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September 30 2020 07:13 AM

कोई खाता कांच, कोई पत्थर तो कोई नट बोल्ट, कोई पीता रसोई गैस तो कोई सांप और छिपकली का जूस

Posted at: Nov 16 , 2017 by Dilersamachar 9585

दिलेर समाचार, यह दुनियां रंग-रंगीली है। इसमें खाने-पीने के लिए कुदरत ने बहुत से फल-सब्जी-दाल, अनाज, मसाले, और इनसे आदमी ने बहुत से व्यंजन बनाये हैं। फिर भी संसार में कुछ ऐसे लोग हैं जो इन खाद्य पदार्थों की जगह अखाद्य पदार्थों को अपना आहार बनाते हैं। भयानक जीवों का जूस निकालकर पीते हैं। इस सबके बावजूद ये सामान्य जीवन भी जीते हैं। हम यहां ऐसे ही कुछ लोगों की चर्चा कर रहे हैं।

नट बोल्ट खाता है सुरिन्दर। जी हाँ, अमृतसर का सुरिन्दर लोहे की बनी चीजें ऐसे खा लेता है जैसे कोई बहुत अच्छी डिश खा रहा हो। होटल चलाने वाला सुरिन्दर और लोगों के लिए तो स्वादिष्ट व्यंजन बनाता-बनवाता है किन्तु 2001 से उसे लोहे की चीजें खाने की आदत पड़ गयी है। 24 घंटे में वह एक बार लोहे का स्वाद जरूर चखता है। जिप के लॉक, नट व लोहे के कुछ सिक्के खा जाना तो उसके लिए सामान्य बात है। सुरिन्दर का कहना है कि एक दिन वह स्कूटर को खाकर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराना चाहता है।

कोलकाता की पंपा घोष की भी ऐसी ही आदत है किन्तु वह सुरिन्दर से भी एक हाथ आगे है। लोहे के अलावा शीशे-कांच व पत्थर के टुकड़े भी खा सकती हैं। जब उसने सामान्य खानपान में अरूचि दिखाई तो पंपा की मां व पिता डॉक्टर के पास ले गये। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउण्ड किया तो उसके पेट में शीशे-लोहे, पत्थर व लकड़ी के टुकड़े दिखायी पड़े। पंपा का स्वास्थ्य सामान्य था फिर भी चिकित्सक ने उसे ये वस्तुएं न खाने की चेतावनी दी।

साकीव (विदेश) की 3 साल की बच्ची कांप्तुएस्कर संथात पत्थर खाती है। उसकी जांच करने वाले डॉक्टर ने उसे पाइका रोग का मरीज बताया। डॉ. सुटार्न यात्राकुल के मुताबिक इस बीमारी के शिकार वे बच्चे होते हैं जिनके मां-बाप उनका ध्यान नहीं रखते।

चीन की बीजिंग निवासी एक महिला तो पिछले 20 वर्षों से पत्थर खा रही है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक इस 44 वर्षीया महिला को केक से भी ज्यादा आनन्द पत्थर खाने में आता है। चाइना मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक डॉक्टर के अनुसार महिला पूर्ण स्वस्थ है। उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि गर्भावस्था में पत्थर खाने के बावजूद उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है।

थाईलैण्ड निवासी वेक श्रीखाईमूक जिन्दा तिलचट्टों व कानखजूरों को ऐसे खा जाता है मानों चिप्स या नूडल्स खा रहा हो। गत वर्ष वहां के एक टी. वी. चैनल पर भी उसका लाइव शो दिखाया गया। क्रॉक्रोच खाने की आदत के चलते उसे अब ’वेक काक्रोच‘ के नाम से पुकारा जाता है। वेक का कहना है कि इस तरह के खानपान से उसके स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं हुआ है।

अब एक ऐसी बकरी की बात जो कांच खाकर भी सामान्य है। रोह (बिहार) के कुंजैला ग्रामवासी प्रसादी महतो की बकरी घास-पात ही नहीं, कांच भी खा जाती है। मार्च 2004 में महतो ने इस बात पर ध्यान दिया था कि बकरी कांच को सहज रूप से खा रही है। उन्हें अचम्भा और चिंता हुई किंतु बकरी को सामान्य जीवन जीते देख उनकी चिंता दूर हो गयी है। बकरी अब भी कांच, मजे से चट कर जाती है।

झारखण्ड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियां चींटी की चटनी व दाल बड़े स्वाद लेकर खाते हैं। कुरकुट के नाम से पुकारी जाने वाली इन चीटियों के वे विभिन्न व्यंजन बनाकर खाना पसंद करते हैं।

मध्य प्रदेश सीहोर जनपद के गांव मैना का कैलाश तो छिपकली का जूस पीने के लिए बहुचर्चित हो चुका है। अब चालीस की उम्र पार चुका कैलाश 8 साल की उम्र से छिपकली व अन्य कीड़े मकोड़ों का जूस पी रहा है। उसका जीवन-स्वास्थ्य सामान्य है और उसके पांच बच्चे भी हैं। कैलाश जहर को चूस कर, सांप-बिच्छू व छिपकली के कांटे हुए व्यक्ति का जहर उतार देता है। उसे रोजाना कम से कम छह-आठ छिपकली का जूस जरूर चाहिए। उसका कहना है कि एक महात्मा ने उसे कोई जड़ी-बूटी पिलाकर आशीर्वाद दिया था कि उस पर जहर का असर नहीं होगा। कैलाश स्वस्थ है और मजदूरी करके अपना परिवार पालता है।

सीतामढ़ी हीरापुर नगत पट्टी (भदोही) उत्तर प्रदेश का छोटे लाल बिन्द सांपों का जहर ऐसे पी लेता है जैसे चाय या कोका कोला पी रहा हो। वह सांप के काटे किसी भी आदमी का जहर चीरा लगाकर चूसता ही नहीं, पी जाता है। अब तक लगभग 300 सांपों और हजारों छिपकलियों का जहर वह पी चुका है। गांजा पीने वाले छोटे लाल को 1991 में सांप ने काटा तो वह तीन दिन बेहोश रहा। फिर होश में आने पर उसने नशे के लिए सांप का जहर पीना शुरू कर दिया। कोबरा सांप का जहर उसे ज्यादा पसंद है। सांप से कटवाना उनकी दिनचर्या में शामिल है। अब उसने अपने बेटे को भी जहर पिलाना शुरू कर दिया है। विकेश (छह वर्ष) को वह अपने जैसा ही जहरीला बनाना चाहता है ताकि वह भी सांप के काटे लोगों का जहर चूसकर उन्हें जीवन दान दे सके।

उ. प्र. के ही एक जनपद में जैथरा क्षेत्रा के गांव घुमरी का पप्पू नाथ नशे की लत के चलते अपनी जीभ सांप से कटवाता है। वह इतना जहरीला हो चुका है कि उसे काटने के बाद कोबरा सांप तक बेहोश हो जाता है।

राजस्थान के मूल निवासी अब महाराष्ट्र में रहने वाले मनमाडवासी प्रवीन शर्मा (26 वर्ष) को रसोई गैस पीने के लिए न मिले तो वह बैचेनी, महसूस करने लगता है। गैस मैकेनिक होने की वजह से प्रवीन को गैस पीने का शौक एक गंभीर हादसा टालने के बाद हुआ। 1999 मे एक होस्टल में सिलिडरों की फिटिंग के दौरान अचानक 3 सिलेन्डर रिसने लगे। छात्रों की जान बचाने के लिए उन्होंने रेग्यूलेटर बन्द करके हाईप्रेशर पाइप अपने मुंह में डाल लिया। इसके बाद क्या हुआ, पता नहीं। हां, जब उनकी बेहोशी टूटी तो कुकिंग गैस उनकी खुराक बन चुकी थी। अब सुबह-शाम लगभग 4 किलो गैस पीना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। इसके कारण उनकी सामान्य भूख समाप्त हो गयी है। वे गैस पीने के बाद जलती हुई सिगड़ी अपने पूरे शरीर पर घुमाते हैं। उनका लक्ष्य है कि इस काम के लिए उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज हो। इस कला का प्रदर्शन वह महाराष्ट्र, कोलकाता, विशाखाट्टनम और हैदराबाद आदि स्थानों पर कर चुके हैं। 

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