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नोटा के विकल्प पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया चुनाव आयोग को आड़े हाथ

Posted at: Jul 31 , 2018 by Dilersamachar 9616

दिलेर समाचार, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्यसभा चुनावों के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा नोटा पर जारी अधिसूचना को सवालों के घेरे में खड़ा किया। कोर्ट ने कहा कि मतपत्र में दी गई यह व्यवस्था बताती है कि एक प्रत्यक्ष चुनाव में व्यक्तिगत वोटर हिस्सा ले रहे थे। बता दें कि कोर्ट ने यह टिप्पणी पिछले साल हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप रहे शैलेश मनुभाई परमार द्वारा दायर अर्जी पर की। उन्होंने आयोग द्वारा बैलेट पेपर में नोटा की अधिसूचना को चुनौती दी थी। इस चुनाव में कांग्रेस के अहमद पटेल प्रत्याशी थे।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्राजस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने मामले में निर्णय सुरक्षित रखते हुए कहा कि यदि ऐसे चुनाव में विधायक वोट नहीं देता है तो उसे पार्टी से निष्कासित किया जा सकता हैलेकिन नोटा का विकल्प देकर आपने वोट नहीं देने की प्रक्रिया को आपने वैध बना दिया।

राज्यसभा और एमएलसी के चुनावों में खुली मतदान प्रक्रिया को अपनाने के पीछे क्रास वोटिंग को रोकना था। कोर्ट का कहना था ऐसे चुनावों में विधायक किसे वोट देते हैं या नहींयह सदन के सदस्य पर निर्भर करता है। आयोग इस संबंध में नोटा जैसे प्रावधान लागू नहीं कर सकता है। अटार्नी जनरल ने भी राज्यसभा और एमएलसी चुनावों में चुनाव आयोग के नोटा के प्रावधानों को नहीं अपनाने पर जोर दिया।

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