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August 7 2020 03:38 PM

इन जीवों की उम्र होती है एक करोड़ साल से भी ज्यादा

Posted at: Aug 2 , 2020 by Dilersamachar 5170

दिलेर समाचार, पृथ्वी पर किसी जीव (Organisms) की सबसे लंबी उम्र (Age) कितनी हो सकती है. 500 साल या फिर उससे भी ज्यादा. लेकिन तब आप क्या कहेंगे जब आपको कुछ जीवों की उम्र एक करोड़ साल (100 Million Years) की बताई जाए. जी हां, ताजा शोध में पाया गया है कि गहरे समुद्र के तल में सूक्ष्मजीव (Microorganisms) एक करोड़ साल से मौजूद थे. इतना ही नहीं जब शोधकर्ताओं ने उन्हें अनुकूल वातावरण दिया तो ये तेजी से पनपने भी लगे.

 एक करोड़ साल से सोए हुए थे

एक अप्रत्याशित उपलब्धि में वैज्ञानिकों ने उन सूक्ष्मजीवों ने जान डालने का काम किया है जो पिछले एक करोड़ सालों से सुसुप्त (Dormant) अवस्था में थे. ये सरलतम जीव दक्षिण प्रशांत महासागर (South Pacific Ocean) के समुद्रतल के अवसादों में मिले थे. इन अवसादों में पोषण तो कम है, लेकिन इनमें ऑक्सीजन की मात्रा उनके लिए पर्याप्त थी. 

पहले लगा कि गलती हो गई

यह शोध मैराइन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की जापानी एजेंसी के शोधकर्ताओं ने की है और इसे नेचर कम्यूनिकेशन्स जर्नल में प्रकाशित किया गया है. इस शोध के प्रमुख लेखक युकी मोरोनो ने जानकारी देते हुए बताया कि जब उन्हें सूक्ष्मजीव मिले तो पहले उन्हें लगा कि शायद किसी गलती से या फिर प्रयोग की असफलता की वजह से ऐसा लग रहा है. उन्होंने कहा, “अब हम जानते हैं कि समुद्रतल के जैवमंडल (Biosphere) में जीवों की उम्र की कोई सीमा नहीं है.”

 कहां से जमा किए नमूने

वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासगर की घूमती हुई साउथ पैसिफिक जायरे धाराओं के सिस्टम के 12,140 से 18700 फीट नीचे समुद्रतल से अवसाद के नमूनों का विश्लेषण किया. यह उस इलाके का केंद्र है जो धरती से सबसे दूर है और जहां पूरे महासागर में सबसे कम जीवन पाया जाता है.

यह जानने का था इरादा

शोधकर्ता जानना चाहते थे कि क्या इतने खराब पोषण वाले वातावरण में जीवन का अस्तित्व हो सकता है. लैब में शोधकर्ता लंबे समय से सोए हुए एक कोशिका वाले जीवों को ‘जगाने’ में सफल हो सके. यह जांचने के लिए कि क्या वे जीव अब भी पनपने की स्थिति में हैं, उन्होंने इन नमूनों में कार्बन और नाइट्रोजन के सब्सट्रोट दिए. 68 दिन के बाद करीब 7000 कोशिकाएं नए हालातों में प्रतिक्रियाएं देने लगीं और उनकी मात्रा चार गुना बढ़ गई.

पहली बार पता चला ऐसा

इससे पहले हुए प्रयोगों में यह दर्शाया जा चुका है कि कैसे कुछ बैक्टीरिया मुश्किल हालातों में जीवित बचे रह सकते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन बताता है कि पृथ्वी के कुछ सरलतम जीनों के लिए जीवनकाल की कोई धारणा नहीं है.

 बैक्टीरिया ही इतने पुराने जीव हैं

कोसमोस की रिपोर्ट के अनुसार रोड आईलैंड यूनिवर्सिटी के ओसियोनोग्राफर स्टीवन डि होंड्ट का कहना है कि यह खोज सूक्ष्मजीवों के संसार की हमारी समझ का उल्लंखन करती दिख रही है. बैक्टीरिया सूक्ष्मजीवों के वे प्राणी है  जो पिछले 1.015 करोड़ साल से पृथ्वी पर जीवित रह पाए हैं.

इनकी संख्या भी कम हुई समय के साथ

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि जब ये सूक्ष्मजीव इन अवसादों में दबे होंगे उस समय एक क्यूबिक सेंटीमीटर में करीब दस लाख कोशिकाएं होंगी. लेकिन अब बहुत मुश्किल हालातों में एक क्यूबिक सेंटीमीटर में केवल एक हजार कोशिकाएं ही बची हैं.

डिहोंट का कहना है कि ये सूक्ष्मजीव बच कैसे गए यह एक रहस्य है. ये किसी तरह से बहुत ही ज्यादा लंबे समय तक बचे रहे हैं और कम ऊर्जा से प्रजनन भी कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस खोज से जाहिर होता है कि यह भी मुमकिन है कि अन्य मुश्किल हालातों जैसे की शनि और गुरू ग्रहों के चंद्रमाओं के महासागरों की सतह के नीचे भी जीवन हो सकता है.

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