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January 21 2020 03:02 AM

सजने-संवरने पर इसलिए करते हैं लोग आप पर टोकाटाकी

Posted at: Apr 13 , 2019 by Dilersamachar 12455
दिलेर समाचार, शिखा चौधरी। प्रियंका के बाल बहुत लंबे हैं। उनकी देखभाल में उसका काफी वक्त लग जाता है। इस कारण उसकी पढ़ाई भी डिस्टर्ब हो जाती है। उसने अपने लंबे बालों को कटवा कर ब्लंटकट करवाने का जिक्र जैसे ही घर में किया, उसके पिता ने उसे साफ मना कर दिया कि वह फैशन-वैशन के चक्कर में न पड़े और चुपचाप पढ़ाई पर ध्यान दे लेकिन प्रियंका को कोई नहीं समझ पाया कि वह बालों की वजह से कितनी परेशान है।

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रीना को उसकी सहेली ने उसके जन्मदिन पर लंबे-लंबे इयरिंग गिफ्ट में दिये। रीना ने उन्हें अगले दिन पहन भी लिए लेकिन उसके बड़े भाई ने उसे टोक दिया कि यह सब उसे नहीं भाता। जब तक वह इस घर में है, ढंग से रहे। शादी के बाद जो चाहे करे।

शादी के बाद भी आजादी हो, ऐसा जरूरी नहीं। रंजना ने शादी के पूर्व के शौक शादी के बाद पूरे करने की सोची थी। उसने सोचा था कि शादी के बाद वह अपनी पसंद की पोशाकें पहन सकेगी लेकिन उसके पति को साड़ी के अलावा कुछ पसंद नहीं। उसने रंजना को अन्य नये शौक पालने से मना कर दिया।

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देखा जाये तो घर-घर की यही कहानी है। आज भी मध्यमवर्गीय परिवारों में लड़कियों पर पुरूषों द्वारा पाबन्दियां लगाई जाती हैं। मायके में पिता, भाई और शादी होने के बाद ससुराल में पति जैसा चाहे, उन्हें वैसे ही जीना पड़ता है। हालांकि जमाने के बदलते तेवर देखकर घर का पुरूष यह नहीं चाहता कि कोई भी उनके घर की स्त्राी के बारे में कुछ भी कहे, इसलिए वे अपने घर की लड़कियों के सजने-संवरने, स्टाइलिश कपड़ों, मेकअप आदि पर पाबंदियां लगाते हैं। उन्हें डर है कि इससे गलत लोग उनके पीछे पड़ जायेंगे। जमाने की इस हवा से उन्हें बचाने के लिए वे उन पर पाबंदियां लगा देते हैं।

सामाजिक दृष्टिकोण से ये पाबंदियां उचित भी होती हैं। यदि लड़कियों पर पाबंदियां नहीं लगाई जायें तो फिर कौन कहेगा कि घर की इज्जत सिर्फ लड़कियों से ही होती है।  लड़कियां सज-संवर कर घर से बाहर निकलेगीं तो आस-पड़ोस में बातें बननी शुरू हो जायेंगी और सड़क छाप लड़के भी उनके पीछे लग जायंेगे। ऐसी नौबत न आने पाये, इसलिए घरवाले उन पर अंकुश लगाते हैं लेकिन लड़कियां क्या करें? अपने शौक को मन में ही मारकर भी नहीं जी सकती। जरूरी है कोई बीच का रास्ता निकाल लिया जाये जिससे शौक भी पूरा हो जाये और लोगों की नजरों में भी न आयंे।

अपने सामान्य शौक से पहले अपने घर के सदस्यों को परिचित करायें। उनसे भी बीच का रास्ता निकालने की सलाह लें। उनके बात भी सुनें। उसमें क्या अच्छा है? यह समझने की कोशिश भी करें। चोरी-छिपे अपने शौक पूरे न करें। यह जान लें कि समाज में तेजी से आ रहे बदलाव से बचाने के लिए आप पर ये पाबंदियां लगाई जा रही हैं। इनका विरोध करना भी उचित नहीं क्योंकि अत्यधिक सजने-संवरने वाली लड़कियों की शादियाँ भी मुश्किल से ही होती हैं। समाज भी उन्हें सही नजर से नहीं देखता।

कुछ परिवारों में पुरूष लड़कियों पर अधिक रोक-टोक करते हैं। ऐसा उनकी संकीर्ण मानसिकता के कारण होता है। जैसा वे बचपन से अपने परिवार में लड़कियों पर रोक-टोक देखते हैं वैसे ही वे भी अपनी पत्नी बेटी, बहू पर टोकाटाकी करने लगते हैं। कोई परेशानी आगे न खड़ी हो, इसके लिए वे अपने घर की लड़कियों पर ही अपना रौब दिखाते हैं।

इन पाबंदियों से लड़कियों को अपने मन में परेशानी इकटठी नहीं करनी चाहिए बल्कि पूरे प्रकरण को समझकर स्वीकार करने की कोशिश करनी चाहिए। इसी में उनकी व उसके परिवार और समाज की भलाई होगी।


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