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December 6 2022 02:26 AM

राजयोग का असर कुंडली में इस योग के कारण खत्म हो जाता है

Posted at: Sep 5 , 2017 by Dilersamachar 9589

दिलेर समाचार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में विष योग है और राजयोग भी है तो विष योग की वजह से उचित फल नहीं मिलता है। विष योग के कारण व्यक्ति सफलता तक पहुंच कर पीछे आ जाता है। यहां जानिए विष योग से जुड़ी खास बातें...कुंडली में जब चंद्र और शनि का योग बनता है तो उसे विष योग कहते हैं। ज्योतिष में चंद्र मन का और शनि उदासी का कारक है। इन दोनों का योग व्यक्ति को मानसिक रूप से उदास रखता है।चंद्र को पानी माना गया है तो शनि को जहर। ऐसे में ये योग पानी में जहर के समान हो जाता हैचंद्र को धन और शनि को खजांची माना गया है। इस योग में यदि व्यक्ति के पास पैसा होगा भी तो उसे अपने उपयोग में नहीं ले पाता है। इस योग की वजह से अपार धन होने के बाद भी व्यक्ति कंगाल हो सकता है।

पहले भाव में चंद्र-शनि का योग हो तो व्यक्ति को हमेशा अशुभ फल ही मिलता है।

दूसरे भाव में चंद्र-शनि का योग होने से कभी-कभी व्यक्ति को शुभ फल भी मिलता है।

तीसरे भाव में ये योग होने से घर में चोरी होने के योग बन सकते हैं। ऐसे में केतु का विशेष उपाय करना चाहिए।

चोथे भाव में ये योग शुभ फल देता है।

पंचम भाव में विष योग होने पर संतान के लिए शुभ नहीं होता है।

षष्ठम भाव में चंद्र-शनि एक साथ होते हैं तो रिश्तेदारी की वजह से धन हानि हो सकती है।

सप्तम भाव में ये योग हो तो व्यक्ति को आंखों से संबंधित कोई बीमारी हो सकती है।

अष्टम भाव में विष योग होने पर व्यक्ति को सांप से सावधान रहना चाहिए।

नवम भाव में ये योग होने से व्यक्ति को शुभ-अशुभ दोनों तरह के फल मिलते हैं।

दशम या एकादश भाव में विष योग अशुभ फल देता है। यदि व्यक्ति धनी घर में पैदा होता है और उसकी कुंडली के दशम या एकादश भाव में विष योग है तो उसे भी पैसों की कमी का सामना करना पड़ता है।

द्वादश भाव में विष योग होने पर व्यक्ति धन के मामले में लालची नहीं होता है।

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