने की मांग की गई थी.

साल 1972 के एक फैसले में एक एकल पीठ ने बोला था कि अदालत के बाहर एक मुस्लिम महिला अपने पति को तलाक नहीं दे सकती है. जबकि मुस्लिम पुरुषों को इसके जरिए पत्‍नी को तलाक देने की अनुमति है. कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं को तलाक के लिए डिसॉल्‍यूशन ऑफ मुस्लिम मैरिजेज एक्‍ट 1939 (DMMA) के अंतर्गत कोर्ट का रुख करना आवश्यक है.

पीठ ने कई अपील पर विचार करने के बाद कहा कि डीएमएमए केवल फास्‍ख को आधिकारिक करता है. जो कि पत्नी के उदाहरण पर तलाक होता है जिसमें एक अदालत बताए गए कारण की वैधता के आधार पर निर्णय लेती है. अदालत ने कहा कि इसके अतिरिक्त न्यायिक तलाक के अन्य बहुत से तरीके (जैसे तल्ख-ए-तफ़विज़, ख़ुला, और मुबारत) मुस्लिम महिलाओं के लिए उपलब्ध हैं, जैसा कि शरीयत अधिनियम की धारा 2 में बताया गया है.

बता दें कि संविधान और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की मूल भावनाओं को ध्यान में रखते हुए देश के सभी नागरिकों के लिए ‘तलाक के सामान आधार’ रखने का अनुरोध वाली याचिका के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है.

ये भी पढ़े: कोरोना की बढ़ती रफ्तार और लॉकडाउन के डर से प्रवासी मजदूरों का पलायन


Tags:

Related Articles

Popular Posts

Photo Gallery

Images for fb1
fb1

STAY CONNECTED