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December 7 2022 01:39 AM

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पत्नी को रखने के लिए कोर्ट पति को नहीं कर सकता मजबूर

Posted at: Nov 27 , 2017 by Dilersamachar 9544

दिलेर समाचार, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतें पत्नी को रखने के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकती हैं। कोर्ट ने पेशे से पायलट एक व्यक्ति को अलग रह रही पत्नी और बेटे की परवरिश के लिए 10 लाख रुपए बतौर अंतरिम गुजारा भत्ता जमा कराने को कहा है।

शीर्ष अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के उस जमानत आदेश को बहाल कर दिया, जिसे पति द्वारा सुलह समझौता मानने से इनकार करने के कारण रद्द कर दिया गया था।जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा- "हम एक पति को पत्नी को रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। यह मानवीय रिश्ता है। आप निचली अदालत में 10 लाख रुपए जमा कराएं, जिसे पत्नी अपनी फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए बिना शर्त निकाल पाएगी।"

जब पति के वकील ने कहा कि राशि को कम किया जाए तो पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिवार अदालत नहीं है और इस पर कोई बातचीत नहीं हो सकती है।पीठ ने कहा- "अगर आप तुरंत 10 लाख रुपए जमा कराने के लिए राजी हैं तो जमानत आदेश को बहाल किया जा सकता है।" इसके बाद वकील 10 लाख रुपए जमा कराने के लिए राजी हो गया, लेकिन उसके लिए थोड़े वक्त की मांग की।

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