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February 27 2020 12:19 AM

Nirbhaya Case: तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार से मांगी फांसी की नई तारीख

Posted at: Jan 16 , 2020 by Dilersamachar 5526

दिलेर समाचार, नई दिल्ली: Nirbhaya Case: निर्भया गैंगरेप और मर्डर मामले में तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार को खत लिखकर फांसी की नई तारीख मांगी है. जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार से दया याचिका के निपटारे तक फांसी की तारीख टालने को कहा है. निर्भया केस के दोषी मुकेश की डेथ वारंट को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में आज कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की कि दोषी ने दया याचिका लगाई है और 22 जनवरी में सिर्फ पांच दिन बचे हैं. हो सकता है कि राष्ट्रपति आज या कल में, एक-दो दिन में दया याचिका खारिज कर दें. फिर ये लोग 14 दिनों का समय मांगेंगे. फिर नई तारीख मांगेंगे. ऐसे में फांसी कैसे होगी? तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार को फांसी टालने के लिए पत्र लिखा है. उसने कहा है कि दया याचिका पर निपटारे तक फांसी टाली जाए. पटियाला हाउस कोर्ट ने जेल प्रशासन से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है. मामले में शुक्रवार को आगे सुनवाई होगी.

इससे पहले बुधवार को निर्भया केस के दोषी मुकेश की डेथ वारंट को चुनौती देने वाली याचिका का दिल्ली हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया था. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोषी मुकेश को ट्रायल कोर्ट में जाने को कहा था. दिल्ली सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट को बताया था कि 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड के दोषियों में से एक ने दया याचिका दायर की है, इसलिए दोषियों की फांसी 22 जनवरी को नहीं हो सकती. चारों दोषियों विनय शर्मा, मुकेश सिंह, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता को 22 जनवरी को तिहाड़ जेल में सुबह सात बजे फांसी देना है.

पटियाला कोर्ट में गुरुवार को मुकेश के लिए वकील वृंदा ग्रोवर ने बहस की. वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कोर्ट 22 जनवरी के डेथ वारंट को रद्द करे. हमने जेल प्रशासन के सामने राष्ट्रपति और उप राज्यपाल के पास दया याचिका दाखिल की है. मुकेश की तरफ से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका को दोपहर 2 बजे खारिज किया. हमने 3 बजे दया याचिका दाखिल कर दी थी.

वृंदा ग्रोवर ने कहा कि आपके आदेश में कोई खामी नहीं है. हम आपके आदेश को चुनौती नहीं दे रहे हैं. आपके डेथ वारंट जारी करने के बाद कुछ बदलाव हुआ है. हम यह कह रहे हैं कि राष्ट्रपति के पास दया याचिका लंबित है, इसलिए फिलहाल मौत की सजा नहीं दी जा सकती. सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी यही कहते हैं कि राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने का फैसला के मिलने के बाद कम से कम 14 दिन दिए जाने चाहिए.

मुकेश की तरफ से कहा गया कि पटियाला हाउस कोर्ट का आदेश गलत नहीं था लेकिन उसके बीच जो परिस्थितियों में बदलाव आया है उसके आधार पर डेथ वारंट पर रोक की मांग की है. हमारी दो मुख्य मांगें हैं

पहली डेथ वारंट पर रोक लगाई जाए और दूसरी डेथ वारंट को रद्द किया जाए.

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