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December 6 2020 04:10 AM

ठंड की अधिकता की अपनी मुसीबतें भी हैं। यह सेहत बनाने का सेहतमंद मौसम

Posted at: Dec 16 , 2017 by Dilersamachar 9725

 दिलेर समाचार, सीतेश कुमार द्विवेद: ठंड में दिन में गुनगुनी धूप का आनंद अपने आप में अनूठा होता है और रात को रजाई, कंबल ओढ़ कर सोना सबको सुहाता है। ठंड की बड़ी रातें इसको और बढ़ा देती हैं। इस मौसम में डटकर खाना और पिकनिक मनाना भी सबको भाता है। ठंड की अधिकता की अपनी मुसीबतें भी हैं। यह सेहत बनाने का सेहतमंद मौसम है किन्तु लापरवाही मुसीबत में डाल सकती है।

इस मौसम में सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, जोड़ों में दर्द आदि आम बातें हैं। लापरवाही बरतने पर बच्चे, बड़े एवं बूढ़ों तक को इस मौसम की परेशानी उठानी पड़ती है।

ठंड के मौसम में तापमान गिरता जाता है और नसें सिकुड़ने लगती है। हम अपनी शारीरिक गतिविधियां भी ऐसे में कम कर देते हैं जिससे पसीना बहना रूक जाता है। पानी भी ठंडा हो जाता है। इस सबसे रक्तचाप बढ़ता जाता है और हृदयाघात का खतरा बढ़ जाता है।

उच्च रक्तचाप एवं हृदयरोगी इस मौसम में विशेष सावधानी बरतें। ठंडे पानी के स्थान पर हल्के गर्म पानी में नहाएं। थोड़ा श्रम, व्यायाम भी करें। कुछ पसीना बहाएं। नमक, शक्कर, तेल, घी की अधिकता वाली वस्तुओं का अत्यन्त कम सेवन करें।

ठण्ड के मौसम में तापमान में गिरावट होने पर श्वांस नलियां सिकुड़ जाती हैं। ऐसे में सुबह या शाम बाहर निकलने पर अथवा घर में ही अस्थमा का दौरा पड़ने लगता है। ऐसे मरीज बिना गर्म कपड़े पहने घर से बाहर न जाएं। गर्म भोजन कम मात्रा में करें। दवा का सेवन समय पर जरूर करें। बाहर धुंध में बिलकुल न जाएं। हल्का फुल्का व्यायाम, प्राणायाम करें। शरीर को सक्रिय व श्वांस नली को दुरूस्त रखें।

ठंड में हमारे खाने-पीने एवं पचाने की क्षमता बढ़ जाती है। अतएव हम डटकर खाने लगते हैं। ऐसे में शुगर बढ़ जाती है। शुगर मरीज सावधानी बरतते हुए सीमित मात्रा में खाएं। जो खा रहे हैं, उसकी अधिक मात्रा को श्रम कर खर्च करें। यह मौसम मधुमेहियों के लिए हृदयाघात वाला भी माना जाता है।

ठंड के मौसम में रसीले, फल-फूल, सब्जी की आवक भरपूर रहती है। गजक, लड्डू , पापड़ी, बरफी, पुलाव, पराठा खाने को मिलते हैं। यह मोटे लोगों के मोटापे एवं कोलेस्ट्राल को बढ़ाकर मुसीबत भी खड़ी कर सकता है। दोनों का बढ़ना मुसीबत का घर माना जाता है।

तेज ठंड में रात को ज्यादा समय में बाहर रहने, ठंडे पानी से नहाने पर हाइपोथर्मिया की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। शरीर ठंडा पड़ जाता है। इसमें शरीर का तापमान सामान्य से भी गिर जाता है। यह जानलेवा भी हो जाता है। शराब पीने वालों को यह खतरा और ज्यादा होता है।

ठंड के समय गर्म ताजा भोजन करें। मौसमी फल, फूल, सब्जी-भाजी, सलाद जरूर खाएं। मध्यम गर्म पानी में नहाएं। गर्म बिस्तर एवं बंद कमरे से सीधे बाहर न निकलें। पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें। इस मौसम में धूप सेवन कर लाभ जरूर लें। परांठा, पुलाव अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर खाएं। गुड़, गजक, पापड़ी, लड्डू, बरफी का अपने स्वास्थ्य के अनुसार सेवन करें। बंद कमरे में अंगीठी, सिगड़ी न जलाएं। चहलकदमी एवं व्यायाम करें। श्रम करने से न हिचकिचाएं। शरीर में सरसों का तेल लगाकर मालिश करें।

छोटे बच्चों एवं बूढ़ों के स्वास्थ्य पर इस मौसम में जरूर ध्यान दें। ठंडे पानी के स्थान पर सामान्य तापमान वाला पानी पिएं। सूप, जूस एवं दूध पिएं। यह सेहत बनाने का मौसम कहलाता है। ग्रीष्म और वर्षाकाल के समय के स्वास्थ्यगत खामी को यह दूर करता है।

इस मौसम में जोड़ों में दर्द, जकड़न, आलस, थकावट, कमजोरी, सर्दी, जुकाम, बुखार, ठंड लगना सामान्य बात है। दमा, पक्षाघात, शुगर, बी.पी., गठिया के रोगी भी अपनी सक्रियता बनाए रखने का उपाय करें और वांछित सेहत लाभ पाएं।

ये भी पढ़े: ठंड में बढ़ती है मधुमेहियों की शिकायत


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