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April 5 2020 03:11 AM

छात्रवृत्ति घोटाला : फर्जी खाते से निकाल लिए, 45 छात्रों के 62 लाख रुपए

Posted at: Mar 1 , 2018 by Dilersamachar 5592

दिलेर समाचार, ग्वालियर। न कॉलेज में एडमिशन लिया और न ही छात्रवृत्ति के लिए बैंक में खाता खुलवाया। फिर भी 45 छात्रों का एडमिशन दिखाकर बैंक में फर्जी खाते खुलवाकर 62 लाख रुपए की छात्रवृत्ति माफिया निकाल ले गए। घटना वर्ष 2014-15 सत्र की है। छात्रों का पुरानी छावनी स्थित प्रखर कॉलेज ऑफ नर्सिंग में एडमिशन दिखाकर कनार्टका बैंक से खाते सिटी सेंटर बैंक ऑफ इंडिया में ट्रांसफर कराए।

फर्जी दस्तावेजों से खुले खातों से 62 लाख रुपए की छात्रवृत्ति की राशि निकाल ली। पिछले वर्ष एजेके थाने में पहुंची कुसुम नामक छात्रा ने इस मामले की शिकायत की, जिसके बाद एजेके पुलिस ने बुधवार को पूरे मामले का खुलासा किया है।

एजेके पुलिस ने तत्कालीन सीनियर बैंक मैनेजर बीओआई राधेश्याम गुप्ता व आदिमजाति कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर रवि माहौर को गिरफ्तार कर एक दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है।

एजेके एसपी वीरेन्द्र जैन, थाना प्रभारी मुनीष रजौरिया ने बताया कि 27 अप्रैल 2017 को एजेके थाने में आकर मुरैना निवासी नर्सिंग की छात्रा कुसुम जाटव ने शिकायत की थी। छात्रा ने शिकायत करते हुए बताया था कि वह मुरैना के जयमाता कॉलेज ऑफ नर्सिंग की छात्रा है।

उसने वहां छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। तब उसे पता लगा कि उसके नाम से छात्रवृत्ति निकल गई है। जिस पर छात्रा ने पता किया तो सामने आया कि ग्वालियर के पुरानी छावनी स्थित प्रखर कॉलेज ऑफ नर्सिंग में सत्र 2014-15 में उसे वहां नर्सिंग की छात्रा दिखाकर छात्रवृत्ति ली गई है। जिस पर वह एजेके थाने पहुंची और शिकायत की। साथ ही सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए एजेके पुलिस ने छानबीन शुरू की।

दो गिरफ्तार, कई अधिकारियों से जुड़ेंगे तार

छात्रवृत्ति घोटाला किसी कम्प्यूटर ऑपरेटर व अकाउंटेंट का खेल नहीं है। इसमें बैंक प्रबंधन, आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत है। इन सभी मिलीभगत से माफिया फर्जी दस्तावेज, फर्जी पहचान पत्रों के माध्यम से पिछले कई सालों से खेल करते आ रहे हैं। अभी इसमें बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन सीनियर मैनेजर राधेश्याम गुप्ता (अब रिटायर्ड है) और आदिमजाति कल्याण विभाग कम्प्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया है। अकाउंटेंट की तलाश है। साथ ही कई अफसरों के नाम पर जांच चल रही है।

10 करोड़ हर साल आते हैं, ऐसे कई घोटाले

एजेके एसपी वीरेन्द्र जैन ने बताया कि हर साल छात्रवृत्ति के 10 करोड़ रुपए आते हैं। यह तो सिर्फ एक पत्र पर 45 छात्रों के नाम पर की गई धोखाधड़ी है। ऐसे कई घोटाले हो सकते हैं। जिनका खुलासा आगामी समय में जांच में आ सकता है। सिर्फ फरियादी की जरूरत है।

जिन मोबाइल पर आए पासवर्ड वह बंद, लोकेशन शहडोल

कुछ समय पहले तक एक छात्र एक ही जगह दाखिला लेकर छात्रवृत्ति का फायदा ले सके इसके लिए समग्र आईडी और पासवर्ड सेवा शुरू की थी। इन 45 छात्रों के पासवर्ड जिसमें उसकी पूरी डिटेल होती है। वह दो मोबाइल नंबर पर मंगाए गए थे। यह मोबाइल नंबर अब बंद आ रहे हैं। यह नंबर की सिम शहडोल से खरीदी गई थी और आखिरी लोकेशन भी वहीं की है।

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