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August 24 2019 04:23 AM

नई दुल्हन की भावनाओं को समझें

Posted at: May 21 , 2019 by Dilersamachar 7332

भाषणा बांसल

दीपा की शादी को अभी कुछेक दिन हुए हैं। उसकी सास सख्त स्वभाव की है। हर समय उसे हिदायतें देती रहती है, यह काम ऐसे नहीं, वैसे करो। बुरी तरह झुंझला उठती है दीपा।

एक दिन उसकी सास कहीं बाहर गई हुई थी। उसे पता नहीं था कि क्या चीज कहां रखी हुई है, इसलिए उसने सभी चीजें अस्त व्यस्त हो गई। सारा दिन काम में उलझी रहने के कारण उसे उनको सलीके से रखने का समय नहीं मिला। इतनी देर में उसकी सास आ गई व रसोई को देखते ही फट पड़ी।

दीपा, तुमने सारी रसोई को कबाड़खाना बना दिया है। एक दिन में ही सारी चीजें अस्तव्यस्त कर दी हैं  - वह गुस्से में बोली।

मम्मी, मुझे पता नहीं था कि कहां क्या रखा है, इसलिए मैं अभी ठीक करने ही जा रही थी कि आप...।

मैं आज ही आ गई तो तो ठीक हुआ वर्ना कल तक तो तुम सारे घर को कबाड़खाना बना देती।

दीपा परेशान हो उठी। वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या करें।

अधिकांश परिवारों में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। नई बहू से अपेक्षा की जाती है कि वह सब काम सुचारू रूप से करती रहे। पति, सास व परिवार के अन्य सदस्य उससे हर काम अपनी पसंद के मुताबिक करवाना चाहते हैं। कोई यह नहीं सोचता कि उसकी भी भावनाएं हैं। उसे भी नए परिवार, नए माहौल को समझने के लिए कुछ समय चाहिए।

शिखा की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। वह बदले हुए परिवेश में अपने आपको ढाल नहीं पा रही है। ससुराल का वातावरण, उसके घर के वातावरण से बिल्कुल भिन्न है व ऊपर से सास का रोबीला स्वभाव। बात बात पर उसे सास से सुनने को मिलता है - यहां ऐसा नहीं चलेगा।

क्या सास का कर्तव्य नहीं बनता कि उसे प्यार से अपने परिवार के बारे में जानकारी दे लेकिन वह तो सोचती है कि शिखा पर उसका दबदबा बना रहे। वह अपने कर्तव्यों से विमुख है, लेकिन उससे हर कर्तव्य को निष्ठापूर्वक निभाने की आशा रखती है।

अगर शिखा कभी इस बारे में पति से शिकायत करती है तो वह भी उसे ही दोष देते हैं। उसका मन क्षुब्ध हो उठता है। परिणामस्वरूप वह तनावग्रस्त रहती है। यह स्थिति सिर्फ शिखा और दीपा की ही नहीं, अधिकांश नवविवाहित युवतियों को इस स्थिति का सामना करना पड़ता है।

ऐसा कम लोग ही सोचते हैं कि वह एक अलग माहौल में पली-पढ़ी है इसलिए उसमें और ससुराल के सदस्यों में भिन्नताएं होनी स्वाभाविक हैं। उसे एकदम अपने अनुसार ढालने का प्रयास करना उचित नहीं है। बदले परिवेश व भिन्न परिस्थितियों में वैसे ही परेशानी होती है। अगर आप बात बात पर मीन मेख निकालने लगेंगे तो उसकी भावनाएं आहत हो जाएंगी और वह खुशी अनुभव नहीं करेगी।

पति व अन्य सदस्यों का कर्तव्य बनता है कि धीरे-धीरे उसे अपने घर के माहौल के बारे में अवगत कराएं व उसे उसके अनुसार ढलने के लिए कुछ समय भी दें। उसकी भावनाओं को समझें व हर कार्य में अपनी पसंद उस पर थोपने का प्रयास न करें।

जब माला की शादी हुई, उस वक्त वह अभी पढ़ ही रही थी। पढ़ाई में अधिक ध्यान होने के कारण घरेलू कामकाज में उसकी रूचि कम थी, इसलिए उसे कोई भी काम ढंग से करना नहीं आता था।

ससुराल में बड़ा परिवार था। मन ही मन वह घबरा रही थी, लेकिन उसकी सास बड़े अच्छे स्वभाव की थी। उसने समझदारी से काम लिया व धीरे-धीरे माला को सभी काम सिखा दिए। अब माला हर काम करने में सक्षम है और हर समय अपनी सास की तारीफ करती है। अगर माला की सास की तरह हर सास समझदारी से काम ले तो कितना अच्छा हो।

हर सास को चाहिए कि वह अपनी बहू को बेटी की तरह समझे। नई होने के कारण उसे जो मुश्किलें हों, उन्हें सुलझाने में उसकी मदद करे व उसे भरपूर स्नेह दे। अगर आप उससे स्नेह से पेश आएंगी तो वह भी आपको उचित सम्मान देगी और खुशी अनुभव करेगी, इसलिए हमेशा उसकी भावनाओं को समझते हुए उसे हर बात प्यार से समझाएं।

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