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September 27 2020 11:57 AM

'सराहा' एप का बड़ता पागलपन,लोगों ने निकाली अपनी भड़ास

Posted at: Aug 22 , 2017 by Dilersamachar 9326

दिलेर समाचार,इंटरनेट पर इन दिनों लोगों के बीच 'सराहा' एप का खुमार छाया हुआ है। ये भी कुछ ऐसा ही है जैसे किसी ने चेहरे पर नकाब डाल लिया हो। एप की मदद से कोई अपने प्यार का इजहार कर रहा है तो कोई अपने दिल की भड़ास निकाल रहा है। यदि आप भी फेसबुक यूजर हैं तो 'सराहा' के फीवर से आप भी अछूते नहीं रहे होंगे। 

खैर, 'सराहा' एप पर आशिकों की तो जैसे झड़ी सी लग गई है। इतना ही नहीं कई लड़कियों को ऐसे मैसेजेस भी आ रहे हैं जिसकी कल्पना कर पाना मुश्किल है। 'सराहा' को बनाने वाले वेब डेवलपर 29 वर्षीय जेन अल-अबीदीन तौफीक सऊदी अरब के रहने वाले हैं। इस एप को बनाने के पीछे उनका मकसद था कि लोग ईमानदारी से अपनी बात कह सकें। यही कारण था कि एप का नाम 'सराहा' रखा गया जो कि एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है 'ईमानदारी'। लेकिन यहाँ तो कुछ और ही हो रहा है।

इस मैसेज को देखने के बाद आप क्या कहेंगे। 'सराहा' पर ऐसे मैसेजेस की कमी नहीं है। कई लोगों ने तो अपना नम्बर तक दे दिया।

ये देखिये, इन भाईसाहब ने प्रपोज भी किया। साथ ही साथ नम्बर भी दे दिया। इनकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। पिटाई से भी नहीं डरे।

ये मोहतरमा पहले से कमिटेड हैं, लेकिन फिर भी अपने दिल का हाल बताने से नहीं चूकी।

लो भला इतनी भी क्या नफरत। सीधे नर्क में ही भेज दिया। वजह भी बता देते कि आखिर क्यों नर्क में जाएगी ये लड़की।

गाड़ी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है तो फिर घर पर रिश्ता क्यों नहीं भेज देते मेरे दोस्त। Well Settled लगते हो। मना थोड़ी करेगी। हा..हा..हा।

लो भला जब तक पता नहीं चलेगा कि शादी के लिए किसने प्रपोज किया है, तो भला इंसान जवाब कैसे देगा।

जब पता ही नहीं होगा कि मिलना किससे है तो क्या ख़ाक मिलेंगे तुमसे। हा..हा..हा।

ये बात तो एकदम सही फरमाए हैं। लेकिन इस बात को छिपकर कहने की क्या जरूरत थी। भाईसाहब, डायरेक्ट भी पोस्ट कर देते तो कोई बात नहीं थी।

वक्त के सितम करने से कौन खूबसूरत होता है भला। हाँ, लेकिन डायलॉग अच्छा है। हा..हा..हा।

इसे कहते हैं ईमानदारी से अपनी बात रख देना। कितनी साफगोई से इन्होंने अपने दोस्त की तारीफ कर दी।

आपको ये मैसेज गुमनामी में लिखने की कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन बात तो इन भाईसाहब ने खूब कही है। 

भाईसाहब वो तो अच्छा हुआ कि आपकी 'identity' सामने न आई, वरना भैया बुरा मान जाते तो और गजब हो जाता।

कोई नहीं भाईसाहब 'Better luck next time'.
तो ये थे 'सराहा' के कुछ गुमनाम मैसेजेस। इस एप को लेकर आप क्या सोचते हैं? हमें कमेंट्स के जरिए जरूर बताएं।

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