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July 4 2020 02:03 AM

तमाम रोगों की दवा है मशरूम

Posted at: Feb 24 , 2018 by Dilersamachar 5422

कामता नाथ तिवारी

 दिलेर समाचार, बरसात के मौसम में चरागाहों, खेतों व खलिहानों सहित खाद के ढेर एवं नम मिट्टी वाले स्थानों में जहां कार्बनिक पदार्थों की अधिकता हो, मशरूम उगा हुआ पाया जाता है। छत्राक के समान छोटे-छोटे छत्ते के रूप में ये उगे हुए पाये जाते हैं जिन्हें साधारण बोलचाल की भाषा में छत्राक, कुकुरमुत्ता या मशरूम कहा जाता है।

इनकी अनेक प्रजातियां हैं जिनमें कुछ खाद्य पदार्थों के रूप में उपयोग में लायी जाती हैं। अब तो खाद्य समस्या से राहत पाने के लिए कवक विज्ञानियों (माइकोलॉजिस्ट) द्वारा इनकी विभिन्न प्रजातियों की भारी मात्रा में उत्पादन के लिए आधुनिक विधि विकसित कर ली गई है जिससे इसका व्यवसायिक उत्पादन किया जाता है।

मशरूम में रोग निरोधक शक्ति की अपूर्व क्षमता विद्यमान है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइडेªट, नाइट्रोजन, फास्फोरिक अम्ल इत्यादि जैसे आवश्यक तत्व पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मनुष्य में रोग निरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

कुकुरमुत्ता के नियमित सेवन से दमा एवं मधुमेह जैसी असाध्य बीमारियों से मुक्ति मिलती है वरन रक्ताल्पता या अनीमिया से पीडि़त रोगी भी काफी लाभान्वित होकर इससे राहत महसूस करते हैं।

कुकुरमुत्ते में लौह की प्रचुर मात्रा रहती है जो रक्ताल्पता की शिकायत को दूर करती है। संभवतः इस बीमारी से पीडि़त रोगों को चिकित्सक लौहयुक्त गोलियों का सेवन करने की सलाह देते हैं परन्तु एक सम्पूर्ण आहार के रूप में कुकुरमुत्ते का सेवन किया जाये तो इस रोग से छुटकारा आसानीपूर्वक पाया जा सकता है।

कुकुरमुत्ते में कार्बोहाइडेªट की उपस्थिति काफी कम होती है। इससे डाइटिंग करने वाले लोगों के लिए यह सर्वोत्तम आहार माना जाता है। इससे विटामिन ’डी‘ की कमी से होने वाले बेरी-बेरी रोग, त्वचा संबंधी चर्म रोग, पोलियूरिया इत्यादि ठीक हो जाते हैं।

अब कुकुरमुत्ते का महत्त्व इतना बढ़ता जा रहा है कि इससे पौष्टिकता की भरमार का शायद दूसरा कोई स्रोत ही नहीं है। इस पर नित्य नये शोध कार्य चल रहे हैं। 

ये भी पढ़े: होली के रंग और त्वचा की सुरक्षा


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